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18 साल की उम्र में लगाया था पहला पौधा, 6 साल में 22 पार्कों की बदल दी सूरत!

भुवनेश ने 18 की उम्र में ही प्लांटेशन को अपनी हॉबी बना लिया और शहर के सभी उजड़े पड़े पार्कों को हरियाली से भरने की सोची।

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भुवनेश ओझा।

सोचिए अगर आपकी उम्र 18 साल है तो आपके दिमाग में क्या ख्याल आएंगे। दोस्तों के साथ घूमना, खेलना, पढ़ना, टीवी देखना आदि। आप हम में से शायद ही कोई हो जिसे इस उम्र में बदहाल पड़े पार्कों की तस्वीर का ख्याल आए। हम शायद ही सोचे कि इन रूखे पार्कों में क्यों न पौधे लगाकर इन्हें हरियाली से भर दिया जाए। लेकिन उदयपुर, राजस्थान के रहने वाले 24 साल के एक लड़के ने इसी उम्र में प्लांटेशन को अपनी आदत में डाल दिया। आदत ऐसी कि जिसने 6 साल में उदयपुर के कई पब्लिक पार्कों की काया पलट कर रख दी। जो पार्क कभी पेड़-पौधों के अभाव में उजड़े पड़े थे, अब वे हरियाली से भर मुस्कुरा रहे हैं। यह कहानी है ‘पुकार फाउंडेशन‘ के संस्थापक भुवनेश ओझा की, जिन्होंने महज 18 वर्ष की उम्र में प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले अपनी कॉलोनी के कुछ बच्चों साथ एक पौधे से ऐसा सफर शुरू किया जो अब तक पांच हजार से ज्यादा प्लांटेशन करवा चुका है।

भुवनेश ने 10 मार्च 2013 को सेक्टर 14 में अपने मोहल्ले के पार्क में पहला पौधा लगाया था। उस समय उनके साथ कुछ बच्चे थे।

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वह दिन जब भुवनेश ने कुछ बच्चों के साथ मिलकर पहला पौधा लगाया था।

इन बच्चों की मदद से पार्क में बाद में कुछ और पौधे भी लगाए गए। भुवनेश और कुछ बच्चों के इस नेक काम में बाद में और भी लोग जुड़ते गए और अब पुकार परिवार में दस हजार से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं।

भुवनेश बताते हैं, “मैंने अपनी कॉलोनी के पार्क को बदहाल देखा था। पार्क में हरियाली के नाम पर कुछ नहीं था। ऐसे में ख्याल आया कि क्यों न यहाँ पौधे रोपे जाए। मैंने अपनी पॉकेट मनी के पैसों से पौधा खरीदा और कॉलोनी के बच्चों को इकट्ठा किया। इसके बाद हमने कॉलोनी के पार्क में पहला पौधा लगाया।”

अपनी कॉलोनी के पार्क में लगाए पहले पौधे के बाद भुवनेश ने वहां और भी पौधे लगाए, जहाँ मोहल्ले के बच्चे उनकी देखभाल करते थे। शुरू में पौधों का नामकरण व्यक्तियों के नाम से किया गया था ताकि बच्चों में पौधों के प्रति उत्साह रहे और वे उनकी सही देखभाल करें। इस काम में आसपास के और शहर के लोगों का सहयोग मिला तो उन्होंने इसे ‘पुकार‘ नाम देते हुए एक संस्थान का रूप दिया, जिसका अर्थ ‘प्रकृति की पुकार’ से था।

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भुवनेश ओझा।

तब से लेकर अब तक भुवनेश व उनकी टीम शहर के 22 पब्लिक पार्कों, तीन विश्वविद्यालयों, दस विद्यालयों सहित विभिन्न जगहों पर प्लांटेशन कर चुकी है। इसके अलावा उन्होंने अरावली की पहाडियों पर भी पौधारोपण किया है, जिसमें उन्होंने अरावली के दुर्लभ पौधे महुआ, बहेड़ा, कचनार, गूंदा, लसुड़ा आदि लगाए। पहाड़ी पर दूर क्षेत्र होने के चलते उन्होंने इन पौधों की देखभाल का जिम्मा उन पहाड़ियों पर रहने वाले लोगों को ही दिया और पर्यावरण संरक्षण के फायदे बताए। साथ ही वहां पर रहने वाले लोगों को प्रतिबद्ध करते हुए पौधे की रक्षा का एक फॉर्म भी भरवाया ताकि लोग इस काम को सीरियसली करें।

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अरावली पर पौधारोपण।

पुकार की ओर से कई बार तो स्वयं ही ऐसे पार्क या एरिया को ढूंढा जाता है जहाँ प्लांटेशन की ज़रुरत होती है, यहाँ वे अपनी ओर से ही प्लांटेशन करवा देते हैं। लेकिन कई बार वे किसी संस्थान, क्लब, संगठन या फिर सोसायटी के लिए प्लांटेशन करते हैं।

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पुकार की ओर से 6 साल में अब तक 7 हज़ार से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें 5 हज़ार से ज्यादा पौधे बड़े होकर जीवित अवस्था में हैं। पुकार की ओर से हर रविवार को पौधारोपण उत्सव भी मनाया जाता है।

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पौधारोपण उत्सव मनाते पुकार के साथी।

भुवनेश और उनकी टीम को आज भले ही वन विभाग या अन्य नर्सरी सस्ते में पौधे दे देते हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था कि भुवनेश को पौधे खरीदने के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी। अपने अभियान के शुरुआती दौर में तो उन्होंने बहुत महंगे पौधे भी खरीदकर लगाए।

“पहले पता नहीं था कि वन विभाग में सस्ते प्लांट मिलते हैं। ऐसे में पॉकेट मनी से प्राइवेट नर्सरी से महंगे प्लांट खरीदकर लाते थे, जिसमें एक पौधे की कीमत 100 रुपए से भी ज्यादा होती थी,” भुवनेश बताते हैं।

भुवनेश और पुकार संगठन की खासियत यह है कि वे कभी भी पौधे लगाकर भूलते नहीं हैं। जहाँ पर भी वे प्लांटेशन करते हैं वहां हर हफ्ते जाकर यह देखते हैं कि पौधा मर तो नहीं गया या फिर अभी किस अवस्था में है आदि।

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पुकार की ओर से पौधों के रखरखाव का फर्क इस फोटो में साफ़ देखा जा सकता है।

अगर पौधा मर गया होता है या फिर उखड़ गया होता है तो वे वहां नया पौधा लगाते हैं। साथ ही जिस एरिया में पौधे लगाए गए होते हैं उन पौधों की रक्षा की जिम्मेदारी उधर के वॉलीन्टियर्स को देते हैं। इसके बकायदा कोओर्डिनेटर बनाए जाते हैं। देखभाल में पौधों को पानी पिलाना, मिट्टी डालना, ट्री गार्ड लगाना आदि शामिल है। वे दो साल तक पौधे का रखरखाव करते हैं।

अपने नेक काम के चलते भुवनेश को 2016 में राजस्थान सरकार का स्वच्छ राजस्थान अवार्ड, जिला पर्यावरण समिति का पर्यावरण संरक्षण के लिए अवार्ड सहित कई गैर सरकारी संस्थानों ने भी सम्मानित किया है।

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सम्मान प्राप्त करते भुवनेश व साथी।

पुकार को अब लोगों की मदद मिलने लगी है। कुछ लोग सीधा फंड तो कुछ पौधे खरीदकर भी देते हैं तो कभी सदस्यों की पॉकेट मनी से यह मिशन आगे बढ़ता है। समय के साथ उनका मिशन उदयपुर से बाहर भी निकला है और अन्य शहरों के युवा भी पुकार से जुड़े हैं। बांसवाड़ा में पुकार के वॉलीन्टियर्स बेहतर काम कर रहे हैं। वहां भी पार्कों में प्लांटेशन का काम जोर पकड़ रहा है।

अगर आपको भुवनेश ओझा की कहानी से प्रेरित हुए हैं और उन्हें संपर्क करना या उनकी मदद करना चाहते हैं तो उनसे इस नंबर 9829971479 पर बात कर सकते हैं। आप उनसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।

संपादन – मानबी कटोच


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Written by भरत

उदयपुर, राजस्थान से हूँ। गजल, शायरियां, लप्रेक कहानियां लिखने व पढ़ने का शौक है, जिसे आप मेरे ब्लॉग pagalbetu.blogspot.com / yourquote.in/bharatborana पर पढ़ सकते हैं। पहाड़, झील, शांत सड़कें, चाय अच्छी लगती है। घूमना व बतियाना पसंद है। कभी-कभी यूं ही बेवजह उदास हो जाता हूँ, बाकी जिंदगी अच्छी कट रही है।

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