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‘मदर टेरेसा मेरी प्रेरणा हैं,’ 200 गरीबों को हर रोज़ खाना खिला रहा है यह फल बेचने वाला!

वे केले के पत्तों पर खाना परोसते हैं और सुनिश्चत करते हैं कि खाना बर्बाद न हो!

केरल में त्रिशुर जिले के वादूकरा में सालों से बंद पड़े एक बस शेल्टर पर हर दिन दोपहर में दो बजे तक गरीब, बेघर और बेसहारा लोगों को खाना खिलाया जाता है। इस नेक काम की शुरुआत एक फल विक्रेता जैसन पॉल ने की और आज उनकी इस मुहिम में बहुत से लोग जुड़े हुए हैं।

पॉल की पत्नी, बीनू मारिया, श्रीजीत- एक ऑटो ड्राईवर, शाइन जेम्स- एक एक्स-बस ड्राईवर, वी. ए. स्माइल- एक वर्कशॉप वर्कर, और इनके अलावा एक गृहिणी और एक टीचर भी उनकी टीम में शामिल हैं। पिछले दो सालों से वे यह कार्य कर रहे हैं।

37 वर्षीय जैसन पॉल कहते हैं, “मुझे मदर टेरेसा के कामों से प्रेरणा मिली है।” हर दिन 175 से लेकर 200 लोग बस स्टैंड पर खाना खाने आते हैं। सबसे पहले टीम के सभी सदस्य पॉल के यहाँ जाकर खाना बनाते हैं और फिर बस स्टैंड पहुँचते हैं।

टीम का मुख्य उद्देश्य है कि इन ज़रूरतमंद लोगों को स्वच्छ और स्वस्थ खाना मिले। सोमवार से लेकर शनिवार तक, हफ्ते के छह दिन उनकी यह मुहिम चलती है।

कैसे हुई शुरुआत?

“जनवरी 2018 में मैंने एक सामाजिक संगठन ‘मदर जनसेवा चैरिटेबल ट्रस्ट’ की शुरुआत की। तब तक हम अलग-अलग सामाजिक गतिविधियों से जुड़े हुए थे लेकिन किसी संगठन का हिस्सा नहीं थे। फिर हम कुछ दोस्तों ने विचार-विमर्श किया कि ज़रूरतमंद लोगों के लिए क्या किया जा सकता है,” पॉल ने बताया।

पॉल एक फल विक्रेता हैं, लेकिन फिर भी वे हर महीने अपने ट्रस्ट के लिए पैसे बचाते हैं। उनकी यह पहल उदाहरण है कि अगर आप सच में कुछ बदलाव लाना चाहते हैं, तो आपको रास्ता मिल ही जायेगा।

“हमने पुराने कपड़े इकट्ठा करने और फिर बांटने से शुरूआत की, रक्तदान शिविरों का आयोजन करना, ब्लड डोनेट करना, पढ़ाई में अच्छे और काबिल छात्रों की आर्थिक मदद करना आदि, सब काम किए,” उन्होंने आगे कहा।

लोगों को घर का बना खाना खिलाने का आईडिया भी एक ग्रुप डिस्कशन के दौरान ही आया और उन्होंने सबसे पहले चावल का दलिया बनाकर लोगों में बाँटना शुरू किया।

फिर जैसे-जैसे खाना खाने आने वाले लोगों की तादाद बढ़ने लगी, उन्होंने अपने काम को भी बढ़ाया। पॉल बताते हैं कि अब उनके पास वेज और नॉन-वेज दोनों तरह के खाने के विकल्प हैं। खाने में वह चावल, सांभर, एक फिश करी, सब्ज़ियाँ, अचार और सलाद देते हैं। हर महीने उनके वेजीटेरियन मील की लागत 5, 000 रुपये और नॉन-वेजीटेरियन मील की 6, 000 रुपये आती है।

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बढ़ने लगा कारवां: 

उनके संगठन को बाहर से भी मदद मिलती है। लेकिन किसी महीने थोड़ा ज़्यादा तो कभी कम। बहुत से दान करने वाले लोग पूरे दिन की एक मील को, चाहे वेज हो या नॉन वेज, स्पोंसर कर देते हैं। उनका ट्रस्ट पैसे के अलावा अन्य तरह की मदद जैसे चावल, दाल, सब्ज़ियाँ आदि भी लेता है।

“बहुत से लोग हैं जो कोई बदलाव लाना चाहते हैं, लेकिन रोज़मर्रा के कामों की वजह से उन्हें वक़्त नहीं मिल पाता । उन सबके लिए हम एक मीडियम की तरह काम करते हैं,” पॉल ने कहा।

टीम ने बस शेल्टर पर दो मेज और छह कुर्सियों का भी बंदोबस्त किया है।

यह काम तो अपने आप में नेक है ही, लेकिन इस काम की पूरी प्रक्रिया भी आपका दिल जीत लेगी – खाना परोसने के बाद भी, टीम इस बात को सुनिश्चित करती है कि खाना बिल्कुल भी बर्बाद न हो। केले के पत्तों पर खाना परोसा जाता है। बाद में, टीम यह सब इकट्ठा करती है और पॉल के घर के पास एक कचरे के गड्ढे में डाल देती है।

वह आगे बताते हैं कि उन्होंने शादी जैसे आयोजन और होटलों से भी बचा हुआ खाना इकट्ठा करना शुरू किया है।

हम अक्सर अपने चारों तरफ हो रहीं समस्याओं पर किसी न किसी को कोसते ही रहते हैं। लेकिन हम में से बहुत ही कम लोग उस समस्या को हल करने के बारे में कोई कदम उठाते हैं। जैसन पॉल और उनकी टीम जैसे कुछ नेक लोग दुनिया में बदलाव ला रहे हैं।

यदि जैसन पॉल और उनकी टीम के इस प्रयास ने आपके दिल को छुआ है और आप किसी भी तरह से उनकी मदद करना चाहते हैं तो +91-7025907269 पर संपर्क कर सकते हैं!

मूल लेख: विद्या राजा

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: A Kerala Fruit seller, Jaison Paul along with his team, has turned a defunct bus stop into a free kitchen for 200 poor and homeless people. Paul is inspired by Mother Teresa’s works and he wants to make a difference in the society. 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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