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मात्र 99 रुपये में पाएं 300 लीटर शुद्ध पानी!

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निरंजन का कहना है कि उनके फिल्टर की मांग भारत के अलावा, श्रीलंका, नेपाल, न्यूज़ीलैंड, मलेशिया, अबु धाबी, क़तर जैसे 50 से ज्यादा देशों में है।

क्सर कुछ बहुत बड़ा करने के चक्कर में हम छोटी समस्याओं को अनदेखा कर देते हैं। जबकि इन छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान ढूंढकर हम समाज के एक बड़े तबके के लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं। जैसा कि कर्नाटक के एक 24 साल के युवा ने किया।

बेलगाम के रहने वाले निरंजन कारागी ने आंगडी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एक पोर्टेबल वाटर फिल्टर के आइडिया पर काम करना शुरू किया था। द बेटर इंडिया से बात करते हुए निरंजन ने बताया,

“मेरे घर के सामने एक सरकारी स्कूल है, जहां अक्सर शाम में मैं फुटबॉल वगैरह खेलने जाया करता था। वहां उसी स्कूल के बहुत से छात्र भी खेलने आते थे। मैं देखता था कि जब भी उन्हें प्यास लगती तो वे जाकर स्कूल में लगे नलों से पानी पीते थे। उन नलों का कनेक्शन सीधा स्कूल की छत पर रखी टंकी से था। वहां कोई फिल्टर आदि कुछ नहीं था और हम सबको पता है कि छतों पर रखी पानी की टंकियों की साफ़-सफाई भी रेग्युलर तौर पर नहीं होती है। “मुझे लगने लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए क्योंकि अगर ऐसे ही चलता रहा तो ये बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं रहेगा। पहले मैंने सोचा कि मैं थोड़े पैसे इकट्ठे करके स्कूल को एक वाटर फिल्टर डोनेट कर देता हूँ।”

Niranjan Karagi

पर जब निरंजन ने बाज़ार में वाटर फिल्टर्स की कीमत पता की तो उन्हें समझ में आ गया कि उन्हें काफी पैसों की ज़रूरत होगी और फिर पानी की समस्या तो बहुत जगह है। सरकारी स्कूलों में ज़्यादातर गरीब तबके के बच्चे आते हैं। स्कूल में तो वाटर फिल्टर लगवाया जा सकता है, लेकिन उनके घरों का क्या?

वह कहते हैं कि उस समय उन्हें समझ में आया कि साफ़-शुद्ध पीने का पानी मिल पाना आज के समय में लक्ज़री हो गया है। इसलिए उन्होंने ऐसा कुछ करने की ठानी जिससे कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए इस समस्या का हल निकाल पाएं। उन्होंने अपने कॉलेज की लैब में ही अपने प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया।

जुलाई 2016 में उन्होंने अपना वाटर फिल्टर का प्रोजेक्ट शुरू किया और नवंबर 2016 में इसका पहला प्रोटोटाइप तैयार हुआ।उन्होंने बताया – “मैंने ऐसे फिल्टर पर काम किया जो कि बोतल के हिसाब से हो। स्कूल, कॉलेज या फिर कहीं ट्रैवलिंग के लिए भी निकलना हो तो हम पानी की बोतल साथ लेकर निकलते हैं। इसलिए मैंने एक पोर्टेबल बोतल फिल्टर बनाने पर काम किया, जिसे आपको बस बोतल की मुँह पर फिट करना पड़े और आपको स्वच्छ पानी मिल जाए।”

उन्होंने इस फिल्टर को बनाने में एक्टिवेटिड चारकोल, कॉटन और कपड़े का इस्तेमाल किया और इसे नाम दिया- नीर्नल। उन्होंने सबसे पहला प्रोटोटाइप टेस्टिंग के बाद मात्र 20 रुपये में बेचा। यह उनका बेसिक बोतल फिल्टर है, जिसका रंग लाल है। इसकी क्षमता 100 लीटर पानी को फिल्टर करने की है। यह पानी से धूल-मिट्टी, गंध और क्लोरीन को साफ़ करता है।

निरंजन के मुताबिक, साल 2016 से 2018 के बीच उन्होंने उत्तरी कर्नाटक और पश्चिमी महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों, किसानों, मजदूरों और सामाजिक संगठनों को 50 हज़ार से भी ज्यादा नीर्नल बोतल फिल्टर बेचे। उन्होंने हज़ार से ज्यादा फिल्टर भारतीय सेना और आईएनएस विक्रमादित्य को भी सप्लाई किये हैं।

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इसके साथ ही, उन्होंने अपने फिल्टर को अपग्रेड करने का काम भी किया और एडवांस्ड बोतल फिल्टर बनाया। ये एडवांस्ड बोतल फिल्टर रंग में नीला है और 300 लीटर पानी को साफ़ करने की क्षमता वाला है।

“हमारा यह फिल्टर धूल-मिट्टी, गंध और क्लोरीन के साथ-साथ 99. 9% बैक्टीरिया को भी हटाता है। इसकी कीमत मात्र 99 रुपये है,” निरंजन ने बताया। कम लागत होने के साथ-साथ ये फिल्टर इको-फ्रेंडली और पोर्टेबल भी है। सबसे अच्छी बात है कि इस फिल्टर की शेल्फ लाइफ सीमित नहीं है।

आप इसे कभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन एक बार इस्तेमाल करने के बाद, ये सिर्फ दो महीने तक या फिर 300 लीटर पानी फिल्टर करने तक ही उपयोग में आएगा। नीर्नल वाटर बोतल फिल्टर खरीदने के लिए यहाँ पर क्लिक करें!

 

अपने इस प्रोजेक्ट और स्टार्टअप की फंडिंग के बारे में निरंजन ने बताया, “शुरू में जब मैंने सभी चीजों के खर्च का हिसाब लगाया तो मुझे लगभग 12 हज़ार रुपये की ज़रूरत थी। 5, 000 रुपये मुझे मेरे परिवार से मिले और बाकी पैसों की फंडिंग देशपांडे फाउंडेशन की मदद से हुई। इसके बाद जब एक बार प्रोडक्ट बन गया और बिकने लगा तो उससे जो भी प्रॉफिट आता, वो सब मैं आगे के काम में लगा देता।”

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फिलहाल, वह अपने घर के पास ही एक खाली ज़मीन पर शेड लगवाकर मैन्युफैक्चरिंग का काम कर रहे हैं। आज उनकी टीम में 8 लोग है और उनके मुताबिक अब तक वे कुल 2 लाख से भी ज्यादा फिल्टर्स बेच चुके हैं। साथ ही, उन्हें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल, बेस्ट इंटरप्रेन्योर, युवा शिल्पी, स्टार्टअप इंडिया 2018 जैसे कई अवॉर्ड्स से नवाज़ा गया है।

निरंजन के इस आविष्कार को न सिर्फ हमारे देश में बल्कि अन्य देशों में भी सराहना मिल रही है। पिछले एक साल में नीर्नल के बारे में लगातार सोशल मीडिया पर चर्चा होती रही है और वहीं से उनकी पहुँच बाहर के देशों तक भी बन गयी। निरंजन का कहना है कि उनके फिल्टर की मांग भारत के अलावा, श्रीलंका, नेपाल, न्यूज़ीलैंड, मलेशिया, अबु धाबी, क़तर जैसे 50 से ज्यादा देशों में है।

अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए निरंजन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, कार्निवल को भी श्रेय देते हैं। वह कहते हैं कि कार्निवल की वजह से उनके स्टार्टअप को लोगों से जुड़ने का और अपने ग्राहकों तक पहुँचने का सरल साधन मिला। ऐसे बहुत ही कम ऑनलाइन प्लेटफार्म हैं जो सोशल स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने का मौका देते हैं।

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भविष्य के लिए निरंजन का लक्ष्य है कि वह अपने इस फिल्टर की क्षमता को 300 लीटर से अधिक बढ़ाएं और साथ ही, उनका उद्देश्य इसकी कीमत कम करना भी है। अंत में वह सिर्फ इतना कहते हैं,

“मुझे लगता है कि अब युवाओं को आगे बढ़कर समस्याओं को गिनाने की बजाय उनके समाधान ढूंढने की पहल करनी चाहिए। आपका छोटे से छोटा कदम भी बहुत बड़ा प्रभाव ला सकता है।”

संपादन- अर्चना गुप्ता


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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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