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बिहार में गरीब बच्चों को मुफ़्त कोचिंग दे रहा है न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पढ़ा यह छात्र!

मास्टर्स करने के दौरान किसलय को न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिला। पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके पास ढेरों मौके थे जहां वे किसी भी बड़े से बड़े गणितज्ञ के साथ काम कर सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने ज्ञान का उपयोग अपने देश के भविष्य के लिए करने की ठानी।

बिहार के पटना में रहने वाले किसलय शर्मा को साल 2015 में अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन के दौरान न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में फुल स्कॉलरशिप पर इंटर्नशिप करने का मौका मिला। पढ़ाई में हमेशा से ही अव्वल रहे किसलय के परिवार और जान-पहचान वालों को लगा था कि वे शायद ही अब पटना में रहने के बारे में सोचें। उन्हें अच्छी नौकरी मिल जाएगी और वे कहीं बाहर ही सेटल हो जाएंगे।

लेकिन किसलय का प्लान कुछ और ही था। उन्हें भले ही न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप मिली, लेकिन उनके मन में हमेशा से ही अपने देश और समाज के लिए कुछ करने की भावना थी। उनकी यह भावना इतनी प्रबल थी कि आज वे लगभग सैकड़ों बच्चों को मुफ़्त में शिक्षा दे रहे हैं।

उनका उद्देश्य गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर उन्हें एक बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है। द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्हें स्कॉलरशिप मिली और लोग उन्हें बधाई दे रहे थे तो उनके मन में बहुत-से सवाल चल रहे थे।

“मैं सोच रहा था कि मेरे घर में तो हमेशा से पढ़ाई-लिखाई का माहौल रहा, इसलिए मुझे इस तरह की इंटर्नशिप, स्कॉलरशिप आदि का पता चलता रहा। पर बिहार में ऐसे बहुत से बच्चे हैं जिनमें काबिलियत तो है पर जागरूकता का अभाव है।”

किसलय शर्मा

4 महीने की इंटर्नशिप के बाद किसलय अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी करने के लिए पटना लौट आए। डिग्री पूरी होने के बाद, उन्हें फिर से एक रिसर्च के लिए न्यूयॉर्क जाने का मौका मिला। कुछ समय बाद, जब यूनिवर्सिटी ने उन्हें भारत में ही रहकर रिसर्च का काम करने की सुविधा दे दी तो वे फिर अपने वतन लौट आए। यहाँ आकर उन्होंने अपना शोध-कार्य जारी रखा।

28 वर्षीय किसलय बताते हैं कि वैसे तो साल 2012 से ही वे शिक्षण-कार्य से जुड़े हुए हैं क्योंकि उन्हें जब भी मौका मिलता तो वे बच्चों को ट्यूशन आदि पढ़ाते। लेकिन फिर कॉलेज और इंटर्नशिप के चलते यह रेग्युलर में नहीं चल पाया। इसलिए जब वे यूएस से वापिस आए तो उन्होंने ठान लिया कि अपनी इसी पहल पर आगे काम करेंगे।

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यहीं से उनके ‘जागृति अभियान‘ की शुरुआत हुई। इस अभियान की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके अपने पिता, डॉ. वी. बी. शर्मा हैं। द बेटर इंडिया से बात करते हुए डॉ. शर्मा ने बताया,

“जिस जमाने में हमने पढ़ाई की, तब मुश्किलें बहुत थी। मुझे पढ़ने और पढ़ाने का हमेशा से शौक रहा। भले ही मैंने एमबीबीएस की, पर फिर भी बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता था। इसलिए हमारी कोशिश रही कि गरीब और ज़रुरतमंद बच्चों को जितना पढ़ा पाएं, उतना पढ़ाएं।”

जागृति के ज़रिए, कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्रों को पढ़ाया जाता है। किसलय यहाँ पर गणित पढ़ाते हैं तो उनके पिता फिजिक्स के टीचर हैं। इसके अलावा अन्य विषयों के लिए भी उनके पास शिक्षक हैं क्योंकि शुरू से ही डॉ. शर्मा के कुछ दोस्त भी इस पहल से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोस में उनके एक दोस्त ने ही अपने घर में उन्हें जगह दी, जहाँ वे इन बच्चों को पढ़ाते थे।

अपने पिता डॉ. वी. बी. शर्मा के साथ किसलय

चंद बच्चों से शुरू हुई यह पहल आज लगभग 600 बच्चों तक पहुँच चुकी है। यहाँ पर किसलय का उद्देश्य इन बच्चों को सिर्फ़ कोचिंग देना ही नहीं है, बल्कि वे इन बच्चों को गुणवत्ता वाली शिक्षा देना चाहते हैं। वे कहते हैं,

“गरीब बच्चे तो सरकारी स्कूल या फिर छोटे-मोटे प्राइवेट स्कूल में ही जा सकते हैं। वहां पर शिक्षा का स्तर काफ़ी नीचे है क्योंकि बहुत बार तो शिक्षक बच्चों के बेसिक कॉन्सेप्ट ही क्लियर नहीं कर पाते हैं। इसलिए हम सभी बच्चों को उनके लेवल पर जाकर पढ़ाते हैं ताकि वे विषय को समझ पाएं और आगे की पढ़ाई के लिए अपना फ़ैसला खुद ले सकें।”

इसके लिए, समय-समय पर वे बच्चों का स्तर परीक्षा के माध्यम से जांचते हैं, क्योंकि फिर बच्चे के समझने के स्तर के हिसाब से वे उनके साथ काम करते हैं। उनका एक उद्देश्य बच्चों की दिलचस्पी और उनकी क्षमता के अनुसार उनकी करियर काउंसलिंग करना भी रहता है। हर साल देश में होने वाली कुछ मुख्य परीक्षाओं के अलावा भी ये बच्चों को अन्य कॉलेज और यूनिवर्सिटी के बारे में भी बताते रहते हैं। इससे बच्चों को बहुत से विकल्पों का पता चलता है जहाँ वे स्कूल पूरा करने के बाद जा सकते हैं।

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उनके यहाँ गरीब और समृद्ध, दोनों ही तबके के बच्चे पढ़ते हैं। अच्छे घरों से आने वाले बच्चों से वे फीस लेते हैं जबकि गरीब बच्चे मुफ़्त में पढ़ते हैं!

किसलय कहते हैं कि उनके यहाँ पढ़ने वाले बच्चों ने अब तक IIT-JEE, NEET , KYPY, CA और NDA जैसी परीक्षाओं को पास किया है। बोर्ड की परीक्षाओं में भी उनके छात्र अव्वल अंकों से पास होते हैं।

उनके यहाँ आने वाले छात्रों में गरीब और ज़रुरतमंद छात्रों के साथ -साथ समृद्ध घरों के बच्चे भी पढ़ते हैं। इस पर किसलय कहते हैं कि

“हमारा उद्देश्य अच्छी शिक्षा देना है। इसलिए हम पैसा या गरीबी नहीं देखते। पर हां, गरीब बच्चों से हम कोई फीस नहीं लेते हैं। उल्टा यदि उन्हें ज़रूरत होती है तो हम उनकी मदद करते हैं।”

लेकिन फिर सवाल आता है फंड्स का, कि फंड्स कैसे मैनेज होते हैं?

इस बारे में किसलय ने बताया कि उनके पास ऐसे भी बच्चे पढ़ने आते हैं जिनके माता-पिता फीस दे सकते हैं। इसलिए हम सबसे पहले बच्चों का बैकग्राउंड वेरीफाई करते हैं और फिर जो भी माता-पिता कोचिंग फीस देने में सक्षम हैं, उनसे एक फीस ली जाती है। इन बच्चों की फीस में से बाकी बच्चों का खर्च भी निकल जाता है।

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पढ़ाई के अलावा भी ‘जागृति’ में बच्चों के लिए बहुत-से अलग-अलग इवेंट होते हैं, जैसे समय-समय पर क्विज प्रतियोगिताएं और काउंसलिंग सेशन आदि। काउंसलिंग सिर्फ़ बच्चों की ही नहीं बल्कि उनके माता-पिता की भी होती है। हर तीन महीने में बच्चों के माता-पिता को बुलाया जाता है ताकि उन्हें भी अपने बच्चे की ग्रोथ के बारे में पता रहे।

“मेरा पूरा फोकस है कि बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी जागरुक किया जाए। फ़िलहाल हम इसी कोशिश में हैं कि छात्रों को 8वीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक कोचिंग करवाएं। क्योंकि अगर उन्हें यहाँ पांच साल अच्छी शिक्षा और मार्गदर्शन मिलता है तो वे आगे के जीवन के बारे में बेहतर निर्णय ले सकते हैं,” उन्होंने कहा।

किसलय को अब तक कई पुरस्कार मिल चुके हैं

साथ ही, वे बच्चों के लिए बैंकिंग सेक्टर की कोचिंग क्लास भी शुरू करना चाहते हैं। क्योंकि उनके पास ज़्यादातर जो बच्चे आते हैं वे इस तरह के बैकग्राउंड से हैं जिनके पास बहुत ज़्यादा समय नहीं होता। उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद तुरंत अपने घर की ज़िम्मेदारी लेनी पड़ती है। ऐसे में, बैंकिंग सेक्टर की परीक्षा सबसे बेहतर है क्योंकि इसके लिए आप काम करते हुए तैयारी कर सकते हैं।

इसके अलावा, किसलय अपने इस अभियान को पटना से बाहर और भी शहर और गांवों तक ले जाना चाहते हैं। उनका मानना है कि हम उस दिन सभी मायनों में कामयाब होंगे, जब हमारे यहाँ सभी बच्चों को बराबरी की शिक्षा और मौके मिलेंगे।

यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है और यदि पटना में आपकी जानकारी में ऐसे छात्र हैं जिन्हें मार्गदर्शन की ज़रूरत है तो किसलय कुमार से संपर्क करने के लिए kislaydreams@gmail.com पर संपर्क करें! उनके कुछ छात्रों के बोर्ड परीक्षा व एंट्रेंस एग्जाम के परिणाम आप उनके फेसबुक पेज पर देख सकते हैं!


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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jitendra malik

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