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1048 रैंक से 63वीं रैंक तक, इस UPSC टॉपर से जानिए कुछ ज़रूरी टिप्स!

विशाल का कहना है कि UPSC के लिए सभी छात्र एक ही सिलेबस पढ़ते हैं, इसलिए ज़रूरी यह है कि हम इस बात पर फोकस करें कि हमें अपनी नॉलेज और ज्ञान को परीक्षा में लिखना कैसे है। तभी हम कुछ अलग कर पायेंगें!

साल 2018 में, विशाल साह ने यूपीएससी की परीक्षा में 63वीं रैंक हासिल की और उन्होंने उस साल अपने वैकल्पिक विषय, सोशियोलॉजी में सबसे ज़्यादा अंक (329) भी हासिल किये। पर दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले विशाल ने 2017 में सीएसई की परीक्षा में 1048वीं रैंक प्राप्त की थी।

हमने विशाल से जानने की कोशिश की कि उन्होंने अपनी तैयारी की स्ट्रेटेजी में ऐसे क्या ज़रूरी बदलाव किये, जिससे दूसरी बार में उन्होंने बेहतर रैंक के साथ परीक्षा पास की।

विशाल ने सोशियोलॉजी में सबसे ज़्यादा अंक हासिल किये, इसलिए हमने सबसे पहले उनसे यही पूछा कि उन्होंने कैसे इस विषय की तैयारी की और आखिर क्यों, उन्होंने सोशियोलॉजी को ही वैकल्पिक विषय के लिए चुना?

विशाल ने बताया कि सोशियोलॉजी के पेपर को अटेम्प्ट करने के कई तरीके हैं और उन्होंने अपने उत्तरों में बहुत-से विचारकों और उनके बारे में लिखने की बजाय, सवाल के विषय पर विचारकों के अलग-अलग दृष्टिकोण को लिखा। बहुत बार, हम अलग-अलग विचारकों के बारे में लिखते तो हैं पर उनका दृष्टिकोण एक जैसा ही होता है।

विशाल साह

दूसरी अच्छी बात जो विशाल ने की, वह थी कि उन्होंने छोटे उत्तर लिखने पर ज़्यादा फोकस किया। उन्होंने कहा,

“अक्सर हम लम्बे प्रश्नों में से उन प्रश्नों को चुनते हैं जिन पर हमें बहुत अच्छे से जानकारी होती है। लेकिन छोटे सवालों में ऐसा नहीं होता है। इसलिए प्रतिभागी को विषय पर जो भी ज्ञान हो, उसी को हर एक सवाल के लिए रचनात्मक और क्रियात्मक उत्तर लिखने में लगायें।”

कैसे करें ऑप्शनल/वैकल्पिक विषय का चयन?

विशाल कहते हैं कि वैकल्पिक विषय चुनने से पहले प्रतिभागियों को अच्छे से सोचना चाहिए। सिर्फ़ अपनी दिलचस्पी की वजह से किसी भी विषय को न चुनें। आपको सबसे पहले सिलेबस देखना चाहिए और फिर यदि किसी विषय के लिए आपको महसूस होता है कि आप उसे अच्छे से कर पायेंगें तो आपको वह चुनना चाहिए।

वैकल्पिक विषय चुनने से पहले यह समझिये कि आपके पास तैयारी का समय कितना है और आप उस विषय पर कितना समय दे सकते हैं। इसके लिए आप एक टाइम टेबल बनाइए।

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एक अच्छा चुनाव यह भी है कि आप बाकी विषयों से सम्बन्धित ही कोई विषय चुने, जिनके कॉन्सेप्ट आपस में मेल खाते हों। विशाल बताते हैं कि उनका विषय सोशियोलॉजी, जनरल पेपर और निबंधातम्क पार्ट से काफ़ी ओवरलैप करता था। साथ ही, आपको वह विषय चुनना चाहिए जिस पर आपको पढ़ने के लिए किताबें, नोट्स या फिर ऑनलाइन चीज़ें आसानी से मिल जाये। क्योंकि ऐसा नहीं होना चाहिए कि सिलेबस के लिए ज़रूरी किताबें और अन्य सामग्री जुटाने में भी आपका बहुत समय चला जाये।

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“सोशियोलॉजी का सिलेबस बाकी विषयों की तुलना में काफ़ी कम था और इससे प्रतिभागी को रिवाइज करने का काफ़ी वक़्त मिलता है,” विशाल बताते हैं।

नोट्स बनाने के टिप्स

इस बारे में विशाल कहते हैं कि नोट्स बनाते समय आपको याद रखना चाहिए कि जैसे-जैसे परीक्षा करीब आती है तो हम नोट्स पर निर्भर करते हैं। इसलिए नोट्स छोटे होने चाहिए पर इनमें सभी ज़रूरी जानकारी होनी चाहिये। बहुत बड़े-बड़े नोट्स बनाने का कोई फायदा नहीं क्योंकि आप परीक्षा के कुछ दिन पहले इन्हें जल्दी से रिवाइज नहीं कर सकते।

 

अकादमी में विशाल

 

नोट्स बनाते समय प्रतिभागियों को सिलेबस और पुराने पेपर्स भी देखते रहना चाहिए। आपको नोट्स बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे शब्द या फिर वाक्य इस्तेमाल करें जो बाद में आसानी से समझ में आ जाएँ। इसके अलावा, विशाल इस बात पर भी जोर देते हैं कि हमें तैयारी शुरू करते ही तुरंत नोट्स बनाना शुरू नहीं करना चाहिए। सबसे पहले कॉन्सेप्ट्स को अच्छे से पढ़ें और सिलेबस को समझें। इसके बाद ही हमें नोट्स पर आना चहिये।

कैसे लिखे अच्छे जवाब?

विशाल का कहना है कि अगर पढ़ने के साधन और जानकारी के बारे में बात करें तो लगभग सभी प्रतिभागी एक ही सिलेबस पढ़ते हैं। इसलिए ज़रूरी यह है कि आप अपने ज्ञान को परीक्षा में कैसे लिखते हैं जिससे कि पेपर चेक करने वाले के लिए कुछ नया हो।

“मैंने जवाब लिखने पर बहुत मेहनत की और मुझे लगता है कि पहले अटेम्प्ट के बाद मेरी यह स्किल बेहतर हुई है। प्रश्न में पूछी गयी सभी बातों का जवाब आपके उत्तर में होना चहिये और यह भी ध्यान रखिए कि आपके जवाब, चेक करने वाले के लिए पढ़ना आसान हो। थोड़ा वक़्त देकर, अपने उत्तर में सब-हैडिंग बनाएं और पैराग्राफ में लिखें,” विशाल ने कहा।

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साथ ही, वे यह भी कहते हैं कि प्रतिभागी अक्सर पूरा साल अखबार पढ़ने और नोट्स बनाने में उलझे रहते हैं। जबकि उन्होंने परीक्षा से सिर्फ़ तीन महीने पहले अख़बार पढ़ना शुरू किया था। वे प्रतिभागियों को सलाह देते हैं कि पूरे साल अख़बार में से नोट्स न बनायें। आप तीन महीने पहले अख़बार पढ़ें और अपनी कार्य क्षमता बढ़ाएं।

तो इन सभी टिप्स को ध्यान में रखें और परीक्षा में अच्छा करें!

संपादन: भगवती लाल तेली 
मूल लेख: विद्या राजा 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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