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पान की पीक से पटी दीवारों को हर रविवार साफ़ कर, खूबसूरत कलाकृतियाँ उकेरती है यह टीम!

पिछले सात सालों में एक भी रविवार ऐसा नहीं गया, जब ‘आईक्लीन भोपाल’ की टीम सफाई के लिए सड़कों पर न उतरी हो।

हर की साफ़-सफाई किसकी ज़िम्मेदारी है? यह जानते हुए भी कि जनता की भागीदारी के बिना कुछ भी संभव नहीं है, इस सवाल के जवाब में अधिकांश लोग कहेंगे ‘नगर निगम’ की कुछ लोग ऐसे भी मिल जाएंगे जो ‘स्वच्छ भारत टैक्स’ का हवाला देकर अपने हाथ खड़े कर लेंगे, लेकिन भोपाल में यह सोच तेजी से बदल रही है और इस बदलाव की वजह हैं कल्पना केकरे कल्पना अपनी टीम के साथ मिलकर पूरी शिद्दत से भोपाल को स्वच्छ बनाने के अभियान में लगी हैं कल्पना और उनके वॉलंटियर शहर के 300 से अधिक ऐसी जगहों का कायाकल्प कर चुके हैं, जो गंदगी की मार झेल रहे थे

विश्व सफाई दिवस पर हस्ताक्षर अभियान के दौरान कल्पना केकरे

साल 2013 में उन्होंने महज छह लोगों के साथ ‘आईक्लीन भोपाल’ नाम से इस अभियान की शुरुआत की थी और आज 200 से ज्यादा शहरवासी इसका हिस्सा बन चुके हैं। खास बात यह है कि ‘आईक्लीन भोपाल’ के काम को सरकारी संस्थाओं द्वारा भी सराहना मिल रही है।

“यहां-वहां बिखरी पड़ी गंदगी देखकर मुझे लगा कि कुछ न कुछ करना चाहिए, अपने घर के साथ-साथ शहर को स्वच्छ रखना भी हमारी ज़िम्मेदारी है। बस इसी सोच के साथ मैंने अपने जैसे पांच लोगों को जोड़ा और धीरे-धीरे यह संख्या छह से बढ़कर 200 हो गई।” – कल्पना 

‘आईक्लीन भोपाल’ के सदस्य पहले किसी ऐसे स्थान का चुनाव करते हैं जहाँ की दीवारों का रूप-रंग निखारने की सबसे ज्यादा ज़रूरत है फिर उसके लिए आवश्यक संसाधन जुटाते हैं, जैसे पेंट, ब्रश आदि और इसके बाद रविवार को कुछ घंटों की मशक्कत के बाद उस जगह को देखने लायक बना देते हैं। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि पिछले सात सालों में एक भी रविवार ऐसा नहीं गया, जब ‘आईक्लीन भोपाल’ की टीम सफाई के लिए सड़कों पर न उतरी हो। यह शहर को स्वच्छ बनाने को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस अभियान पर होने वाले खर्च की भरपाई सभी मिलकर करते हैं। प्रत्येक महीने हर सदस्य से 50-50 रुपए इकठ्ठा किये जाते हैं। इतनी छोटी राशि देने में किसी को परेशानी भी नहीं होती और साफ़-सफाई का इंतजाम भी हो जाता है। इसके अलावा, रद्दी आदि बेचकर भी फंड की व्यवस्था की जाती है। हाल ही में टीम के सदस्यों ने भोपाल स्थित कलेक्टर कार्यालय की दीवारों पर खूबसूरत कलाकृतियाँ उकेरकर उन्हें देखने लायक बनाया है। 

दीवारों को खूबसूरत बनाते ‘आईक्लीन भोपाल’ के सदस्य

शहर की सूरत चमकाने के इस अभियान के पीछे आखिर क्या वजह रही? इस संबंध में ‘द बेटर इंडिया’ से बात करते हुए ‘आईक्लीन भोपाल’ की फाउंडर कल्पना केकरे कहती हैं,

‘मैं साफ़-सफाई का बेहद ख्याल रखती हूँ, लिहाजा जब शहर में घूमने निकलती हूँ तो गंदगी देखकर बुरा लगता है पान के पीक से पटी दीवारें और बिखरा कूड़ा देखकर लगता कि कुछ करना चाहिए आखिर अपने शहर को साफ़-सुथरा रखने की ज़िम्मेदारी हमारी भी है मैंने बंगलुरु के ‘द अगली इंडियन’ ग्रुप के स्वच्छता अभियान के बारे में काफी सुना था और उससे प्रेरित भी थी इसलिए एक जैसी सोच रखने वाले पांच अन्य लोगों के साथ मिलकर दिसंबर, 2013 में आईक्लीन भोपाल का गठन किया।”

टीम के सदस्य गर्मियों के मौसम में प्रत्येक रविवार को सुबह 6 बजे और सर्दियों में 10 बजे चिन्हित किए गए स्थान को चमकाने का काम करते हैं शुरुआती दिनों में कल्पना खुद अपने साथियों के लिए चाय-नाश्ता घर से बनाकर ले जाया करती थीं, लेकिन अब चूँकि सदस्यों की संख्या बढ़कर 200 हो गई है, तो यह मुमकिन नहीं हो पाता

‘आईक्लीन भोपाल’ के साथ युवा, काम करनेवाले और हर उम्र के लोग जुड़े हुए हैं, जो हबीबगंज, सुभाष नगर, बागसेवनिया थाना, आरटीओ ऑफिस, ओल्ड कैम्पियन, मिसरोद, चेतक ब्रिज, कोलार, माता मंदिर, जिलाधिकारी कार्यालय सहित शहर के कई हिस्सों का सौंदर्यीकरण कर चुके हैं 

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साफ़-सफाई एक ऐसा विषय है, जिसमें अधिकांश लोगों की कम ही दिलचस्पी होती है ऐसे में शहर को साफ़ करने के अभियान में तमाम चुनौतियां आई होंगी? इस बारे में कल्पना कहती हैं,

“चुनौतियां तो बेशक आईं, खासकर शुरुआती दिनों में। हमारे पक्ष में कम, विरोध में ज्यादा लोग थे। लेकिन, हम पीछे नहीं हटे और आगे बढ़ते गए। आख़िरकार विरोधियों को हमारे लिए रास्ता छोड़ना ही पड़ा आज भी हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है, ऐसे लोगों को रोकना जो साफ़-सुथरी जगह को गंदा करने की आदत से ग्रस्त हैं कई बार ऐसा होता है कि हम कोई दीवार साफ़ करके आते हैं और कुछ देर बाद उसे पोस्टरों से पाट दिया जाता है हालांकि, अच्छी बात यह है कि भोपाल नगर निगम अब ऐसे लोगों पर सख्ती दिखा रहा है हाल ही में एक कोचिंग संचालक पर जुर्माना भी लगाया गया था।”

शहरवासियों में स्वच्छता की अलख जगाते ‘आईक्लीन भोपाल’ के प्रयासों से नगर निगम कमिश्नर बी. विजय दत्ता भी काफी खुश हैं उन्होंने निगम कर्मचारियों को निर्देश भी दिया है कि टीम कल्पना की हर संभव मदद की जाए 

शहर की गंदगी साफ़ करने की बात पर घरवालों की प्रतिक्रिया कैसी रही, इस सवाल के जवाब में कल्पना कहती हैं,

“घरवालों को तो कोई समस्या नहीं हुई, लेकिन कुछ पहचान वालों ने ज़रूर हतोत्साहित किया, लेकिन इसमें उनकी भी गलती नहीं है अमूमन जब आप कुछ अलग करने का प्रयास करते हैं,तो ऐसा ही होता है हालाँकि, अब सबकुछ बदल गया है लोग न केवल हमारे काम को सराहते हैं, बल्कि उसका हिस्सा भी बनते हैं हमें यह कहते हुए गर्व होता है कि हमने ‘स्वच्छ भारत’ अभियान से पहले ही ‘स्वच्छ भोपाल’ अभियान की शुरुआत कर दी थी।”

वहीं, ‘आईक्लीन भोपाल’ से जुड़े अजय कपूर मानते हैं कि भोपाल में पिछले कुछ सालों में बहुत कुछ बदला है, लोगों की सोच भी जब शहरवासी हमें साफ़-सफाई करते देखते हैं, तो वे भी जागरूक होते हैंहम जहाँ भी अभियान चलाते हैं, वहां आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाये रखने के लिए प्रेरित भी करते हैं   

300वां टास्क पूरा करने के मौके पर भोपाल महापौर और नगर निगम कमिश्नर के साथ ‘आईक्लीन भोपाल’ के सदस्य

यदि स्वच्छता का संदेश देते ‘आईक्लीन भोपाल’ के प्रयासों ने आपको प्रेरित किया है और किसी न किसी रूप में उससे जुड़ना चाहते हैं, तो फेसबुक पेज के माध्यम से ग्रुप से संपर्क कर सकते हैं।

 

संपादन – अर्चना गुप्ता


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