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संघर्ष से जीत तक : वर्ल्ड पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाली मानसी जोशी की कहानी!

भारत की पैरा-बैडमिंटन प्लेयर मानसी जोशी ने अपने करियर की पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर देश का नाम ऊँचा किया है। 24 अगस्त 2019 को इस चैंपियनशिप का फाइनल था और इसमें उनके सामने तीन बार वर्ल्ड चैंपियन रह चुकीं पारुल परमार थीं।

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक, मानसी इससे पहले पारुल से कई टूर्नामेंट्स में हार चुकी थीं और इस वजह से किसी को उम्मीद नहीं थी कि वे चैंपियनशिप जीत पाएंगी। पर 21-12 और 21-7 के स्कोर से मानसी ने पारुल को मात दी।

पर इस वर्ल्ड चैंपियन का यहाँ तक का सफ़र बिल्कुल भी आसान नहीं था। साल 2011 में एक सड़क दुर्घटना में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया। लेकिन उन्होंने ज़िंदगी से हार नहीं मानी और आज अपनी मेहनत और जज़्बे के दम पर एक नई पहचान हासिल की है।

मानसी जोशी

अपने सफ़र के बारे में उन्होंने Humans of Bomaby को बताया, जो कि आप यहाँ नीचे पोस्ट में पढ़ सकते हैं!

“उस वक्त मैं अपने टू-व्हीलर से अपने ऑफिस जा रही थी, जब एक ट्रक ने मुझे टक्कर मारी और मेरे पाँव को बुरी तरह कुचल दिया। इसमें ड्राईवर की गलती नहीं थी – वहां एक पिलर था जिस से वह आगे देख नहीं पाया। वहां मौजूद लोगो ने मुझे फ़ौरन अस्पताल पहुँचाया जहाँ मेरा ऑपरेशन 5:30 बजे किया गया जबकि यह दुर्घटना लगभग 9:30 बजे हुई थी। डॉक्टर ने मेरे पाँव को बचाने की पूरी कोशिश की पर कुछ दिनों बाद ही उसमे इन्फेक्शन हो गया और उसे काटना पड़ा। जब डॉक्टर ने मुझे बताया तब मैंने उनसे कहा, “आपने इतनी देर लगायी ही क्यों। मुझे पहले से पता था की ये होना है।”

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इस पूरी परीक्षा से निकलने में जिस चीज़ ने मेरी मदद की वह थी – स्वीकृति- कि यह मेरी नियती है, और अब यह मुझे चुनना है कि इस पर रोऊँ, या इसे एक चुनौती की तरह स्वीकार करके आगे बढूँ। मैंने दूसरा विकल्प चुना। जब लोग मुझे मिलने अस्पताल आते थे और मेरी हालत देखकर रोने लगते थे, तब मैं ही उन्हें कोई चुटकुला सुना कर हंसाया करती थी!

फिर मैंने फिजियोथेरेपी ली, और एक बार फिर से चलना सीखा। मेरा सबसे बड़ा डर था कि मैं बैडमिंटन नहीं खेल पाऊँगी जो बचपन से मेरा शौक रहा है – पर पता नहीं कैसे मैं उस समय भी खेल पा रही थी, जब मुझे चलने में भी कठिनाई हो रही थी। मैंने कॉर्पोरेट बैडमिंटन टूर्नामेंट जीतना शुरू किया और अपने एक दोस्त की सलाह पर नेशनल लेवेल पर खेला। मैंने नेशनल स्तर पर कई पदक जीते और इस साल इंग्लैंड में हुए पैरा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप मे रजत पदक जीता। मैं दिन में 5 घंटे की ट्रेनिंग लेती हूँ, अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के जॉब में रहते हुए, स्कूबा डाइविंग में ट्रेनिंग लगभग पूरी कर चुकी हूँ और लगभग पूरा भारत घूम चुकी हूँ। जब लोग मुझसे पूछते हैं, ” आप इतना कुछ कैसे कर लेती हैं?” मैं उनसे बस एक सवाल करती हूँ —–
“आपको किस बात ने रोका हुआ है?”

“I was on my way to work on a two wheeler one day when a trucked rammed into me and completely crushed my leg. It wasn’t…

Humans of Bombay ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಡಿಸೆಂಬರ್ 9, 2015


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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