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60+ की उम्र में बनाया क्लब; बदल रहे हैं गरीब बच्चों की ज़िदगियां!

ये बुजुर्ग इन बच्चों की स्कूल फीस से लेकर उनकी किताबों और ड्रेस के साथ ट्यूशन फीस का भी खर्च उठा रहे हैं। साथ ही उनको स्वरोजगार का प्रशिक्षण और लोन दिलाने में भी मदद करते हैं।

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'शिक्षा सेतु' से जुड़े बुजुर्ग हरी विश्नोई पुस्तकें बांटते हुए।

शिक्षा व्यवस्था में उदासीनता के चलते गरीब छात्र-छात्राओं के लिए चल रही सरकारी योजनाओं की जानकारी उन तक नहीं पहुँच पाती है, जिससे वे इन योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। सूचना क्रांति के बावजूद उपयोगी सूचनाएं लक्षित समूह तक नहीं पहुँच पाने से आज कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि गरीबों के लिए शिक्षा सुविधाओं की कमी है। उनके लिए देश में ऐसी कई योजनाएं चल रही हैं जिससे वे आसानी से निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद गरीब तबके की एक बड़ी आबादी शिक्षा की चौखट से दूर है। ऐसे में शिक्षा और बच्चों के बीच में सेतु बनकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहा हैं ‘शिक्षा सेतु’ नाम का संगठन।

‘शिक्षा सेतु’ ने बच्चों और शिक्षा के बीच में एक कड़ी की जरुरत महसूस की थी। इसी मकसद से गत 15 अगस्त 2018 से वंचितों की शिक्षा में सेतु बन कर सहायता करने का बीड़ा उठाया मेरठ के सरकारी नौकरी से रिटायर्ड ‘क्लब-60’ से जुड़े 15 वरिष्ठ नागरिकों ने। ये वरिष्टजन ‘शिक्षा सेतु’ नाम के संगठन से गरीब बच्चों की जिंदगी में शिक्षा का उजाला लाने का काम कर रहे हैं। उनके इस नेक काम में उनके अलावा 35 सहयोगी व अब तक लाभान्वित 150 छात्रों के समूह सहित कुल 200 संचारक भी मदद कर रहे हैं।

संचालक हरी विश्नोई कहते हैं, “एक बार मेरे बेटे का एक सहपाठी घर आया था। मैंने उससे पूछा कि आपके पापा क्या करते हैं? वह बोला – अब नहीं हैं, एक दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। मैं आवाक था। उसकी माता जी दिव्यांग थीं। घर में कोई कमाने वाला नहीं था। वह बच्चा खुद छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपनी पढ़ाई कर रहा था। इस घटना ने मुझे झकझोर दिया। यहां से विचार आया कि ऐसे जरूरतमंद बच्चों की मदद करनी चाहिए।”

‘शिक्षा सेतु’ के माध्यम से निर्धन छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी प्रिंट व सोशल मीडिया, जनसंपर्क, जागरूकता शिविरों आदि के माध्यम से जरूरतमंद छात्रों तक पहुँचाने का काम किया जाता है। इसके अतिरिक्त एच ब्लॉक, शास्त्री नगर, टैगोर पार्क स्थित सूचना केन्द्र पर ‘शिक्षा सेतु’ की दो दैनिक बैठके रोज सुबह व शाम को 7 से 8 बजे तक होती है। इस दौरान व्यक्तिगत संपर्क या इन नम्बर 9719650882 पर कॉल कर भी योजनाओं की जानकारी हासिल की जा सकती है।

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‘शिक्षा सेतु’ के जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागी।

‘शिक्षा सेतु’ की ओर से न सिर्फ बच्चों को शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है बल्कि उनको शिक्षित करने के अन्य प्रयास भी किये जाते हैं।

‘शिक्षा सेतु’ सबसे पहले अतिनिर्धन, पितृविहीन व अनाथ बच्चों के एडमिशन के लिए विद्यालय प्रबंधन से मिल कर फीस माफ कराने का काम करता है। उसके बाद बच्चों के ड्रेस, बुक्स, ट्रांसपोर्ट, फ्री कोचिंग की सुविधा दी जाती है। इन बच्चों को उच्च शिक्षा व करियर परामर्श की सुविधाएं भी दी जाती है, ताकि बच्चे मेहनत से पढ़े व अधिक अंकों से पास होने का प्रयास करे।

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‘शिक्षा सेतु’ की मुहीम में शामिल बच्चे।

इसके अलावा 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को सिंडीकेट बैंक के स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से 15 विभिन्न ट्रेडों में फ्री ट्रेनिंग करवाई जाती है। साथ ही उन्हें जिला उद्योग केन्द्र व ग्रामोद्योग बोर्ड से स्वरोजगार के लिए लोन भी दिलाया जाता है। ‘शिक्षा सेतु’ के माध्यम से अब तक 50 बच्चों को ड्रेस, 50 बच्चों को कॉपी-किताबें व 50 बच्चों की स्कूल फीस, फ्री कोचिंग व RTE एक्ट में निजी स्कूल में फ्री शिक्षा हेतु एडमिशन सहित कुल 152 बच्चों की मदद की गई है।

‘शिक्षा सेतु’ के सहयोगियों में अरूण वर्मा इच्छुक अभ्यर्थियों के आरटीई के ऑनलाइन आवेदन निशुल्क भरते हैं तो नितिन बड़ोला फ्री कोचिंग पढ़ाते हैं। श्रुति रस्तोगी मलिन बस्ती में जाकर गरीब बच्चों को पढ़ाती हैं।

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बस्ती में जाकर जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाते हुए। (फोटो में श्रुति रस्तोगी)

‘शिक्षा सेतु’ से सहायता के इच्छुक लाभार्थी बच्चों से आजीवन र्निव्यसनी रहने, पर्यावरण बचाने, देश को सर्वोपरि मानने व बड़ा होकर अभावग्रस्त बच्चों की शिक्षा में अधिकाधिक मदद करने के 4 लिखित संकल्प आवेदन-पत्र भरवाए जाते हैं, ताकि वे आर्दश नागरिक बन सके। साथ ही गरीबों की शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान करने वाली संस्थाओं व व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रति वर्ष ‘शिक्षा सेतु’ अवॉर्ड भी दिए जाते हैं। गत वर्ष 5 सितंबर 2018 को शिक्षक दिवस पर गरीब बच्चों को फ्री कोचिंग कराने वाले नितिन बड़ोला व योग प्रशिक्षक निशा सक्सेना और फीस में सर्वाधिक छूट देने वाले बालेराम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एस के शर्मा को सम्मानित किया गया था।

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‘शिक्षा सेतु’ में मदद करने वाले बुजुर्गों का सम्मान करते हुए।

संयोजक महेश रस्तोगी कहते हैं, “शिक्षा सेतु को मुख्य रूप से क्लब-60 के सदस्य, उनके मित्र व परिजन अंशदान करते हैं। कभी किसी से आर्थिक सहयोग देने के लिए कोई आग्रह या मांग नहीं की जाती। हाँ, कुछ लोग हमारे कार्यों की पारदर्शिता को देखते हुए स्वयं सहयोग करते है। उनसे सीधे स्कूल कॉलेज के नाम से चेक लेकर उसकी रसीद भेज दी जाती है।”

इस वर्ष 12 सितंबर को भी ऐसी ही 5 हस्तियों को सम्मानित किया गया, जो साधनहीनों की शिक्षा में सहायता का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। भावी योजना के रूप में ‘शिक्षा सेतु’ द्वारा जल्द ही गरीब बच्चों के लिए एक बुक बैंक खोला जाएगा। साथ ही ‘शिक्षा सेतु’ से जुड़े सभी 200 सहयोगियों का लक्ष्य 3 मित्र, 3 पड़ोसी व 4 परिजनों सहित 10-10 लोगों को जोड़कर 2 हजार शिक्षा सेवियों की श्रंखला बनाने का है। ताकि यह सेवा कार्य और अधिक विस्तारित हो सके।

अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी और आप ‘शिक्षा सेतु’ की मदद करना चाहते हैं या फिर हरी विश्नोई से सम्पर्क करना चाहते हैं तो इस नंबर 97196 50882 पर बात कर सकते हैं।   

लेखक – हरी विश्नोई 

संपादन – भगवती लाल तेली 


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