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ईंट-सीमेंट पर खर्च किये बिना, हज़ारों किलो स्टील रीसायकल कर, कुछ ऐसे बनाया इस परिवार ने अपना घर!

यह परिवार शहर के आलीशान इलाके कफे परेड में रह रहा था, लेकिन इन्हें ऐसी जीवनशैली की तलाश थी जो साफ हवा, पानी और शुद्ध भोजन दे सके।

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ऑरेंज हाउस, अलीबाग।

लोकल ट्रेन में लोगों की भीड़ और घर से बाहर फेंका जाने वाला कई टन भर कूड़ा! ‘सपनों का शहर- मुंबई’ का स्वरूप आज कुछ ऐसा ही हो चला है।

प्रदूषण का बढ़ता स्तर, पानी की किल्लत, कभी न खत्म होने वाले जाम, तपती गर्मी और शहर को रोक देने वाली बारिश! इस वजह से शायद हर मुंबईकर एक न एक बार इस शहर से निकलने का ज़रूर सोचता है। परदीवाला परिवार भी इससे अलग नहीं था, उन्होंने भी ऐसा ही सोचा।

हालांकि यह परिवार शहर के आलीशान इलाके कफे परेड में रह रहा था, लेकिन इन्हें ऐसी जीवनशैली की तलाश थी जो साफ हवा, पानी और शुद्ध भोजन दे सके।

ऐसे में उन्होंने शहर से 90 किमी दूर अलीबाग में अपनी एक एकड़ ज़मीन पर आरामदायक, सुंदर और सबसे ज्यादा जरुरी पर्यावरण अनुकूल ‘वेकेशन हाउस’ बनाने का फैसला किया।

घर के दो सबसे छोटे सदस्यों मिशल व मिखाइल ने इस काम को अपने हाथ में लिया।

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मिशल और मिखाइल।

 

पर्यावरण में उनकी रुचि तब जगी जब 2016 में उन्होंने अपनी नौकरी को छोड़ “ट्री वेयर“ नाम की कंपनी खोली, जो पर्यावरण अनुकूल सामान बनाती है।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए मिशल बताते हैं, ”अलीबाग में एक इको फ्रेंडली घर बनाने का विचार  हमारे मन में तभी से था, जब यह कंपनी शुरू हुई थी और आखिरकार, 2018 में, हमने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया।”

‘वेकेशन हाउस’ बनाने के लिए वे एक खास चीज़ की तलाश में थे जो पर्यावरण के अनुकूल हो। वे घर के निर्माण के लिए मलबे का विकल्प देख रहे थे। उनके पास इसके लिए और विकल्प भी थे, लेकिन उन्होंने शिपिंग कंटेनर का चुनाव किया। उन्होंने पनवेल यार्ड से 6 शिपिंग कंटेनर खरीदें। हर कंटेनर की लम्बाई 40 फीट और चौड़ाई 8 फीट थी। सभी शिपिंग कंटेनर को हाइड्रो क्रेन की मदद से अलीबाग पहुँचाया गया।

मिशल कहते हैं, ”अन्य रीसाइकल की हुई या पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों की तुलना में, शिपिंग कंटेनर अधिक टिकाऊ व मज़बूत होते हैं। जब भी एक कंटेनर को रीसाइकल किया जाता है, हजारों किलो स्टील का पुनःउपयोग होता है। सबसे अच्छी बात यह है कि कंटेनर का प्रयोग करने से ईंट व सीमेंट जैसी अन्य निर्माण सामग्रियों की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे कार्बन फुटप्रिंट कम हो जाता है।”

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ऑरेंज हाउस, अलीबाग।

मलबे का विकल्प मिल जाने के बाद उन्होंने आर्किटेक्ट से संपर्क किया और शिपिंग कंटेनर से इको फ्रैंडली ”वेकेशन हाउस” बनवाने का काम दे दिया। वेकेशन हाउस में तीन बेडरूम, 1500 वर्ग फीट की छत और बीचो-बीच एक आँगन बनाया गया। अलीबाग में लाल मिट्टी और आम के बगीचे होने के चलते इस घर का नाम ‘ऑरेंज बॉक्स’ रखा गया। ‘ऑरेंज बॉक्स’ में खेलकूद के लिए पर्याप्त जगह होने के साथ ही बड़ा खुला आँगन भी है, जो बारिश के पानी को संरक्षित करने के काम आता है।

‘ऑरेंज बॉक्स’ जहाँ पर बना है वहां पानी की कमी है, इसलिए यहाँ बारिश का पानी आँगन में स्थित छोटे तालाब में जमा किया जाएगा। इसके अलावा तालाब से कुछ पानी ग्राउंड वॉटर के लिए पास के बोरवेल में भी भेजने की योजना है।

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अन्दर से ऐसा दिखता है ऑरेंज हाउस।

मिशल इस घर में एक-दो महीने बिताकर देखेंगे कि मौसम का बदलाव घर के बाहर व अंदर के वातावरण को किस प्रकार प्रभावित कर रहा है। इनका विचार इसे एक ऐसी जगह के रूप में विकसित करना है, जहां लोग आ कर छुट्टियाँ मना सके। साथ ही वे लोगों के लिए योग, पौधारोपण आदि के लिए वर्कशॉप करने की भी योजना बना रहे हैं।

मूल लेख : गोपी

संपादन – भगवती लाल तेली


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Written by निधि निहार दत्ता

निधि निहार दत्ता राँची के एक कोचिंग सेंटर, 'स्टडी लाइन' की संचालिका रह चुकी है. हिन्दी साहित्य मे उनकी ख़ास रूचि रही है. एक बेहतरीन लेखिका होने के साथ साथ वे एक कुशल गृहिणी भी है तथा पाक कला मे भी परिपक्व है.

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