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पद्म श्री विजेता इस हार्ट सर्जन ने की थी भारत में पहली बाईपास सर्जरी!

डॉ. चेरियन एक मशहूर हार्ट सर्जन हैं और उन्होंने अब तक 46, 000 से भी ज्यादा सर्जरी की हैं!

दि आप 80 साल की उम्र तक जीते हैं तो आपका दिल 3 बिलियन से भी ज्यादा बार धड़क चूका होता है। पर आजकल की लाइफस्टाइल में मैन शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग का ठीक से काम करना भी मुश्किल हो रहा है।

द बेटर इंडिया ने डॉ. कोत्तुरतु ममेन ‘केएम’ चेरियन से एक साक्षात्कार में ‘दिल’ के बारे में जानने की कोशिश की।

1942 में जन्मे डॉ. चेरियन एक मशहूर हार्ट सर्जन हैं, उन्होंने अब तक 46, 000 से भी ज्यादा सर्जरी की हैं। एक किसान परिवार से आने वाले डॉ. चेरियन ने मनिपाल के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज से अपनी डिग्री की और इसके बाद वे रॉयल ऑस्ट्रेलियन्स कॉलेज ऑफ़ सर्जन्स में फ़ेलोशिप के लिए ऑस्ट्रेलिया गये।

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अपने देश के लोगों के लिए कुछ करने का जज़्बा उनमें इस कदर था कि उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिनसिनाटी और यूएस के लहे क्लिनिक से अच्छी-खासी जॉब का ऑफर ठुकरा दिया। उन्होंने यूएस और ऑस्ट्रेलिया की परमानेंट रेजीडेंसी को भी छोड़ दिया और 6 जून 1975 को भारत लौट आये।

उस समय, सिर्फ तीन शहरों में- दिल्ली, मुंबई और वैल्लोर में ओपन हार्ट सर्जरी करने की सुविधाएं थीं और वह भी पुराने जमाने की। इन शहरों में कोई वैकेंसी नहीं थी तो डॉ. चेरियन को दक्षिणी रेलवे के सबसे निचले कैडर में मात्र 1,071 रुपये प्रति माह सैलरी की जॉब लेनी पड़ी।

“भारत लौटने के सातवें दिन, मैंने रेलवे में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के 42 वर्षीय ड्राफ्ट्समैन, मिस्टर कजा मोइदीन का ऑपरेशन किया। तीन दिनों में, मुझे पता चला कि मैंने भारत में पहली सफलतापूर्वक बाईपास हार्ट सर्जरी की है,” उन्होंने द बेटर इंडिया को बताया।

उन्होंने आगे कहा, “उसी साल 26 जून को भारत में इमरजेंसी लागू हो गयी और मुझे अच्छी नौकरी मिलने के सरे रास्ते बंद हो गये क्योंकि यूपीएससी में सीधी भर्ती बंद हो गयी थी। लेकिन मैंने यहीं रहने का फैसला किया क्योंकि मुझे यह अवसर दुनिया में कहीं और नहीं सिर्फ भारत में मिल सकता था।”

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अगले 13 सालों तक उन्होंने रेलवे में अपनी सेवाएं दीं और फिर 1987 में खुद रिटायरमेंट ले ली। उन्होंने जल्दी रिटायरमेंट लेकर सुपर स्पेशियलिटी कार्डियक अस्पताल मद्रास मेडिकल मिशन शुरू किया। यह भारत में अपनी तरह का पहला अस्पताल था।

इसके बाद भारत में बहुत कुछ ऐसा हुआ जो कि पहली बार था- पहला इंटरनल मेमरी आर्टरी ग्राफ्ट, बच्चों में पहली बार दिल की बिमारियों को ठीक किया गया, ब्रेन डेड पर कानून बनने के बाद पहला हार्ट ट्रांसप्लांट, पहला पीडियाट्रिक हार्ट ट्रांसप्लांट, पहला हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट, और किसी महिला पर पहली बाईपास सर्जरी।

पुरानी यादों को ताजा करते हुए डॉ. चेरियन बताते हैं, “उस समय, तकनीक बहुत पुरानी थी और हमारे पास आधुनिक गैजेट जैसे कैथ लैब, इको मशीन, हेडलाइट या प्रोलीन जैसा आधुनिक सुचर मटेरियल नहीं था। इंटरनल मेमरी आर्टरी के लिए हमारे पास उचित कौट्री भी नहीं थी। पर आज हार्मोनिक स्केलपेल उपलब्ध है।”

September 1975, Railway Hospital, Perambur, Madras.

तब से लेकर अब तक, पिछले चार दशकों में दिल की बीमारी के केसेस भी चार गुना बढ़ गये हैं।

“अब ज़्यादातर बीमारियाँ युवा लोगों में देखने को मिलती हैं। यह ट्रेंड हमारी गलत आदतों जैसे एक्सरसाइज न करना, जंक फ़ूड और रहन-सहन के तरीकों में बदलाव की वजह से है और साथ ही, हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बिमारियों की वजह से,” उन्होंने कहा।

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जैसे कि हमारा दिल बिना थके हर पल ब्लड धड़कता है और ब्लड वेसल आर्टरी के ज़रिये शरीर के हर एक अंग तक ऑक्सीजन युक्त ब्लड पहुंचता है। समय के साथ, “बढ़ती उम्र और हाइपरटेंशन जैसे फैक्टर्स की वजह से इन आर्टरी का ठोसपन और लचीलापन बदलता है और फिर शरीर में अर्ट्रियोसक्लेरोसिस की स्थिति बन जाती है,” डॉ. चेरियन ने बताया।

अर्ट्रियोसक्लेरोसिस में पेरिफ्रल आर्टरी जैसे कि फेफड़ों, किडनी और कॉर्निया की आर्टरी प्रभावित होती हैं। दूसरी तरफ, कोलेस्ट्रोल जैसे खराब लिपिड्स इकट्ठा होने से बड़ी ब्लड वेसल जैसे एरोटा, कैरोटिडस और कोरोनरी आर्टरी में अथेरोसक्लेरोसिस होने लगता है।

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अर्ट्रियोसक्लेरोसिस और अथेरोसक्लेरोसिस की वजह से शरीर में ब्लड फ्लो बिगड़ जाता है और इस वजह से लोगों को हार्ट अटैक और स्ट्रोक आने की सम्भावनाएं बढ़ती हैं।

भारत और विदेशों में भी एक आम नाम बन चुकी, बाईपास सर्जरी की ज़रूरत अथेरोसक्लेरोसिस के मरीजों को होती है। “बाईपास सर्जरी उसी तरह है जिअसे कि आप एक सीधे रास्ते पर जा रहे हैं और लैंडस्लाइड हो जाये तो आपको रास्ता बदलना पड़ता है। ठीक वैसे ही, जब कोरोनरी आर्टरी में ब्लाक आ जाता है तो आप इसे बाईपास कर देते हैं,” उन्होंने समझाते हुए कहा।

पहले यह सर्जरी पैर से एक वेन लेकर की जाती थी, लेकिन अब चेस्टवॉल या फिर फ़ॉरआर्म से आर्टरीयल ग्राफ्ट लिया जाता है।

एक दूसरी हार्ट सर्जरी जिसके बारे में हम नियमित रूप से सुनते हैं वह है “स्टेंट लगाना।” डॉ. चेरियन कहते हैं कि यह ‘सड़क को फिर से तैयार करने’ के जैसा है। वे कहते हैं, “बाईपास सर्जरी के विपरीत, इसमें सड़कें (आर्टरी) स्टेंट लगाने के बाद समान रहती हैं, लेकिन रास्ता सही कर दिया जाता है, ताकि यातायात (ब्लड फ्लो) सामान्य रूप से जारी रह सके।”

1984 में, डॉ. चेरियन ने भारत में पहली बार बाईलेटरल इंटरनल मैमरी आर्टरी ग्राफ्ट किया था। उनके अग्रणी काम और निरंतर सेवा के लिए उन्हें 1991 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

उनके जैसे सक्षम डॉक्टरों की बदौलत ही लाखों दिल धड़कते रहते हैं। पर सबसे अच्छा यही है कि दिल की बिमारियों को होने से रोका जाये। “फाइबर से भरपूर और कम कोलेस्ट्रोल, कम नमक और कम सुगर वाला खाना एक स्वस्थ दिल का सीक्रेट है। एक स्वस्थ दिल के लिए हेल्दी खाना, फल, सब्ज़ियाँ और रेग्युलर एक्सरसाइज ज़रूरी है। साथ ही, हमें स्मोकिंग, अल्कोहल और स्ट्रेस से दूर रहना चाहिए,” उन्होंने अंत में कहा।

मूल लेख: प्रियंवदा चूग़

Summary: Born in 1942, K M Cherian became a pioneering heart surgeon performing more than 46,000 surgeries till date. Coming from a family of farmers, he graduated from Kasturba Medical College, Manipal and started Madras Medical Mission in 1987, the first super specialty cardiac hospital of its kind. In a one-on-one interview, Dr Kotturathu Mammen “KM” Cherian, discusses everything about the heart.


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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