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पिता के साथ जेल में रहकर की IIT की तैयारी और 453 रैंक हासिल किया!

जेल में रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी करना और IIT JEE में 453 रैंक पाना – 18 साल के पीयूष के लिए सफर मुश्किल था, पर उसकी मेहनत और लगन के कारण नामुमकिन नहीं था।

पीयूष के पिता फूलचंद हत्या के आरोप में जेल में सजा काट रहे हैं। 14 साल की उनकी सजा अब खत्म होने वाली है। फूलचंद को उनके अच्छे आचरण के कारण कोटा के ओपेन जेल में रहने की अनुमति मिल गई थी।

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Picture for representation only. Source: Wikimedia

ओपेन जेल में रहने वाले दोषियों को दिन में बाहर जाकर काम करने की इजाजत होती है। फूलचंद एक दुकान में काम करने लगे। यहाँ से उन्हें हर महीने 12000 रुपए मिलते थे। लेकिन अपनी इतनी पगार से वो पीयूष को होस्टल में नहीं रख सकते थे। किसी तरह उन्होंने पीयूष का एडमिशन एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में करा दिया। पीयूष अपने पिता के साथ ही उनके 8×8 के कमरे में रहकर एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करने लगा। जेल में रात 11 बजे के बाद बत्तियां बुझा दी जाती थी। जेल के कठिन हालातों में भी उसने धैर्य नहीं खोया और मेहनत से पढ़ाई करता रहा।

“जेल इतना भी बुरा नहीं था। लोगों को लगता है कि जेल का माहौल बहुत खराब होता है, मगर ऐसा नहीं है। मैंने यहाँ रहकर अपने पापा का सपना पूरा किया है। उनका मुझे यहाँ रखने का फैसला वाकई हिम्मत की बात थी,” पीयूष ने NDTV को बताया.

जेल सुपरिटेंडेंट शंकर सिंह ने बताया कि वे लोग बहुत खुश हैं कि पीयूष इतने मुश्किल हालातों के बावजूद सफल हुआ है। वो हमेशा पढ़ता रहता था। फूलचंद चाहता था कि उसका बेटा अपनी अलग पहचान बनाए। उसे एक कैदी के बेटे के रूप में न जाना जाए।

फूलचंद राजस्थान के डाकिया गाँव के रहने वाले हैं। वो एक स्कूल टीचर थे तथा हत्या के आरोप में 2007 से वो जेल में बंद हैं।

वीपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य न खोने वाले पियूष से निश्चित ही आज के युवा वर्ग को प्रेरणा मिलेगी।

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Written by आकाँक्षा शर्मा

आकाँक्षा शर्मा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज से पत्रकारिता
की पढ़ाई की है। लिखने का इतना शौक रखती है कि लिखने का बस बहाना चाहिए। किताबों से गहरी दोस्ती है। आकाँक्षा अपनी पढ़ाई के दौरान जी मीडियाके साथ भी काम कर चुकी है।

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