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1978 से दिल्ली में ‘फ्री ऑटो एम्बुलेंस’ चला रहे हैं 76 साल के हरजिन्दर!

कहानी 76 साल के उस ओल्डमैन की जिसने सैकड़ों घायलों को नई जिंदगी दी है !

हरजिन्दर सिंह।

”मैं नहीं चाहता कि मैं किसी असहाय के पास खड़ा होकर उसे मरते हुए देखूं।”

यह शब्द उस शख्स के हैं जिनकी उम्र जवाब दे चुकी है लेकिन हिम्मत और असहाय घायलों की मदद करने का जो जुनून उनमें है वह उन्हें जवान बनाए हुए है। इनका नाम हरजिन्दर सिंह है और पेशे से वे ऑटो रिक्शा ड्राइवर है। पढ़ने में भले ही यह आपको एक सामान्य ऑटो रिक्शा ड्राइवर का परिचय लगे लेकिन ऐसा नहीं है। दिल्ली की सड़कों पर यह जो काम कर रहे हैं वह कई लोगों को नई जिंदगी दिला रहा है।

जिस उम्र में एक आम इंसान आराम करना चाहता है। मेहनत और दौड़ती जिंदगी से परे सुकून से घर पर बैठना चाहता है। उस उम्र में हरजिन्दर दिल्ली की सड़कों पर फ्री ऑटो एम्बुलेंस सेवा देकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं। हरजिन्दर की उम्र 76 वर्ष है और वह पुरानी दिल्ली में रहते हैं। हरजिन्दर का ऑटो रिक्शा भले ही छोटा हो और बड़ी एम्बुलेंस की तरह रफ्तार नहीं पकड़ता हो लेकिन उनकी मदद की ललक में वह दम है जो किसी असहाय के लिए भगवान से कम नहीं। उनके ऑटो एम्बुलेंस में वह लगभग सभी जरूरी साधन उपलब्ध है जिससे किसी भी घायल का प्राथमिक उपचार किया जा सकता है।

 

ऑटो रिक्शा में रखते हैं प्राथमिक उपचार का सामान

सिंह ड्राइव पर जाने से पहले ऑटो रिक्शा में फर्स्ट-एड किट को पूरी तरह देख लेते हैं। जिसमें बैंडेज, एंटीसेप्टिक लोशन, बर्न के लिए क्रीम आदि आपातकालीन मेडिसिन शामिल होती है। अगर इनमें से कोई भी सामान कम या फिर ख़त्म होती है, तो सिंह नई खरीदकर फर्स्ट-एड किट को पूरा कर ही ड्राइव पर निकलते हैं। सिंह की नजर में नायक की एक खास पहचान है।

वह नायक को परिभाषित करते हुए कहते हैं, “मेरे लिए एक नायक वह है जो नेक कार्य करता है, बहादुरी का काम करता है या मानवता की उत्कृष्ट सेवा करता है। मैं दिल्ली पुलिस के लिए एक ट्रैफिक वार्डन रहा हूँ और ऑटोरिक्शा यूनियन का महासचिव भी। 1964 में एक ऑटोरिक्शा चालक के रूप में मैंने करियर शुरू किया था। तब से मुझे ड्राइविंग करते हुए 55 साल से अधिक समय हो गया, लेकिन एक बार भी मेरा चालान नहीं काटा गया या फिर कभी ट्रैफिक पुलिस के द्वारा रोका गया। यह मेरे लिए गर्व की बात है। मैंने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और आम जनता के बीच एक सेतु का काम किया। तब एक ऑटोरिक्शा चालक के लिए ट्रैफिक वार्डन नाम होना बड़ी बात थी।

 

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अपने फ्री ऑटो एम्बुलेंस के साथ हरजिन्दर सिंह।

 

दिल्ली में आई बाढ़ से ​शुरू हुआ यह सफर

सिंह का ऑटो रिक्शा एम्बुलेंस का सफर 1978 में आई बाढ़ से शुरू होता है। सिंह ने उन लोगों की मदद की। इस बात को भले ही 41 साल हो गए हो। सिंह उस समय बेशक जवान रहे होंगे लेकिन सेवा का उनका यह जज्बा 76 साल के पड़ाव पर भी आकर कम नहीं हुआ। सिंह अब भी उसी जोश के साथ कहते हैं कि यह सेवा का काम वे आखिरी सांस तक करेंगे।

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“मुझे वो दौर याद है जब दिल्ली में बाढ़ आई थी। मैंने मेरे समुदाय के साथ मिलकर लोगों की सेवा की थी। मैं जहां पर भी जाकर मदद कर सकता था मैंने की। बाढ़ खत्म हो गई लेकिन सेवा का जो काम मैंने शुरू किया वह आज भी जारी है और जब तक सांस चल रही है तब तक जारी रखूंगा। मैंने लोगों की सेवा के लिए उसी दौरान मुफ्त ऑटो एम्बुलेंस सेवा शुरू की। अब मैं जब भी सड़क पर किसी घायल व्यक्ति को देखता हूँ, तो उसे पास के अस्पताल पहुंचाने में लग जाता हूँ ताकि उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वह उन लोगों की संख्या बता सकते हैं जिनकी उन्होंने इन वर्षों से मदद की है। इस पर सिंह का जवाब होता है कि बहुत घायलों को उन्होंने अस्पताल पहुंचाया हैं लेकिन कभी इसकी कोई गिनती नहीं रखी। जैसे ही मैंने अपना अगला सवाल पूूछना चाहा, तो उन्होंने जल्दी से मुझसे पूछा कि क्या हम बाद में बात कर सकते हैं क्योंकि उन्हें अभी एक एम्बुलेंस सर्विस के लिए कॉल आया है। कॉल आना आम भी था क्योंकि उन्होंने अपने ऑटो रिक्शा के पीछे उनके मोबाइल नम्बर लिखवा रखे थे और कई लोगों के पास उनके नम्बर सेव थे। पूरी दिल्ली में मदद पहुंचाने को लेकर सिंह कहते हैं कि मैं हर जगह नहीं हो सकता लेकिन जितना संभव हो उतनी मदद करने की पूरी कोशिश करूंगा।

 

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फ्री ऑटो एम्बुलेंस सेवा के बारे में बताते हुए हर​जिन्दर।

काम करने से मिलती है खुशी

उनकी उम्र को देखते हुए उनके परिवार वाले उन्हें घर पर रहकर आराम करने का आग्रह करते हैं। लेकिन सिंह का कहना है कि लोगों की मदद करके उन्हें खुशी मिलती है और वह लगातार यह काम करना चाहते हैं।

“मैं जितना अधिक काम करता हूँ, मुझे उतनी ही अधिक खुशी होती है। मैं किसी पर निर्भर नहीं होना चाहता और न ही बोझ बनना चाहता हूँ। ”

असमर्थ घायलों को देते हैं खुद के पैसों से दवाईयां

हरजिन्दर न सिर्फ घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं बल्कि जरूरत पड़ने पर उनको दवाईयां भी उपलब्ध कराते हैं। वे ऑटो से जो भी कमाई करते हैं उनमें से कुछ राशि घर पर रखते हैं बाकी आार्थिक रूप से असमर्थ रोगियों के लिए दवाईयां खरीदने में खर्च कर देते हैं। हरजिन्दर रोगियों का नाम, मोबाइल नम्बर और पता ले लेते हैं और जब भी वे रोगियोंं के क्षेत्र में होते हैं उन्हें मुफ्त दवाईयां दे​ते हैं।

यदि आप भी हरजिन्दर सिंह से बात करना चाहते हैं या किसी तरह से सिंह तक पहुँचना चाहते हैं, तो आप उन्हें + 91-8750697110 पर कॉल करके ऐसा कर सकते हैं।


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Written by भरत

उदयपुर, राजस्थान से हूँ। गजल, शायरियां, लप्रेक कहानियां लिखने व पढ़ने का शौक है, जिसे आप मेरे ब्लॉग pagalbetu.blogspot.com / yourquote.in/bharatborana पर पढ़ सकते हैं। पहाड़, झील, शांत सड़कें, चाय अच्छी लगती है। घूमना व बतियाना पसंद है। कभी-कभी यूं ही बेवजह उदास हो जाता हूँ, बाकी जिंदगी अच्छी कट रही है।

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