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सीसी टीवी के ज़माने में यहाँ चलती हैं ऐसी दुकानें जहाँ दुकानदार नहीं बैठते!

सीसी टीवी के ज़माने में यहाँ चलती हैं ऐसी दुकानें जहाँ दुकानदार नहीं बैठते!

कहते है कि वास्तविक सुंदरता अंदरूनी होती है। और इस कहावत को मिजोरम वासियों ने बिलकुल सही साबित कर दिखाया है। अपनी प्राकृतिक ख़ूबसूरती के लिए मशहूर मिजोरम, शायद इसलिए भी आकर्षक हैं क्यूंकि यहाँ के लोग, जिन्हें ‘मिज़ो’ नाम से जाना जाता है, नम्र होने के साथ ही इमानदारी के भी पर्याय माने जाते हैं ।

इसके कई उदाहरणों में से एक है मिजोरम में पायी जाने वाली दुकानें, जो ‘ नघा लोउ दावर’ के नाम से जानी जाती हैं। राजधानी, ऐजवल से 65 किमी की दूरी पर हाईवे पर, महज़ विश्वास पर चल रही यह दुकानें अपने आप में ख़ास हैं।

 Mizoram Shops without Shopkeepers Are The Best Example Of Honesty

Photo Source

यह दुकानें ज़्यादातर छोटे किसानो द्वारा लगायी जाती हैं, जो हर सुबह बांस से बंधे हुए ताख पर फल सब्जियां आदि रख तथा उसके बगल में चाक या कोयले से दाम लिख कर झूम खेती (जगह जगह किये गए छोटी छोटी खेती) के लिए निकल पड़ते हैं। इसी बीच वहां से गुजरने वाले लोग अपनी ज़रूरत के हिसाब से इन दुकानों पर सही दाम रख कर, सामान ले जाते हैं।

फल, सब्जियों, फलों के रस, छोटी मछलियों, आदि से सुसज्जित इन दुकानों पर दुकानदार नहीं बैठते।

 Mizoram Shops without Shopkeepers Are The Best Example Of Honesty

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करीने से सजी इन सामग्रियों के बगल में एक तख्ते पर इनका मूल्य लिखा होता है। इन्हें खरीदने वाले ग्राहक अपनी ज़रूरत का सामान उठा कर यही पर पड़े कटोरे, जिन्हें ‘पविसा बावन’ या ‘पविसा दहना’ कहा जाता है, उनमे डाल देते हैं। यहीं पर, दुकानदार द्वारा छुट्टे पैसो का भी एक बक्सा रखा होता है जहाँ से ग्राहक बाकि पैसे खुद ही उठा सकते है।

इन दुकानों को चलाने वाले किसान अधिकतर गरीब तबके के होते है जिन्हें अपना घर चलाने के लिए पुरे साल झूम खेती भी करनी पड़ती है। ऐसे में न तो वे खुद इन दुकानों पर बैठ सकते है और न ही किसीको वहां बैठने के लिए रखने में समर्थ होते है। इसी कठिनाई का सरल उपाय बना है ‘नघा लोउ दावर’।

इसे चलाने वाले दुकानदार अभी तक इससे खुश हैं और मानते हैं कि उनके ग्राहकों ने आज तक उन्हें निराश नहीं किया।

सी सी टीवी के युग में, मिजोरम में मिसाल पेश करती यह दुकानें खुद में एक प्रेरणा है। एक ऐसी प्रेरणा जो हमें सिखाती हैं कि विश्वास और इमानदारी एक दुसरे की पूरक है। एक के बिना दुसरे का होना असंभव है और जहाँ ये दोनों साथ है वहां एक बेहतर समाज की तरफ कदम बढ़ाना और भी आसान है।

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निधि निहार दत्ता

निधि निहार दत्ता राँची के एक कोचिंग सेंटर, 'स्टडी लाइन' की संचालिका रह चुकी है. हिन्दी साहित्य मे उनकी ख़ास रूचि रही है. एक बेहतरीन लेखिका होने के साथ साथ वे एक कुशल गृहिणी भी है तथा पाक कला मे भी परिपक्व है.
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