Search Icon
Nav Arrow

दृष्टिहीनों की ज़िंदगी में रौशनी के लिए किसान ने अपने गाँव में खोला ब्लाइंड स्कूल!

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के एक छोटे से गाँव में एक किसान ने 30 दृष्टिहीन बच्चों की जिंदगीयों में  रौशनी भर दी है। दृष्टिबाधित बच्चों का आवासीय स्कूल बनाकर वे उनको शिक्षा दे रहे हैं।

जिला मुख्यालय से 27 किमी दूर अमलीदी गाँव के ५६ वर्षीय प्रधान बरुन कुमार , ‘नेत्रहीन बाल विद्या मंदिर’ चलाते हैं। ज्यादातर बच्चे गरीब परिवार से हैं और इस स्कूल ने उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव किया है। यहाँ उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और वोकेशनल ट्रेनिंग भी मिलती है।

“मैं नहीं चाहता कि कोई भी दृष्टिहीन सड़कों पर भीख माँगे। मैं उन्हें आत्मनिर्भर  बनाना चाहता हूँ जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके”, बरून ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया  को बताया।

इस स्कूल की शुरूआत 2014 में हुई थी तब से अब तक छात्रों की संख्या लगभग दुगनी हो गई है।

child-2

Photo source: helpblindchildren

बरुन ने बताया कि आसपास के कई लोगों ने उनसे संपर्क किया है। उम्मीद है कि नए सेशन में बच्चों की संख्या 60 तक पहुँच जाएगी।

छठवीं तक के इस स्कूल में पढ़ाने वाले 5 अध्यापक भी दृष्टिहीन हैं। इनमें एक दंपत्ति जयदेव साहू और किरण साहू भी शामिल है।

बरुन कुमार की उन्नीस वर्षीय बेटी, हिमानी भी इस स्कूल को चलाने में अपना पूरा सहयोग देती है। हिमानी इस स्कूल की प्रधानाचार्य की भूमिका बखूबी निभा रही है।

स्कूल को सरकारी अनुदान तो मिलता ही है, इसके अलावा आम लोग भी इनकी आर्थिक सहायता करते हैं।

हिमानी बताती हैं कि बच्चों को ब्रेल के माध्यम से पढ़ाया जाता है। पढ़ाई के अलावा इन्हें दूसरे हुनर भी सिखाये जाते हैं जो इनके आम जीवन में काम आ सकें।

उन्होंने बताया कि उनके एक चचेरे भाई के दृष्टिहीन होने की वजह से उनके पिता को इस स्कूल को खोलने की प्रेरणा मिली।

“मैंने सोचा नहीं था कि मैं कभी स्कूल जा पाऊँगा”, छठवी कक्षा में पढ़ रहे अजय मेहर ने कहा। अजय  टीचर बनकर पिछड़े इलाकों के लोगों को शिक्षित करना चाहता है।

6 साल की खगेश्वरी भी टीचर बनकर अपने जैसे बच्चों को पढ़ाना चाहती है।

अंधेरी जिंदगी में बच्चों के सपनो को रोशनी देने के बरुन और हिमानी के इस प्रयास को हमारा  सलाम!

 

यदि आपको ये कहानी पसंद आई हो या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें contact@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter (@thebetterindia) पर संपर्क करे।

_tbi-social-media__share-icon