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चार स्कूली बच्चो की मदद से पकड़ा गया अंतर्राष्ट्रीय देह व्यापार से जुड़ा एक गिरोह!

चार स्कूली बच्चो की मदद से पकड़ा गया अंतर्राष्ट्रीय देह व्यापार से जुड़ा एक गिरोह!

9 जून को दार्जिलिंग के चार स्कूली बच्चो ने मिलकर एक अंतर्राष्ट्रीय देह व्यापार से जुड़े आरोपियों को पकडवाने में पुलिस की मदद की।

ये बच्चे, स्टूडेंट्स अगेन्स्ट ट्रैफिकिंग क्लब (SATC) की सदस्या हैं। इन्होंने दार्जीलिंग के एक स्वयं सेवी संस्था, ‘मैनकाइंड इन एक्शन फॉर रूरल ग्रोथ’ (MARG) की मदद से इन आरोपियों को पकड़वाया।

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Image source: MARG’s Facebook Page

मामले का कथित मुख्य आरोपी,  गगन वर्मा डीएलएफ फेस-2, गुडगाँव (गुरु ग्राम) का रहने वाला है। वो लड़कियों के जाली दस्तावेज बनवाकर उन्हें इस घिनौने बाजार में उतार देता था। दार्जीलिंग पुलिस ने हरियाणा पुलिस की मदद से वर्मा को उसके घर से गिरफ्तार किया। वर्मा के एक दूसरे साथी सुन्नी तमांग को नेपाल-बंगाल बॉर्डर पर पकड़ लिया गया।

आरोपियों को पकडवाने की योजना तब बनायी गयी, जब इस NGO को नेपाल से एक 15 साल की लड़की के गुम होने की खबर मिली। इन्होंने उस लड़की को सोशल मीडिया पर ढूंडा और उससे चैटिंग करना शुरू किया। उस लड़की को इन्होंने बताया कि उन्हें नौकरी की जरूरत है। लड़की ने SATC की इन मेंबर्स का अपनी एक दोस्त से परिचय कराया जिसने इन्हें 15 हजार की तनख्वाह पर डांस बार में काम करने का ऑफर दिया।

इनसे पासपोर्ट साइज फोटो मांगे गए और 20 मिनट के अंदर ही इन्हें नकली आधार कार्ड के साथ अपॉइंटमेंट लेटर भी भेज दिया गया।

इसके बाद गिरोह को पकड़वाने के लिए एक तरीका सोचा गया। उन्होंने गैंग के एक सदस्य को भारत-नेपाल बॉर्डर के पास पानी टंकी पर, ये कहकर बुलाया कि वो उसके साथ दिल्ली भाग जाएंगे।

8 जून को उगन शेरिंग भूटिया और श्रिजन राय छात्रों को लेने पानी टंकी पहुँचे। उन्हें वहीं गिरफ्तार कर लिया गया। गिरोह की ही एक लड़की, प्रणिता मुखिया, इन SATC सदस्यों को लेने राजधानी एक्सप्रेस से न्यू जलपाईगुड़ी आ रही थी। 9 जून को उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस और MARG NGO ने इन बच्चो की तारीफ की और धन्यवाद दिया। ये बच्चे आठवी, नौवी और दसवी में पढ़ते है।

इन बच्चो के साहस को हमारा सलाम !

मूल लेख मंदार पंधारे द्वारा लिखित।

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आकाँक्षा शर्मा

आकाँक्षा शर्मा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। लिखने का इतना शौक रखती है कि लिखने का बस बहाना चाहिए। किताबों से गहरी दोस्ती है। आकाँक्षा अपनी पढ़ाई के दौरान जी मीडियाके साथ भी काम कर चुकी है।
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