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इस महिला ने मुंबई की 44 सोसाइटी को सिखाया कचरा मैनेजमेंट

कचरा प्रबंधन की प्रणाली में बदलाव लाने के कारण मारिया को स्थानीय गुंडों और निवासियों के विरोध व धमकियों का सामना करना पड़ा।

ब लोग आपके काम की आलोचना या विरोध करना शुरू कर देते हैं, तब आपको समझ लेना चाहिए कि आप सही रास्ते पर हैं”, ऐसा कहना है रिटायर टीचर मारिया डीसूज़ा का, जिन्होंने मुंबई की 44 सोसाइटी में कचरा पृथिक्करण को 100 प्रतिशत लागू करने में सफलता पाई है। अब उनकी कोशिश है कि इन सभी जगहों को वह कम्पोस्टिंग द्वारा कचरा मुक्त बनाए और 20 सोसाइटी में ऐसा करने में वह सफल भी हो गई हैं । 

एडवांस लोकैलिटी मैनेजमेंट की प्रधान के रूप में 68 वर्षीय मारिया ने मुंबई जैसे शहर में कचरा प्रबंधन की प्रणाली में बदलाव लाने की ठानी। इस कारण उन्हें स्थानीय गुंडों, निवासियों व पार्षदों की ओर से कई तरह के विरोध व धमकियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इनकी हिम्मत ने इनका साथ नहीं छोड़ा । 

 

एडवांस लोकैलिटी मैनेजमेंट (एएलएम) क्या है? 

एएलएम, ग्रेटर मुंबई नगर निगम (जिसे बीएमसी भी कहा जाता है) द्वारा 1997 में शुरू किया गया था ताकि वे नागरिकों के साथ मिलकर समीति बना पाएं और शहर के हरित-भविष्य के लिए काम कर पाएं। शहर के हर क्षेत्र में वहां के निवासियों द्वारा एक एएलएम समिति बनाई गई है जो साथ मिलकर काम करते हैं और निगम के समक्ष पर्यावरण संबंधी समस्याओं को उजागर करने के साथ ही समाधान के प्रस्ताव भी देते हैं जिसे फिर नगर निगम द्वारा लागू किया जाता है। 

मारिया ने अपने क्षेत्र का कार्यभार साल 1998 में संभाला था। वह बांद्रा के वैकुंठ अपार्टमेंट में रहती हैं और इनके नेतृत्व वाले एएलएम के अंतर्गत करीब 44 आवासीय सोसाइटी आती है जो बांद्रा, खार व सांताक्रूज तक फैली हुई है। 

प्रारम्भिक लेकिन प्रभावी शुरुआत 

बांद्रा के सेंट स्टेनिस्लॉस हाई स्कूल में एक टीचर के रूप में कार्यरत मारिया ने कचरे प्रबंधन के लिए 90 की दशक से काम करना शुरू कर दिया था। कारण था – स्कूल के बाहर लगे दो कचरे के डब्बे ! मारिया द बेटर इंडिया से बात करते हुए बताती हैं,

“स्कूल के निकासी गेट के ठीक बाहर 2 बड़े कचरे के डब्बे हुआ करते थे, जिसका कचरा बाहर की ओर फैला रहता था। उस कचरे पर जानवर, मक्खियाँ व कीड़े मकौड़े बैठे रहते थे जिनसे हमारे स्कूल के छात्रों पर स्वस्थ्य संबंधी खतरों का डर मंडराता रहता था। ग्रेटर मुंबई नगर निगम इसकी नियमित सफाई नहीं करा पाता था। एक बार तो यह कचरे का ढेर बढ़कर पांव धंसने जितना हो गया था जिसपर चल कर बच्चे गिर जाते थे। मैंने वहां के स्थानीय पार्षद के कई चक्कर काटे पर कोई फायदा नहीं हुआ”। 

मारिया ने स्कूल बच्चों से भी पार्षद के नाम इस समस्या से संबन्धित एक पत्र लिखवाया। वह इस प्रयास से प्रभावित तो हुए पर फिर भी समस्या बनी रही। मारिया आगे बताती हैं, “ यह समस्या तब हल हुई जब नगर निगम के ही किसी स्टाफ मेम्बर ने स्कूल में अपने किसी रिश्तेदार के बच्चे के दाखिले के लिए संपर्क किया। हमने उन्हें ये समस्या बताई और अगले ही दिन इस कूड़ेदान को साफ कर दिया गया”। 

वहां के स्थानीय लोगों को ये बात अच्छी नहीं लगी और वह मारिया को परेशान करने लगे। वह बताती हैं,

“ हालांकि यह परेशानी कुछ ही दिन की थी, पर जब भी मैं दरवाजे से निकलती तो वे लोग जिनमें अधिकतर कूड़ा उठाने वाले थे, मेरे ऊपर सड़े टमाटर, बचा खाना, कपड़े आदि फेंकते थे। पहली बार मेरा सामना ऐसे लोगों से हुआ जो कचरा प्रबंधन के विरुद्ध थे”। 

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इस घटना ने मारिया को और मजबूत बना दिया। 

Residents of Vaikunth Apartment

अगले दशक में मारिया ने हाउसिंग सोसाइटी के लोगों को कचरे को विभाजित करने और उन्हें खाद में बदले की प्रक्रिया से अवगत कराने का काम किया। मारिया की सोसाइटी ऐसी पहली सोसाइटी है जिसने सूखे व गीले कचरे का पृत्थीक्करण करने में सफलता पाई।  दिलचस्प बात है कि साल 2013 में इसी सोसाइटी ने पहली बार गीले कचरे को खाद मे बनाने का काम किया। 

“ये प्रक्रिया आसान नहीं थी, लोग कचरे का अलगाव करने व खाद बनाने को ले कर कई बहाने बनाते थे जैसे – ‘हम क्यूँ कचरा अलग अलग करें, ये ग्रेटर मुंबई नगर निगम का काम है, हम टैक्स भर रहे हैं तो हम क्यूँ कचरे को खाद में बदले? हमारे अलग करने से क्या हो जाएगा जब बाकी के शहर को इसके बारे में जानकारी तक नहीं?’ ये सारे कुछ ऐसे प्रश्न थे जिन्हें यहां के निवासी उठाया करते थे। 

सभी के मन में उपजी शंका को दूर करने के लिए मारिया और उनकी टीम ने हर बिल्डिंग में जा कर वहां के लोगों को इस समस्या से जुड़ी बातों को समझाने का प्रयत्न किया । 

उन्होंने लोगों का ध्यान, लैंडफिल का ओवरफ्लो हो जाना, कचरे जलाना, कचरे उठाने वालों के स्वास्थ्य पर होने वाले खतरे और साथ ही जहरीले गैस में सांस लेने जैसे ज्वलंत मुद्दों की तरफ खींचा।  

मारिया की सोसाइटी ने गीले कचरे को खाद में बदलकर और सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग सेंटर पर भेज कर ज़ीरो वेस्ट बनाया और उसके बाद आस पड़ोस की सोसाइटी ने भी इसका पालन करना शुरू कर दिया। आखिरकार 2 स्कूल व चर्च ‘कचरा मुक्त’ हो गए। 

20 societies in Mumbai have switched to composting thanks to Maria’s efforts

ये मारिया की कोशिशें ही थी कि मुंबई की 20 सोसाइटी कचरे से खाद बनाने में सफल हो पाई। मारिया ने स्थानीय कंपनियों की सूची तैयार की जो खाद बनाने के कम्पोस्टिंग यूनिट उपलब्ध करवाते हैं और इस सूची को उन्होंने पूरी सोसाइटी में वितरित कर दिया। 

अधिकतर हाउसिंग सोसाइटी में ऐसे कई यूनिट लगे हुए हैं जो एक महीने में कचरे को खाद में बदल देती है। कुछ के पास प्रशिक्षित स्टाफ है तो कुछ ने इस प्रक्रिया के लिए लोगों को काम पर रखा है। मारिया बताती हैं कि कुछ सोसाइटी के लोग इस प्रक्रिया में लगे लागत का खर्च इन जैविक खाद को बेच कर निकालते हैं। 

साल 2018 में ग्रेटर मुंबई नगर निगम ने ऑन साइट कम्पोस्टिंग को सिर्फ वैसी बिल्डिंग के लिए अनिवार्य घोषित कर दिया जिनका कचरा उत्पादन 100 किलो से अधिक है। कम्पोस्टिंग के इस कदम से मारिया के मिशन में रुकावट आ गयी। वह कहती हैं, “ कई सोसाइटी जहां कम कचरा निकलता है उंन का कहना है कि वे इस श्रेणी में नहीं आते इसलिए उन्हें खाद बनाने की ज़रूरत नहीं। पर हम रुकेंगे नहीं। हम उन्हें तब तक मनाने की कोशिश करेंगे जब तक हमारा पूरा एएलएम कचरा मुक्त (ज़ीरो वेस्ट) न बन जाए”।

अगर आप भी मारिया से संपर्क करना चाहते हैं तो उन्हें almmountmarykane@gmail.com पर लिख सकते हैं।

संपादन- अर्चना गुप्ता

मूल लेख – गोपी करेलिया

 


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Written by निधि निहार दत्ता

निधि निहार दत्ता राँची के एक कोचिंग सेंटर, 'स्टडी लाइन' की संचालिका रह चुकी है. हिन्दी साहित्य मे उनकी ख़ास रूचि रही है. एक बेहतरीन लेखिका होने के साथ साथ वे एक कुशल गृहिणी भी है तथा पाक कला मे भी परिपक्व है.

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