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मुंबई के इन दो शख्स से सीखिए नारियल के खोल से घर बनाना, वह भी कम से कम लागत में!

इस एक आईडिया ने हमारी आँखे खोल दीं कि कैसे कचरे में जाने पर इन नारियल खोल में मच्छर आदि उत्पन्न होने लगते हैं, जबकि हम इनका इस्तेमाल घर बनाने में कर सकते हैं!

क मार्केटिंग प्रोफेशनल मनीष अडवाणी और एक आर्किटेक्ट जयनील त्रिवेदी ने दो ऐसी समस्याओं का हल निकाला, जो कि एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं- एक कम लागत के घर और दूसरा डेंगू से बचाव। लेकिन इन दोनों समस्याओं का हल एक है नारियल के खोल!

मनीष काफ़ी समय से मुंबई में कचरे की समस्या से लड़ रहे हैं और उन्हें यह आईडिया तब आया जब उनके बेटे को शहर में बढ़ते कचरे के ढेरों के चलते सांस की तकलीफ होने लगी। मनीष बताते हैं कि उन्हें डॉक्टर ने बताया कि उनके बेटे को तकलीफ शहर में प्रदूषण और कचरे के ढेरों की वजह से हो रही है।

ऐसे में, मनीष ने कचरा प्रबंधन के तरीके खोजना शुरू किये। वे बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहली शुरुआत अपने घर के कचरे को कम्पोस्ट करने से की।

मनीष आडवानी (दायीं तरफ)

“एक दिन मेरी पत्नी ने मुझे नारियल का खोल कम्पोस्ट करने के लिए दिया और मैं सोच में पड़ गया। मुझे नहीं पता था कि इसे कैसे कम्पोस्ट करूँ। नारियल के खोल काफ़ी सख्त होते हैं और इसे डीकम्पोज होने में बहुत वक्त लगता है। इसलिए मैंने इस बारे में रिसर्च की तो मुझे पता चला कि नारियल के खोल अगर डीकम्पोज न हो तो, बहुत से बीमारी फैलाने वाले मच्छर-मक्खियों का घर बन जाते हैं। हम में से बहुत से लोगों को नहीं पता कि इसके चलते स्वास्थ्य के लिए डेंगू जैसा बहुत बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है,” मनीष ने बताया।

मनीष ने इन खोल को फिर से इस्तेमाल करने के तरीके ढूँढने शुरू किए। उनका पहला आईडिया खोल को पौधे लगाने के लिए इस्तेमाल करना था। इस खोल को नीचे से हल्का काटकर, उसमें पानी जाने के लिए एक छेद बनाना और फिर इसमें मिट्टी भरकर पौधे लगाना। इस तरह से यह बहुत ही आसान और प्राकृतिक तरीका है पौधों के लिए गमले तैयार करने का।

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यह आईडिया मुंबई के कई कॉर्पोरेट ने अपनाया। फिर नारियल के खोल के और क्या इस्तेमाल हो सकते हैं, इस पर विचार-विमर्श करने के दौरान आईडिया मिला इनसे घर बनाने का। मनीष ने अपने इस आईडिया को जयनील को बताया, जो कि सस्टेनेबल होम में विश्वास करते हैं।

यह उन दोनों के आईडिया और मेहनत का ही नतीजा था कि नारियल के खोल से कम लागत वाले इको-फ्रेंडली घरों का कॉन्सेप्ट निकल कर आया।

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इन दोनों ने इस नारियल के घर का प्रोटोटाइप बनाने के लिए सोमैया कॉलेज के 20 छात्रों को अपने साथ जोड़ा। इन छात्रों ने वेस्ट में फेंके हुए नारियल के खोल को इकट्ठा किया और फिर 18 दिन तक उन्हें सूखाया। इसके बाद उन्होंने इससे घर बनाना शुरू किया। फ्रेम बनाने के लिए उन्होंने वेस्ट मेटल और लकड़ी का उपयोग किया। इन खोल को आधा काटा गया ताकि इनसे दीवार बन सके और फिर मिट्टी, नारियल और बांस के मिश्रण को जोड़ के लिए इस्तेमाल करके, एक साथ लगाया गया। घर की दीवारों का बाहरी हिस्सा, वर्टीकल गार्डन के लिए भी उपयोगी है।

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जयनील बताते हैं कि उन्होंने इस नारियल के घर में एयर कैविटी के सिद्धांत का इस्तेमाल किया है। नारियल के खोल में प्राकृतिक तौर पर कैविटी होती है और इसलिए जब इसे घर की दीवार और छत बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा तो घर का तापमान खुद-ब-खुद ही कम रहेगा। इससे तापमान 4-5 डिग्री तक कम हो जाता है। ऐसे में खोल से दीवार और छत बनाने के बाद किसी तरह के AC और कूलर की भी ज़रूरत नहीं होगी, जो कि बहुत पानी और उर्जा लेते हैं।

इस प्रोटोटाइप को बनाने में सिर्फ़ 10 हज़ार रुपए का खर्च आया और यह बहुत ही कम लागत का हाउसिंग आईडिया है।

ग्रीन एप्पल अवॉर्ड में जयनील त्रिवेदी

मनीष और जयनील के इस आईडिया को बहुत-सी जगह सराहा गया है। इंटरनेशनल ग्रीन एप्पल अवॉर्ड्स में उन्हें ब्रॉन्ज़ मेडल मिला। यह अवॉर्ड दुनिया की सबसे बेहतर पर्यावरण पहल को दिया जाता है।

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नारियल के घर के अलावा भी, यह टीम नारियल को इस्तेमाल करने के और भी कई बेहतर और क्रिएटिव तरीकों पर काम कर रही है। इनमें एक है नारियल को मल्चिंग के लिए इस्तेमाल करना, इससे खेती के लिए पानी और उर्वरक की खपत को काफी कम किया जा सकता है।

आप मनीष से संपर्क करने के लिए manish.advani@mahindrassg.com पर और जयनील से संपर्क करने के लिए jayneeltrivedi@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं!

संपादन: भगवती लाल तेली 
मूल लेख: रंजिनी शिवास्वामी 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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