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पंजाब की ‘फुलकारी’ को सहेज रही है यह बेटी, दिया 200 महिलाओं को रोज़गार!

एक फुलकारी दुपट्टा तैयार करने के लिए 15 से 20 दिन लग जाते हैं क्योंकि सारा काम हाथ की कढ़ाई का है!

श्मीर की पश्मीना शॉल से लेकर गुजरात के गोटे के काम तक और राजस्थान के बंधेज से लेकर बनारस के रेशम के काम तक, भारत की हस्तशिल्प कलाओं का कहीं कोई मुक़ाबला नहीं। हर एक कला अपने आप में उतनी ही विविध और समृद्ध है जितना कि हमारा इतिहास। बेशक, हाथ के हुनर की ये कलाएं हमारी संस्कृति की गरिमा, शैली और ख़ूबसूरती का प्रतीक हैं।

लेकिन वक़्त के साथ कहीं न कहीं इन हस्तकलाओं की छवि धूमिल होती जा रही है। हाथ के काम की इस विरासत को हम आधुनिकीकरण के साथ कहीं पीछे छोड़ रहे हैं और यह चिंता का विषय है। क्योंकि अगर ऐसा होता रहा तो शायद हमारी आने वाली पीढ़ियां कभी इनके बारे में नहीं जान पाएंगी।

इसलिए देश के कई सजग नागरिकों ने वक़्त रहते अपने स्तर पर इन हस्तकलाओं को सहेजने का ज़िम्मा उठाया है। पश्मीना को सहेजते जुनैद शाहदार, हिमरू और मशरु फैब्रिक को फिर पहचान दिलाते फैसल क़ुरैशी, या फिर बंधेज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने वाले मोहम्मद तैय्यब खां की कहानियां आपको द बेटर इंडिया पर पढ़ने को मिल जाएंगी।

आज इसी कड़ी में हम आपको रू-ब-रू कराने जा रहे हैं पंजाब के तरनतारन जिले के एक छोटे से कसबे पट्टी की रहने वाली मनप्रीत कौर से। 28 वर्षीय मनप्रीत, पंजाब की धरोहर ‘फुलकारी’ को उसकी सही पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। साथ ही, इस कला को पंजाब की महिलाओं के लिए रोज़गार का ज़रिया बना रही हैं।

Phulkari- the traditional art of Punjab

‘फुलकारी’- ‘फूल’ + ‘कारी’ मतलब फूलों की कढ़ाई, एक खास तरह की कढ़ाई होती है जो दुपट्टों या फिर किसी भी कपड़े पर हाथों से की जाती है। फुलकारी काढ़ने के अलग-अलग तरीके होते हैं जैसे कि फुलकारी बाग, इसमें कढ़ाई इस तरह की जाती है कि कपड़ा बिल्कुल भी नज़र नहीं आता, तो वहीं ‘आधा बाग’ फुलकारी में कढ़ाई थोड़ी खुली-खुली होती है।

कैसे हुई शुरुआत

एक आम मध्यम वर्गीय परिवार से आनेवाले मनप्रीत ने साल 2014 में इकॉनोमिक्स विषय में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। वैसे तो आगे वे एमबीए करना चाहती थीं, लेकिन घर की आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें यह कर पाने की इजाज़त नहीं दी। उनके पिता टैक्टर के स्पेयर पार्ट्स बेचने का काम करते थे, जिससे घर का गुज़ारा जैसे-तैसे हो पाता था। उनकी माँ गृहिणी हैं और उनके साथ-साथ तीन बहन-भाइयों की ज़िम्मेदारी भी है।

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ऐसे में, उस समय उनके दिमाग में सिर्फ यही था कि कोई भी काम करके अपने घर को चलाने में मदद करनी है। द बेटर इंडिया से बात करते हुए मनप्रीत ने बताया,

“नौकरी का कोई अच्छा विकल्प नहीं था तो मैंने सोचा कि क्यों न अपना ही कुछ शुरू करूँ। फिर एक दिन ऐसे ही, घर के एक पुराने बक्से में मुझे बहुत पुराना फुलकारी का दुपट्टा मिला, जो मेरी दादी का था। मेरी माँ और दादी के जमाने में औरतें घरों में ही फुलकारी बना लिया करती थीं। पर पिछले कुछ सालों में फुलकारी का कल्चर कम होता जा रहा है।”

Manpreet Kaur

मनप्रीत के दिमाग में एक छोटा-सा विचार आया कि अगर वो फुलकारी के दुपट्टे, सूट बनाकर बेचे तो? लेकिन जब उन्होंने अपना यह आईडिया अपनी सहेलियों को बताया तो उनकी प्रतिक्रिया बहुत ही निराश करने वाली थी। उनके दोस्तों ने उन्हें कहा कि अब फुलकारी कौन पहनता है और ये तो देहात की चीज़ है, इसे कौन पसंद करेगा।

उनके दोस्तों की बातों ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि आखिर फुलकारी दुपट्टे पहनना या फिर सूट पहनना कब से पिछड़ापन हो गया। बल्कि यह पंजाबी संस्कृति का एक हिस्सा है, प्रतीक है।

“बस उसी वक़्त मैंने ठान लिया कि कम से कम एक बार तो मुझे इस काम को ट्राय करना है। घर के हालातों को सुधारने के साथ-साथ फुलकारी को भी एक पहचान देने का उद्देश्य था मेरा। मैंने अपने आस-पास की ही तीन-चार महिलाओं से बात की और उनसे सबसे पहले पांच दुपट्टे बनवाएं।”

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मनप्रीत ने अपने इन प्रोडक्ट्स को अपनी माँ के नाम पर ब्रांड नाम दिया- ‘परवीन फुलकारी हाउस’। उनके पास कोई स्टोर नहीं था, जहां वह अपने दुपट्टे बेचतीं। इसके अलावा, अपने ही जिले में फुलकारी बेचना थोड़ा मुश्किल भी था, क्योंकि नए-नए ट्रेंड के कपड़ों के शौक़ीन लोगों को कहाँ फुलकारी भाती। ऐसे में, उन्होंने इंटरनेट पर खोज-बीन की और उन्हें पता चला कि एक सरकारी संस्था फुलकारी खरीदती है। मनप्रीत को यहाँ एक उम्मीद की किरण दिखी और उन्होंने इस संस्था को अपने प्रोडक्ट्स देना शुरू किया।

Phulkari Products

सोशल मीडिया बना सहारा

संस्था तो मिल गयी थी पर अभी भी चुनितियाँ अब भी काम नहीं थीं। यह संस्था उन्हें पैसे तभी देती थी जब उनके प्रोडक्ट्स बिक जाते थे। इस तरह, उन्हें उनके काम के पैसे दो-तीन महीने बाद मिलते। साल भर तक इसी तरह चलता रहा। मनप्रीत बताती हैं कि समय पर पैसे न मिलने की वजह से कारीगर महिलाओं के पैसे भी अटक जाते थे।

मनप्रीत को समझ में आ गया था कि उन्हें प्राइवेट विकल्प भी देखने होंगे। इसलिए उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना पेज बनाया और फिर पंजाब के ही कुछ मशहूर लोगों से अनुरोध किया कि वो उनके इस काम के बारे में अगर एक-दो जगह बता दें या फिर पोस्ट कर दें। क्योंकि इन लोगों की पहुँच कनाडा, अमेरिका जैसे देशों में भी थी।

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Promotion

साल 2015 के दिसम्बर में मनप्रीत को अपना सबसे पहला बड़ा ऑर्डर मिला।

“एक एनआरआई थे, वह अपनी बेटी की शादी के लिए इंडिया आये थे। उन्होंने हमें 40 फुलकारी बनाने का ऑर्डर दिया। टाइम तो कम था लेकिन वही एक मौका था खुद को साबित करने का। हमने उन्हें एक महीने के भीतर उनका काम करके दिया,” मनप्रीत ने बताया।

इस ऑर्डर के बाद, मनप्रीत और उनकी टीम का हौसला काफी बढ़ गया। मनप्रीत ने अपने आस-पास के गांवों में भी जा-जाकर महिलाओं को अपने साथ जोड़ना शुरू कर दिया। आज उनका ‘परवीन फुलकारी हाउस’, एक सेल्फ हेल्प ग्रुप है, जिसे मनप्रीत हेड करती हैं। इस ग्रुप से फुलकारी की 200 महिला कारीगर जुड़ी हुई हैं।

Her Team of Artisans

मनप्रीत बताती हैं कि एक फुलकारी का दुपट्टा तैयार करने के लिए 15 से 20 दिन लग जाते हैं क्योंकि सारा काम हाथ की कढ़ाई का है। और अगर ऑर्डर ‘बाग फुलकारी’ का हो तो अक्सर 25 दिन तक लग जाते हैं एक दुपट्टा पूरा करने में। दुपट्टे पर काम के हिसाब से कारीगर को पैसे दिए जाते हैं। इस तरह उनकी हर एक कारीगर महीने में लगभग 3000 रुपये तक कमा लेती हैं।

“वैसे गाँव की महिलाओं को भी जोड़ना आसान नहीं रहा क्योंकि ज्यादातर को तो शुरू में लगा था कि हम उन्हें पैसे कहाँ से देंगे क्योंकि फुलकारी की कोई मांग नहीं है। दूसरा, गाँव की औरतें थी तो घरों से निकलकर काम करने की इजाज़त मिलना भी बहुत बड़ी बात थी। ऐसे में, हमने उन्हें समझाया कि उन्हें उनके काम के पैसे बिल्कुल वक़्त पर मिलेंगे और साथ ही, हम उन्हें घर पर सारा सामान देकर आते हैं और फिर काम पूरा होने के बाद उनसे प्रोडक्ट लेकर भी हम ही आते हैं।”

तरनतारन जिला नशे के मामले में भी काफी बदनाम है। यहाँ पर ज़्यादातर घरों से कोई न कोई नशे की लत का शिकार है और खासकर गांवों में तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे में, सबसे ज्यादा मुश्किलें एक औरत को झेलनी पड़ती हैं। मनप्रीत की कोशिश है कि इस कला के ज़रिये वह कम से कम इन महिलाओं को उनके पैरों पर खड़ा कर पायें।

परवीन फुलकारी हाउस के साथ काम करने वाली एक कारीगर गुरप्रीत बताती हैं, “मैं पिछले एक साल से यहाँ काम कर रही हूँ। पहले तो मैं सिर्फ हाउसवाइफ थी और मेरे पति भी मिस्त्री हैं। तो अपने लिए और बच्चों के लिए, हर तरह से पति की कमाई पर ही निर्भर थे। लेकिन अब महीने के मैं भी तीन-साढ़े तीन हज़ार कमा लेती हूँ तो कम से कम अपनी जो भी ख्वाहिशें होती हैं उसके लिए मुझे उनसे पैसे मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ती।”

तो वहीं एक और महिला कारीगर, हरप्रीत जो पिछले दो-ढाई साल से यहाँ काम कर रही हैं, कहती हैं, “यहाँ से जो भी पैसे मिलते हैं उससे मैं अपने बच्चों की फीस भर पा रही हूँ। मेरे पति का काम भी थोड़ा मंदा ही चलता है और चार बच्चों का खर्च है तो महीने के ये 3-4 हज़ार रुपये भी काफी मददगार हो जाते हैं। और फिर घर पर ही रहकर काम करना है तो बच्चों की देख-रेख में भी कोई कमी नही आती।”

Some trendy products

दुपट्टों के अलावा, ‘परवीन फुलकारी हाउस’ में आपको फुलकारी सूट, स्टोल, बैग, शर्ट, कुर्ता आदि भी मिल जायेंगे। इसके अलावा, इन प्रोडक्ट्स को फाइनल टच देने के बाद जो कुछ भी थोड़ा-बहुत कपड़ा बच जाता है, उसे वे पोटली, पीढी, छाज, जुती आदि में लगाकर, उन्हें भी फुलकारी का टच दे देती हैं।

“अपनी विरासत को सहेजना तो मेरा मोटिव था ही, लेकिन फिर मार्केटिंग के लिए हमने यह भी ध्यान रखा कि लोग क्या चाहते हैं। उन्हें कैसा प्रोडक्ट चाहिए? इसलिए जब हमने स्कूल-कॉलेज में जाना शुरू किया, कुछ प्रदर्शनियों में गये, वहां पूछा कि किस तरह के प्रोडक्ट उन्हें चाहिए तो हमने अपनी फुलकारी को मॉडर्न ट्रेंड में ढाला। जैसे पूरे दुपट्टे के साथ हम कॉलेज की लडकियों की पसंद की स्टोल भी तैयार करते हैं। सूट के साथ आपको कुर्ते भी हमारे पास मिल जायेंगे,” उन्होंने आगे कहा।

आज पाँच साल बाद, मनप्रीत धीरे-धीरे ही सही लेकिन एक प्रभावी पहचान बनाने में सफल रही हैं। अब उन्हें हर महीने लगभग 20 से 30 ऑर्डर मिल जाते हैं और ज़्यादातर ऑर्डर उन्हें दिल्ली, हरियाणा, जैसे राज्यों के अलावा कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, लंदन जैसे देशों से मिलते हैं। इन सब से उनका सालाना प्रॉफिट लगभग 5 लाख रुपये का है।

She has got Awards for her work

आने वाले वक़्त में मनप्रीत चाहती हैं कि हमारे अपने देश में भी इस हस्तकला को वैसा ही मान-सम्मान मिले, जैसा बाहर के देशों में मिलता है। अंत में वह सिर्फ यही कहती हैं,

“अगर सरकार चाहे तो इस हुनर को पंजाब की हर एक महिला की पहचान बना सकती है। यदि वे खुद इस कला को सही बढ़ावा और सही मौके दें तो हमारे यहाँ गांवों में रहने वाली महिलाओं को घर बैठे रोज़गार मिल सकता है।”

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यदि आप मनप्रीत कौर से सम्पर्क करना चाहते हैं या फिर उनके प्रोडक्ट्स खरीदना चाहते हैं तो 8054621977 पर कॉल कर सकते हैं। आप उन्हें parveenphulkarihouse@gmail.com पर मेल भी कर सकते हैं। उनके प्रोडक्ट्स देखने के लिए आप उनका सोशल मीडिया पेज देख सकते हैं!

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: Graduate in economics, Manpreet Kaur from Tarn Taran district in Punjab, manufactures Phulkaris. After completing her studies, Manpreet wanted to help her family due to financial constraints at home. She started with 5 phulkari dupattas and now she is successfully running Parveen Phulkari House and giving employment to 200 women artisans. Also, she is promoting this traditional handicraft of the state, which is an integral part of Punjabi Culture.


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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