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छठ पूजा : संगीत का हुस्न : नास्तिकता

आज शनिवार की चाय के साथ आइये हम कुछ सामाजिक, धार्मिक बेड़ियाँ तोड़ें और हमारे देश की सांस्कृतिक समृद्धि के इस फूल की ख़ुशबू का रस लें :)

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हँगी लचकत जाए
बहँगी लचकत जाए..

 

कितने हसीन बिम्ब हैं. कितना हसीन गीत है, आज जो वीडियो हाज़िर-ए-ख़िदमत है उसमें कितनी मोहक आवाज़ और गायकी है. आप अगर छठ पूजा उत्साह से मनाते हैं तो इस गीत को सुन कर श्रद्धा के उल्लास से भर सकते हैं. और अगर न मनाते हैं, किसी दूसरे धर्म के हैं, राज्य के हैं, भोजपुरी नहीं समझते तो भी देखिये सुनिए इसे – अगर मानसिक प्रतिरोध नहीं रहेगा तो देखिये संगीत किस आसानी से आपके हृदय में उतरता जाएगा.

 

यार तुम तो बिहार के नहीं हो फिर छठ पूजा क्यों?
अमाँ सुनते थे नास्तिक हो फिर ये गीत?
कहते तो हो कि धर्म और राजनीति हिंदी कविता प्रोजेक्ट में नहीं आएगी, फिर ये गीत क्यों?

 

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इस तरह के सवालों से हमेशा सामना होता है. जब आप मुहर्रम का संगीत सबके सामने ले कर आते हैं. जब समीना क़बा के दामन को झाड़ रही होती है या राम चंद्र ही ठुमक ठुमक चल रहे होते हैं और पैजनिया बज रही होती है तब धर्म के पिंजरे में रहने वालों को अपनी आस्था के दर्शन होते हैं लेकिन एक आम इंसान संगीत के प्रति चेतस होता है. आप किसी भी भाषा का संगीत सुनें वह सार्वभौमिक है. भौगोलिक, सामाजिक, धार्मिक, भाषाई सीमाओं में क़ैद नहीं हो सकता. कई बार किसी अनजानी भाषा के संगीत को यूट्यूब पर लगा कर कई दिनों तक सुनता रहता हूँ, ज़रूरत ही महसूस नहीं होती कि शब्दों का अर्थ भी जानूँ. शब्द निःसन्देह शक्तिशाली हैं लेकिन कोई अभिव्यक्ति इनकी सीमा में क्यों बँधे? हमारे यहाँ नियम कला जैसी निर्बाध प्रक्रिया पर भी लागू कर दिए जाते हैं जो कला के प्रति हिंसा है. और हर व्यक्ति जो कुछ कर नहीं सकता बड़ी आसानी से क्रिटिक बन जाता है. भारत की समृद्धि को बाँटा जाए सबके साथ. आपको आज गरबे का मज़ा लेने के लिए गुजराती होने की आवश्यकता नहीं है, न ही भंगड़ा करने के लिए पंजाबी होने की. समृद्ध वह है जो हर विधा, हर कला, हर रंग और हर संस्कृति का आनंद ले सकता है.

 

आज शनिवार की चाय के साथ आइये हम कुछ सामाजिक, धार्मिक बेड़ियाँ तोड़ें और हमारे देश की सांस्कृतिक समृद्धि के इस फूल की ख़ुशबू का रस लें 🙂


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“NOTE: The views expressed here are those of the authors and do not necessarily represent or reflect the views of The Better India.”

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