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छुट्टियों में महंगे होटल्स नहींं, आदिवासियोंं के साथ जीवन अनुभव कराती है यह ट्रैवल कंपनी!

मारिया ने ‘मेक ईट हैप्पन’ को हॉबी ट्रैवल क्लब के रूप में शुरू किया था। इसे शुरू करने के पीछे उनका उद्देश्य छुट्टियों के प्रति लोगों का नज़रिया बदलना था।

यूं  तो तमिलनाडू के नीलगिरि को लोग ख़ूबसूरत पहाड़ों, जंगलों और चाय बागानों के लिए जानते हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को यह पहाड़ी इलाका इसकी प्राकृतिक ख़ूबसूरती से खूब आकर्षित करता है, लेकिन इससे अलग वहाँ एक ऐसी आबादी भी बसती है जो चकाचौंध से परे वहाँ की मूल आदिवासी संस्कृति को सहेजे हुए हैं। यह आबादी अपनी संस्कृति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के अलावा नीलगिरि को सांस्कृतिक पहचान भी दिला रही है। हम बात कर रहे हैं नीलगिरि की दो जनजातियों टोडा और कुरुम्बास की।


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नीलगिरि के घने जंगलों में बसने वाले इस समुदाय तक पहुंचना आसान नहीं है। कुछ लोग पहुुंच भी जाते हैं तो इस समुदाय के लोग उनके साथ पूरी तरह घुल-मिल नहीं पाते हैं और पर्यटक भी इनकी संस्कृति को महसूस नहीं कर पाते हैं। इसके चलते इस समुदाय की सभ्यता, संस्कृति और पहचान खुलकर लोगों के सामने नहीं आ पाती है। ऐसे में यहाँ घूमने-फिरने की मशहूर जगहों के अलावा, यहाँ की सभ्यता और संस्कृति से भी पर्यटकों को रू-ब-रू कराने की ज़िम्मेदारी उठाई है एक टूरिज्म कंपनी, “मेक ईट हैप्पन” ने।

नीलगिरी में पर्यटकों की मेहमाननवाज़ी

आरामदायक होटल्स से परे यहाँ मिलेगा सुकून

कम्पनी की फाउंडर मारिया विक्टर ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए बताया कि नीलगिरी जैसी जगहों पर ऐसे पर्यटकों के लिए बहुत कुछ है, जो खूबसूरत नजारों और आरामदायक होटल्स से आगे कुछ देखना चाहते हैं। यह ट्रैवल कंपनी उन लोगों के लिए बहुत ख़ास है, जो इस तरह के टूरिस्ट प्लेस पर सिर्फ़ बाहरी मौज-मस्ती के लिए नहीं जाते। ये लोग इन जगहों की रूह को तलाशते हैं। इन जगहों पर जाकर, वापस आते हुए आप अपने साथ सिर्फ़ तस्वीरें नहीं, बल्कि कभी न भूले जाने वाले अनुभव लेकर लौटते हैं।

मारिया बताती हैं,

“हमारी ज़्यादातर यात्राओं का बुनियादी विषय सस्टेनेबल लिविंग को बढ़ावा देना और हमारे पर्यटकों को अत्यधिक उपभोक्तावाद के चलते हो रहे बुरे प्रभाव के प्रति जागरूक करना है, जिससे कि वे एक ऑर्गेनिक लाइफस्टाइल अपनाएं। हमारी सबसे बड़ी कोशिश यही रहती है कि हमारे मेहमान किसी भी जगह पर वहाँ के स्थानीय लोगों की जीवनशैली को अनुभव करें। इसके अलावा हम उनमें एक-दूसरे की सभ्यता और संस्कृति के प्रति समझ और सम्मान की भावना जागृत करने का भी प्रयास करते हैं।”

 

कम्पनी कराती है समुदाय से रू-ब-रू

टोडा समुदाय की महिलाएँ

मेक ईट हैप्पन के जरिये जो भी लोग नीलगिरि घूमने जाते हैं उन्हें कम्पनी इन दो समुदायों की सभ्यता और संस्कृति को करीब से जानने का अवसर देती है। कम्पनी की बदौलत पर्यटकों को इन समुदायों के साथ समय बिताने का मौका मिलता है, जिससे पर्यटक उनकी जीवनशैली को अच्छे से समझ पाते हैं।

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सभी पर्यटकों को कुरुम्बास जनजाति के महान कलाकारों के वंशजों में से एक ख़ास कलाकार से भी मिलवाया जाता है। ये कलाकार अंदर घने जंगलों में रहते हैं। समुदाय के लोग पर्यटकों के लिए वर्कशॉप करते हैं और उन्हें जंगल से एकत्र की गई सामग्री से बने पेंट-ब्रश से पेंटिंग करना भी सिखाते हैं। ऐसा करने पर जहाँ पर्यटकों को खुशी और नया अनुभव मिलता है, वहीं आदिवासी समुदाय भी खुद को गौरवान्वित महसूस करता है।


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समुदाय को देते हैं विशेष ट्रेनिंग

मारिया और उनकी टीम इन स्थानीय समुदायों के लोगों के लिए समय-समय पर ट्रेनिंग सेशन करती हैं, जिससे इन लोगों को सबके सामने अपने गुर, संस्कृति और इतिहास को बेहतर तरीके से दिखाने में मदद मिल सके। मारिया महसूस करती है कि बहुत बार सब बातें पता होते हुए भी ये लोग पर्यटकों के सामने खुलकर अपने विचार नहीं रख पाते हैं। ऐसे में ट्रेनिंग सेशन करने से इन लोगों का आत्मविश्वास बढ़ता है और यह पर्यटकों को खुलकर अपनी बात बता पाते हैं। मारिया कहती है कि इन लोगों के लिए इससे रोजगार के साधन भी बढ़े हैं।

 

छुट्टी का नज़रिया बदलने के लिए शुरू की थी कम्पनी

पेंटिंग वर्कशॉप भी होती है यहाँ

मारिया ने ‘मेक ईट हैप्पन’ को हॉबी ट्रैवल क्लब के रूप में शुरू किया था। इसे शुरू करने के पीछे उनका उद्देश्य छुट्टियों के प्रति लोगों का नज़रिया बदलना था। वह कहती हैं,

“यह आपकी ऐसी दुनिया से पहचान करवाता है जिससे आप बिल्कुल अंजान थे। इन छुट्टियों में हमारे मेहमानों और स्थानीय लोगों के बीच काफ़ी बातचीत और विचारों का आदान-प्रदान होता है। जितना भी हमने देखा है अगर उस अनुभव से कहूँ तो इस तरह की यात्राएं इन पर्यटकों को स्थानीय लोगों को जानने-समझने का मौका देती हैं और साथ ही, इन स्थानीय लोगों के लिए भी एक मौका होता है अपनी कला, सभ्यता और संस्कृति दुनिया को दिखाने का।”

 

2011 में शुरू हुई थी कम्पनी

मेक ईट हैप्पन 2011 में शुरू हुई। इसके तीन साल बाद 2014 में मारिया ने अपनी कॉर्पोरेट जॉब छोड़ दी और खुद को पूरी तरह से अपने इस स्टार्टअप में लगा दिया। 2017 में उनकी कंपनी औपचारिक तौर पर शुरू हो गई। कुछ समय बाद उनके पति मुरली शंकरन ने भी उन्हें ज्वाइन कर लिया और आज उनकी टीम में 6 लोग हैं। साथ ही देश में अलग-अलग जगह 25 होस्ट हैं, जो उनके ज़रिये आने वाले पर्यटकों को यह ख़ास तरह की ट्रिप करवाते हैं।

नीलगिरि की इस यात्रा को ‘मिस्टिकल नीलगिरी ट्रेल’ कहा जाता है। यहाँ घूमने आने वाले लोगों की संख्या अब बढ़ने लगी है। सस्टेनेबल ट्रेवलिंग के जवाब में मारिया कहती है कि जिस भी समुदाय में आप जा रहे हैं, वहाँ के लोगों को आर्थिक लाभ हो। बेशक, इस तरह की ट्रिप्स से पर्यटक अपने साथ बहुत कुछ वापस लेकर जाते हैं, लेकिन इससे मेजबान समुदाय को भी फायदा मिलना चाहिए।

आईये इस पहल से जुड़कर छुट्टियों की एक नई परिभाषा बनायें!

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संपादन: भगवती लाल तेली


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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