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‘हर बूंद ज़रूरी है,’ सीखिए कैसे घरेलु स्तर पर बचा सकते हैं पानी!

लगभग 60 करोड़ भारतीय आज पानी न होने की समस्या से ग्रस्त हैं, 75% घरों में पीने के लिए पानी नहीं है और 84% ग्रामीण घरों में आज भी वॉटर पाइपलाइन नहीं है!

साल 2018 में नीति आयोग द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट, ‘द कम्पोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स‘ (CWMI) के मुताबिक, वर्तमान में भारत इतिहास के सबसे बड़े जल-संकट से जूझ रहा है। लगभग 60 करोड़ भारतीय आज पानी न होने की समस्या से ग्रस्त हैं, 75% घरों में पीने के लिए पानी नहीं है और 84% ग्रामीण घरों में आज भी वॉटर पाइपलाइन नहीं है।

लेकिन हम में से कितने लोगों को इन आंकड़ों के बारे में पता है। छोटे शहरों या फिर गांवों में रहने वाली कितनी ही गृहिणियां हर रोज़ घर को धोने के लिए बाल्टियों से पानी बर्बाद करने से पहले इस तरह की रिपोर्ट्स पढ़ती हैं? या फिर गाड़ी धोने के लिए आधे-एक घंटे तक पानी बहाने वालों में से कितने लोग यह चेक करते हैं कि उनके शहर का वाटर इंडेक्स क्या है?

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हमारे देश की यही विडम्बना है कि जिस जनता के हाथों में बदलाव की ताकत है, उन्हीं तक यह सच्चाई नहीं पहुँचती है। उन्हें आज भी यह लगता है कि उनके यहाँ तो पानी आ रहा है ना तो दूसरी जगह से उन्हें क्या लेना-देना? पर अब वक़्त है कि हर एक आदमी, चाहे छोटा हो या बड़ा, पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन को बचाने के लिए कदम उठाये।

‘वरना जानते तो सब हैं कि तीसरा विश्व-युद्ध पानी के लिए होगा, लेकिन क्या हम उस युद्ध का इंतज़ार कर रहे हैं?’

नहीं, बिल्कुल भी नही। क्योंकि देश के कुछ नेक और सच्चे नागरिक हैं, जिन्होंने इस स्थिति को बदलने की ठानी है। ये जल-संरक्षक न सिर्फ खुद पानी बचा रहे हैं, बल्कि अपने शहरों के हर एक गली-मोहल्ले में घर-घर जाकर, लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं!

1. प्रोजेक्ट पानी:

उत्तराखंड के देहरादून में ग्राफ़िक एरा हिल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, हरीश कुमार ने इसी साल जून में इस पहल की शुरुआत की। ‘प्रोजेक्ट पानी’ अभी तक कोई संगठन नहीं है बल्कि यह एक अभियान है, जिसके ज़रिये हरीश, उनके कुछ छात्र, साथी शिक्षक और अन्य कुछ नेक लोग, शहर के लोगों को जल-संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

Harish talking to the people on saving water

द बेटर इंडिया से बात करते हुए हरीश बताते हैं, “सबसे पहले हम लोगों को पानी से संबंधित गंभीर आंकड़ों के बारे में बताते हैं। फिर उन्हें समझाया जाता है कि कैसे बिना समझे, वे लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पानी बर्बाद कर रहे हैं।इसके बाद, लोगों को कुछ तरीके बताये जाते हैं, जिन पर अमल करके वे कहीं न कहीं अपने पर्यावरण और प्रकृति के प्रति अपना योगदान दे सकते हैं।”

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‘जल है तो कल है’ के स्लोगन में विश्वास रखने वाली प्रोजेक्ट पानी की टीम इस काम को कोई समाज सेवा नहीं मानती। बल्कि उनका कहना है कि यह हर एक नागरिक का कर्तव्य है। हफ्ते में अपना एक दिन वे इस कर्तव्य को निभाने के लिए समर्पित करते हैं। ‘प्रोजेक्ट पानी’ की टीम हर रविवार, सुबह 9:30 बजे से दोपहर के 2 बजे तक अपने अभियान के लिए काम करती है।

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“सबसे पहले हम शहर के किस हिस्से में ड्राइव करना है, उसका चयन करते हैं। इसके बाद, उस इलाके में कितने घर होंगे, इस आधार पर अपनी टीम को अलग-अलग ग्रुप्स में बाँट देते हैं। फिर सभी ग्रुप्स अपने-अपने हिस्से में आये घरों में जाकर, लोगों से बात करते हैं, उन्हें समझाते हैं और उन्हें पानी बचाने के लिए प्रेरित करते हैं।”

Save Water, Save Lives

टीम लोगों को पानी बचाने के कुछ छोटे-छोटे तरीके बताती है जैसे,

  • हर किसी के घर में आरओ लगा हुआ है आजकल, जिसमें से बहुत ज्यादा हार्ड वाटर निकलता है। यह हार्ड वाटर ज़्यादातर घरों में बर्बाद ही होता है क्योंकि हम इसे अपने खाने-पीने में इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन घर के और बहुत से काम हैं, जहां इस पानी का इस्तेमाल हो सकता है जैसे कि साफ़-सफाई में, शौचालयों में, बागवानी में आदि।
  • कार, स्कूटी या फिर बाइक को पानी से घंटो तक धोने की बजाय ड्राई वॉश कराया जाये।

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  • घर के आँगन को या फिर घर की दहलीज को रोज पानी से धोने की बजाय, पौंछा आदि लगाकर साफ किया जाये।
  • बगीचे में पेड़-पौधों को पानी देने के लिए पाइप की जगह बाल्टी और मग से पानी दें, इससे ज़रूरत के हिसाब से ही पानी जाता है और बर्बाद नहीं होता।
  • बर्तन आदि साफ़ करने के लिए काफी समय तक नल चलाए रखने की बजाय, किसी बाल्टी में सीमित पानी लेकर बर्तनों को धोएं।
  • कपड़े धोने के बाद, बचे हुए पानी को नाली में बहाने की बजाय, आप इसे घर की साफ-सफाई या फिर बगीचे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

हरीश कहते हैं कि उनकी इन ड्राइव्स के चलते कम से कम लोगों को यह समझ में आने लगा है कि देश पानी की समस्या से जूझ रहा है। चेन्नई में पानी लगभग खत्म हो चूका है और उत्तर भारत के भी कई शहरों के यही हालात हैं। ऐसे में, अगर अब भी हम इसी तरह पानी बर्बाद करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब पूरे भारत में पानी नहीं बचेगा। इसलिए, छोटा ही सही, लेकिन उचित कदम उठाएं और पानी बचाएं।

प्रोजेक्ट पानी की टीम से संपर्क करने के लिए उनका फेसबुक पेज देख सकते हैं!

2. फिक्स फॉर लाइफ

बहुत बार हम अपने घर में लीक होते नल को भी महीनों तक ठीक नहीं कराते। फिर ऐसे में, अपने गाँव-शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों को तो भूल ही जाइये। पर हमारी इस एक लापरवाही से न जाने कितना लीटर पानी हर रोज़ बर्बाद होता है।

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पर इस संदर्भ में कोलकाता के दो युवकों की पहल, ‘फिक्स फॉर लाइफ‘ काबिल-ए-तारीफ़ है। बिजनेस डवलपमेंट कंसलटेंट के तौर पर काम करने वाले 28 वर्षीय अजय मित्तल और उनके एक और साथी, 36 वर्षीय विनय जाजू ने पिछले तीन महीनों में कोलकाता के 350 से ज्यादा लीक करते नलों को ठीक करवाया है।

अपनी इस पहल के बारे में द बेटर इंडिया से बात करते हुए अजय ने बताया,

“घरों के नल तो लोग खुद ही ठीक करवा सकते हैं, पर गली-मोहल्लों, सड़कों और खासकर छोटी-छोटी बस्तियों में जो नल होते हैं, उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं देता। इसलिए सबसे पहले हम एरिया में पता लगा लेते हैं कि वहां कितने नलों को रिपेयरिंग की ज़रुरत है और फिर वीकेंड पर अपने साथ एक प्लम्बर को लेकर वहां पहुँच जाते हैं। इस तरह से हमने कोलकाता के एक हिस्से को कवर कर लिया है और अभी भी हमारी यह पहल जारी है।”

अजय और विनय के इस काम में आम नागरिक भी उनसे जुड़ रहे हैं। अजय बताते हैं कि पहले उन्हें खुद जाकर लीक हो रहे नलों का पता लगाना पड़ता था, पर अब खुद लोग उन्हें फ़ोन करके बताते हैं कि इस कॉलोनी या बस्ती में नलों को मरम्मत की ज़रुरत है।

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उनकी इस पहल के चलते नगर निगम द्वारा सप्लाई किये जा रहे लगभग 30% पानी को वे लोग बचा रहे हैं, जो कि पहले इन लीक नलों से यूँ ही बह जाता था। अजय और विनय के इस अभियान के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें!

3. 250 रुपये का देशी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

अक्सर हम सुनते हैं कि हमारा देश जुगाड़ पर चलता है। समस्या कोई भी हो, जवाब होता है कि ‘चलो करते हैं कोई जुगाड़’!

ऐसा ही एक छोटा-सा जुगाड़ हमारे जल-संरक्षण में काफी कारगर साबित हो सकता है। जी हाँ, यह जुगाड़ किया है चेन्नई के रहने वाले 45 वर्षीय दयानंद कृष्णन ने। अपने इस जुगाड़ से उन्होंने सिर्फ़ 10 मिनट में लगभग 200 लीटर बारिश का पानी इकट्ठा किया। उनके इस DIY इनोवेशन की लागत मात्र 250 रुपये है।

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चेन्नई पानी की कमी से जूझ रहा है, यह सबको पता है। पर फिर भी लोग बारिश के मौसम में पानी संरक्षित करने के बारे में नहीं सोचते हैं। और जो करना चाहते हैं, वह अक्सर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर होने वाले खर्चे से डरते हैं। लेकिन कृष्णन बताते हैं कि उनके रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगाने के लिए किसी प्लम्बर या एक्सपर्ट की ज़रूरत नहीं है। यह आप अपने घर पर खुद ही बना सकते हैं।

Dayanand Krishnan

इस सिस्टम को बनाने के लिए आपको चाहिए- एक ड्रम, जो अक्सर घरों में पहले से ही मौजूद होता है, तीन फीट का पीवीसी पाइप, दो पाइप बेंड्स, और फ़िल्टर के लिए एक सूती का कपड़ा।

हर एक घर की छत पर या बालकनी में पानी की निकासी के लिए एक पाइप होता है, जिससे की पानी बाहर जा सके। कृष्णन ने बस इसी निकासी वाले पाइप से पाइप बेंड्स की मदद से दूसरे पाइप के एक सिरे को जोड़ दिया और दूसरे सिरे को कपड़े के फ़िल्टर से ढके हुए ड्रम में। ताकि पानी बाहर जाने की बजाय उस ड्रम में इकट्ठा हो जाये। इसके अलावा, ड्रम पर कपड़े का फ़िल्टर लगाने का उद्देश्य था छत से पानी के साथ आने वाली धूल-मिट्टी को छानना।

बारिश के मौसम में, उन्होंने इस तरीके से सिर्फ़ 10 मिनट में 225 लीटर पानी इकट्ठा किया था, जिसे आराम से 2-3 दिन तक दैनिक कामों के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता था। इस सिस्टम को कहीं भी, किसी भी घर में फॉलो किया जा सकता है। आप अधिक जानकारी के लिए यहाँ पर क्लिक करें!

4. टीम लाइववायर

कभी-कभी बड़ी से बड़ी समस्या का हल बहुत छोटी-सी चीज़ में भी छिपा हो सकता है और इस बात को साबित कर रही है, मुंबई की टीम लाइववायर। इस ग्रुप में मुंबई के विभिन्न स्कूलों से छठी से लेकर दसवीं कक्षा तक के बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों ने ‘बूंद-बूंद से सागर भरने’ की कहावत को सच कर दिखाने की ठानी है।

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दरअसल, हम कभी ध्यान ही नहीं देते कि हम शौचालयों में फ्लश के लिए व्यक्तिगत तौर पर 5 से 6 लीटर पानी का इस्तेमाल कर लेते हैं, जबकि हमारा काम मात्र आधा लीटर पानी में भी हो सकता है। इस समस्या के हल के लिए, इन बच्चों ने भी एक जुगाड़ लगाया है।

The simple solution by Team Livewire

ध्रुव अय्यर, रोहन शेनॉय, सिदक अरोरा, चैतन्य राघवन, शोम्मिक केलकर, और ध्रुव जैन ने मिलकर ‘टीम लाइववायर’ ग्रुप बनाया और समाधान दिया कि हर एक फैमिली अपने फ्लश टैंक में दो 500 मिली की बोतलें फिट कर ले। इससे टैंक पूरा नहीं भरेगा और अगली बार उचित उचित मात्रा में ही पानी इस्तेमाल होगा। उनके इस साधारण से हल से हम शौचालयों में इस्तेमाल होने वाले पानी की खपत आधा कर सकते हैं।

पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें!

5. 50 रुपये के डिवाइस से बचाइए 80% तक पानी

जब भी आप कोई बर्तन जैसे प्लेट आदि धोने के लिए नल चलाते हैं तो काफ़ी मात्रा में पानी यूँ ही बह जाता है। पर अगर आप नल बंद किये बिना ही, पानी के फ्लो को कंट्रोल कर पाएं तो?

वॉटर सेविंग/पानी बचाने वाले अडैप्टर से आप पानी का फ्लो कंट्रोल कर सकते हैं। यह डिवाइस बहुत ही आसानी से आपके नल के ऊपर फिट हो जाता है, और इसकी मदद से आप लगभग 80% तक पानी बचा सकते हैं, जो वरना यूँ ही बर्बाद हो जाता है। इसके बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करें!

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संपादन – मानबी कटोच 

Summary: Sometimes, the solution to a complex problem lies in simplicity. Take, for example, the question of saving water on a household level. You might think that you are insignificant when it comes to water conservation, but have you ever wondered how each drop you save is the thread that will tightly weave the cloth of water conservation? ‘Project Paani’ team, Fix for Life team, Team Livewire and some other water warriors like Dayanand Krishnan are an example of this.


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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