इन रक्तवीरों ने साबित किया – “सिर्फ अपना खून ही अपना नहीं होता”

भी-कभी हमें जीवन को एक नई दिशा देने के लिए किसी बहुत बड़े सबक या ज्ञान की जरूरत नहीं होती, बहुत छोटी-छोटी घटनाओं से मिले अनुभव से रूबरू होकर ही हम अपने जीवन का उद्देश्य निर्धारित कर लेते हैं। जोधपुर में रहने वाले रजत गौड और उनके दोस्तों के साथ भी ऐसा ही हुआ।

रजत और उनके दोस्तों द्वारा गत कई वर्षों से रक्तदान शिविर आयोजित कर जरूरतमंदों की मदद की जा रही है। अब उनका कारवां पूरे देश में आगे बढ़ रहा है, देशभर से लोग उनसे जुड़ रहे हैं। ‛द बेटर इंडिया’ से बात करते हुए वह बताते हैं कि कैसे उनकी और उनके दोस्तों की ज़िंदगी में एक दुर्घटना घटित हुई और वे लोग इस नेक रास्ते पर चल पड़े।

रजत गौड (राष्ट्रीय अध्यक्ष, लाल बूंद जिंदगी रक्षक सेवा संस्थान)

 

एक घटना ने बदली ज़िंदगी!

आज से 4 साल पहले तक इन दोस्तों को ब्लड डोनेशन के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। पर साल 2016 में दीवाली की रात को उनके दोस्त के भाई का एक्सीडेंट हो गया। दुर्घटना स्थल से अस्पताल आने के दौरान उनका खून बहुत ज्यादा बह गया था। डॉक्टर ने बताया कि ब्लड बैंक में पड़ा ब्लड नहीं, फ्रेश ब्लड चाहिए और उन्हें 4 से 6 यूनिट ब्लड की आवश्यकता होगी। कई मुश्किलों के बावजूद इन दोस्तों ने किसी तरह ब्लड देकर मरीज़ को बचा लिया। एक जान तो इन लोगों ने बचा ली थी, पर उस रात रजत और उनके दोस्तों ने न सिर्फ रक्त के महत्व को समझा बल्कि किसी की जिंदगी बचाने की अहमियत भी समझी।

 

फिर जन्म हुआ ‛लाल बूंद ज़िंदगी रक्षक सेवा संस्थान’ का

उस घटना से उबर जाने के कुछ दिन बाद जब ये सारे दोस्त कॉलेज की कैंटीन में बैठे थे, तभी रजत के एक साथी रवि तिवाड़ी ने कहा, “क्या हम उस रात मिले सबक को ऐसे ही भूला देंगे? अब से हम जितना ज्यादा हो सके ब्लड डोनेशन कैम्प करेंगे, खुद भी ब्लड डोनेट करेंगे और किसी की ज़िंदगी को बचाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके लिए हमें समय निकालना होगा। जो तकलीफ़ हमने उस रात देखी है, बहुत से लोग रोज देखते होंगे!

रवि तिवाड़ी (सचिव, लाल बूंद जिंदगी रक्षक सेवा संस्थान )

इस तरह रजत और मौजूद 5-7 दोस्तों ने एक साथ मिलकर प्रण लिया कि अब से वे रक्तदान के लिए कार्य करेंगे और इस तरह ‛लाल बूंद ज़िंदगी रक्षक सेवा संस्थान’ की नींव रखी गई। करीब डेढ़ साल तक कार्य करते रहने के बाद संस्था को रजिस्टर करवाया गया।

 

पहले कैम्प में 57 यूनिट ब्लड इकट्ठा हुआ

पहले व्हाट्सअप और फेसबुक के माध्यम से कैम्प का प्रचार प्रसार किया गया। पहला ब्लड डोनेशन कैम्प जोधपुर के ही पावटा सैटेलाइट हॉस्पिटल में आयोजित किया, जहां 57 यूनिट ब्लड इकट्ठा हुआ। इसके बाद रजत ने संस्थान के नाम से पहली बार व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और जुड़ने वाले ब्लड डोनर का नाम उसके ब्लड ग्रुप के साथ लिखा। किस अस्पताल में किसको, किस ब्लड ग्रुप की आवश्यकता है, इस तरह के सारे मैसेज़ इस ग्रुप के ज़रिए मुहैया करवाए जाते रहे। आज ऐसे 6 ग्रुप हैं जिनमें सभी तरह के ब्लड ग्रुप के डोनर्स के लिए अलग-अलग ग्रुप हैं।

 

राजस्थान के अलावा कई राज्यों में फैल रहा है नेटवर्क

राजस्थान के शहर जोधपुर से निकले ये रक्तवीर (ब्लड डोनेशन का काम करने वाले लोग) आज कई राज्यों में अपने ब्लड डोनर्स का नेटवर्क विकसित कर रहे हैं। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, चेन्नई, बंगलुरु, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात आदि में इस संस्थान से जुड़े डोनर्स मौजूद हैं। जोधपुर से बाहर राज्यों में नौकरी के लिए गए लोगों से भी इन दोस्तों ने संपर्क साधते हुए अपनी टीम को और अधिक मजबूत और विस्तृत किया है।

‛लाल बूंद ज़िंदगी रक्षक सेवा संस्थान’ से देशभर के 10,000 सक्रिय रक्तवीर जुड़े हैं। जोधपुर में किसी भी वक्त, किसी भी ग्रुप के ब्लड की जरूरत होने पर लगभग 200 डोनर्स तत्काल सेवा के लिए तैयार रहते हैं। उनका मानना है कि 1 यूनिट ब्लड भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भी 3 लोगों की जान बचाई जा सकती है। आज इस संस्थान के तहत 625 लोगों की जान बचाई जा चुकी है और अब ये लोग भी संस्थान से जुड़कर दूसरे लोगों की जान बचा रहे हैं।  संस्थान के रक्तवीर अब अन्य गतिविधियों जैसे गौशाला की गायों को चारा देने, लावारिस कुत्तों को भोजन, सड़क दुर्घटनाओं में सेफ्टी कैंपेन आदि से भी जुड़े हैं। इन लोककल्याणकारी कार्यों के लिए संस्थान को कई सम्मान भी मिल चुके हैं। वर्तमान में रजत गौड संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा रवि तिवाड़ी संस्थान के सचिव हैं।

संस्थान से जुड़े रजत कम वजन होने के कारण खुद भले ही रक्त नहीं दे सकते पर वह अब तक 8500 यूनिट ब्लड सरकारी अस्पतालों में दान करवा चुके हैं और अपनी टीम के साथ मिलकर 134 रक्तदान शिविर भी आयोजित करा चुके हैं।

जोधपुर, अहमदाबाद और मुंबई में 1500 लाइव डोनर्स के माध्यम से SDP यानि सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (जहां एक ही व्यक्ति से सारी प्लेटलेट्स मिल जाती हैं) भी डोनेट किए जा चुके हैं। शादी की सालगिरह, जन्मदिन, पुण्यतिथि और जागरण पर लोगों से अनुरोध करके रक्तदान की अपील की जाती है। ‘लाल बूंद ज़िंदगी रक्षक सेवा संस्थान’ द्वारा हर महीने 4 रक्तदान शिविर आयोजित किये जाते हैं। ये शिविर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 2-2 बार आयोजित होते हैं।

‘लाल बूंद ज़िंदगी रक्षक सेवा संस्थान’ ने जोधपुर संभाग में थैलीसीमिया रोग से ग्रसित 125 बच्चों को ब्लड पहुंचाने का भी ज़िम्मा उठाया है। पूरे संभाग में 254 बच्चे उमेद अस्पताल में पंजीकृत हैं, एक बच्चे को महीने में 2 बार खून चढ़ता है।

 

चुनौतियाँ

इस चुनौतियों के बारे में बताते हुए रजत उदाहरण के तौर पर एक किस्सा सुनाते हैं। वह बताते हैं कि एक बार मध्यप्रदेश से मज़दूरी के लिए आई एक महिला को जोधपुर में डेंगू बुखार था और प्लेटलेट्स कम होकर 10,000 से नीचे आ गए थे। महिला की जान बचाने के लिए उन्हें कम से कम 3 यूनिट ब्लड चढ़ाने की ज़रूरत थी। उन्हें ‛बी पॉजिटिव’ SDP की जरूरत थी।
10 डोनर्स में से 3 ही डोनर्स का खून मैच हो रहा था। उनमें से भी किसी के हाथ की नस नहीं मिल रही थी, किसी को बुखार था, तो किसी का हीमोग्लोबिन कम था। ऐसे में बैंक में नाइट ड्यूटी पर लगे ओमप्रकाश चौधरी ने फेसबुक पर की गई अपील को पढ़ा और वह अस्पताल आ गए और SDP देकर उस महिला की जान बचाई।रजत के अनुसार दूसरी बड़ी चुनौती यह है कि ग्रामीण इलाकों के लोग आज भी रक्तदान से डरते हैं।

वह बताते हैं,“हमारी टीम गाड़ी लेकर गाँव पहुंच जाती है। कुछ ग्रामीण रक्त देने पर राज़ी भी हो जाते हैं, लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि किसी को रक्त देते देख दूसरा ग्रामीण चक्कर खाकर गिर पड़ता है। ऐसे में, ग्रामीण इलाकों में नए रक्तदाताओं को जोड़ने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसलिए अब ऐसे ग्रामीण इलाकों में कैम्प से पूर्व हमारी संस्थान से जुड़े युवा, लोगों को जागरूक करने के लिए भी मेहनत करते हैं।”

रक्तदान शिविर में रक्तदान करवाना बड़ी बात नहीं है, पर रक्तदान को लेकर लोगों को जागरूक करना वाकई एक बड़ी चुनौती है। इसलिए यह संस्था ऐसे प्रयासों में जुटी है जिससे लोग जरूरत पड़ने पर खुद आगे आकर रक्तदान करें।

यदि आप भी इन रक्तवीरों से जुड़ कर किसी प्रकार की मदद करना या मांगना चाहते हैं तो टोल फ्री नंबर-18001212561 या मोबाइल नंबर- 09784574191 पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही संस्थान की वेबसाइट या फेसबुक से भी जुड़ सकते हैं। इसके अलावा अगर आप संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष रजत गौड से व्यक्तिगत तौर पर जुड़ना चाहें तो फेसबुक पर जुड़ सकते हैं।

संपादन – अर्चना गुप्ता


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं।

देशभर के 250 से ज्यादा प्रकाशनों में 6500 से ज्यादा लेख लिख चुके चिश्ती 22 सालों से पत्रकारिता में हैं। 2012 से वे कृषि, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर कलम चला रहे हैं। अब तक उनकी 10 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। पर्यावरण संरक्षण पर लिखी उनकी एक पुस्तक का लोकार्पण संसद भवन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के हाथों हो चुका है।
Posts created 46

Related Posts

Begin typing your search term above and press enter to search. Press ESC to cancel.

Back To Top
सब्सक्राइब करिए और पाइए ये मुफ्त उपहार
  • देश भर से जुड़ी अच्छी ख़बरें सीधे आपके ईमेल में
  • देश में हो रहे अच्छे बदलावों की खबर सबसे पहले आप तक पहुंचेगी
  • जुड़िए उन हज़ारों भारतीयों से, जो रख रहे हैं बदलाव की नींव