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यह जर्नलिस्ट, डोमेस्टिक वर्कर्स को सिखा रही हैं सेल्फ डिफेंस; अपने खर्चे पर दिलवाती हैं ट्रेनिंग!

ओपन स्पेस में महीने में दो बार लगती है क्लासेज, सीखती हैं आत्मसुरक्षा

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काम करने वाली महिलाओं को निशुल्क सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग दिलवाती है सिल्वी कालरा ।

मारे देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाये जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं के साथ आए दिन छेड़खानी, लूटपाट और यौन शोषण जैसी घटनाओं की ख़बरें उभर कर आती हैं। इससे देश की राजधानी दिल्ली भी अछूती नहीं है। दिल्ली में महिलाओं की ऐसी ही दिक्कतों को एक लड़की ने समझा और इसके लिए अच्छा कदम उठाया है।

जर्नलिस्ट और कम्यूनिकेशन प्रोफेशनल सिल्वी कालरा ने महिला डोमेस्टिक वर्कर्स के लिए सेल्फ डिफेंस की क्लासेस शुरू की है। इसके लिए उन्होंने ट्रेनर्स रखे हैं और उनकी फीस भी स्वयं ही देती है। इसके अलावा इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए सिल्वी ने ‘फाइटहर’ नाम से एनजीओ भी शुरू किया है ताकि वह ज्यादा लोगों की मदद कर सके और इस मुहिम को गांवों तक भी ले जाया जा सके।

 

डोमे​स्टिक वर्कर्स की सुनी परेशानी, आया आईडिया

सिल्वी के इस मुहिम की शुरूआत दो डोमेस्टिक वर्कर्स की आपस में हुई बातों से शुरू होती है।

सिल्वी बताती हैं, एक दिन मैं अपने ऑफिस से घर लौट रही थी, तब दो डोमेस्टिक वर्कर्स को बात करते सुना कि  सात बजे के बाद घर लौटना उनके लिए कितना असुरक्षित हो जाता है। ये बात तो मैंने खुद महसूस की थी जब ऑफिस से रात में घर लौटना होता था। ऑफिस की कैब के बावजूद अकेले कैब में डर महसूस होता था। मुझे लगा कि ऐसे में इन डोमेस्टिक वर्कर्स पर क्या बीतती होगी? इसलिए मैंने इन्हें फ्री में सेल्फ डिफेंस क्लास देने का फैसला किया।

सिल्वी को खुद कई बार बैग स्नैचिंग का भी सामना करना पड़ा था, इसलिए उन्हें लगता है कि सेल्फ डिफेंस अपनी सुरक्षा के लिए पहला और बेहतर माध्यम है और इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। सिल्वी ने सोचा कि क्यों न इन डोमेस्टिक वर्कर्स को फ्री में सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग सिखाई जाए ताकि वह भी अपनी सुरक्षा खुद करने में सक्षम हो सके।

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ट्रेनर के साथ सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग करती सिल्वी

फाइटहर में 50 महिलाओं ने ली क्लास

फाइटहर से अब तक करीब 50 महिलाएं सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग ले चुकी हैं। इसके लिए महीने में दो बार दिल्ली के पश्चिम विहार में ओपन स्पेस, कम्यूनिटी पार्क आदि जगहों क्लास लगती हैं जहां डोमेस्टिक वर्कर्स व उनकी बेटियां सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग के लिए पहुंचती हैं। यहां प्रोफेशनल ट्रेनर के द्वारा सेल्फ डिफेंस की छोटी-छोटी तकनीकों को सिखाया जाता है। डोमेस्टिक वर्कर्स के ​अलावा यहां स्टूडेंट्स भी ट्रेनिंग के लिए पहुंचती हैं। ऐसी ही एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट वंशिका भी यहां से ट्रेनिंग ले रही है। वंशिका का कहना है कि लड़कियों को सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। बुनियादी चीजों की तरह सेल्फ डिफेंस भी सीखना जरूरी है। ऐसे ही डोमेस्टिक वर्कर्स भी इसे जरूरी मानती हैं।

‘‘आज मैंने सेल्फ डिफेंस सीखा है। पहली बार है, अच्छा लग रहा है। मैंने यहां तीन मूव सीखे हैं और आगे भी सीखते रहना चाहती हूं।’’ – रेखा, झारखंड की रहने वाली 22 साल की डोमेस्टिक वर्कर

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फाइटहर की क्लासेज में ट्रेनिंग लेते हुए।

 

ओपन स्पेस में क्लासेज लगाने को लेकर सिल्वी का कहना है कि ”मैंने ओपन में इन क्लासेस को इसलिए शुरू किया ताकि ज्यादा लोग हमारी क्लासेस को देखें। इससे प्रेरणा लें और इस पहल से जुड़ें। मैं सेल्फ डिफेंस की जागरुकता को ग्रामीण इलाकों तक ले जाना चाहती हूं। जैसे-जैसे ‘फाइटहर’ में हमारा फंड बढ़ेगा वैसे-वैसे इस पर और काम करेंगे। अभी तो मैं अपनी सेविंग्स से ही पैसे लगाती हूं और कुछ दोस्त है जो मेरी इस काम में मदद कर देते हैं।”

 

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सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग लेती डोमेस्टिक वर्कर।

 

सेल्फ डिफेंस जरूरी, लेनी चाहिए ट्रेनिंग

क्लासेज पर ट्रेनिंग देने वाले अनुज महिलाओं के लिए सेल्फ डिफेंस सबसे बड़ा हथियार मानते हैं। उनका मानना है कि अगर लड़कियों, महिलाओं ने सेल्फ डिफेंस सीख लिया तो वे अपनी सुरक्षा स्वयं करने में सक्षम हो जाएंगी। ऐसे ही मार्शल आर्ट एक्सपर्ट सनी का कहना है कि महिलाओं को उनके प्र​ति बढ़ते क्राइम को रोकने के लिए आगे आना चाहिए। इसके लिए महिलाओं को सेल्फ ​डिफेंस जरूर सीखना चाहिए ताकि वह अपनी सुरक्षा खुद कर सके। क्लासेज के लिए आने वाली महिलाएं भी ऐसा ही कुछ कहती हैं। उनका कहना है कि ट्रेनिंग से आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अब अपनी सुरक्षा खुद करने में सक्षम होने लगी हैं।

‘‘मैं सेल्फ डिफेंस सीखने आई हूं। सर अच्छे से सिखा रहे हैं। हमें एक-एक चीज बताई है कि कैसे अपने आप को बचाना है। ये बहुत अच्छी चीज है और हम लड़कियों को ये सीखनी चाहिए।’’
– 9वीं क्लास में पढ़ने वाली बबीता, डोमेस्टिक वर्कर की बेटी

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फाइटहर की क्लासेज में आत्मरक्षा के गुर सीखते हुए।

सिल्वी के मुताबिक, सब कुछ शासन व्यवस्था पर नहीं छोड़ा जा सकता है, क्योंकि अपना बचाव अपने आप से भी काफी हद तक संभव होता है। इसलिए इस तरह की छोटी-छोटी कोशिशों से महिलाओं की बहुत हद तक परेशानियां कम होंगी और वह आत्मनिर्भर बन सकेंगी। आर्थिक रूप से सम्पन्न लोग सेल्फ डिफेंस की क्लासेस पैसे देकर भी ले लेते हैं लेकिन ‘फाइटहर’ से उन काम करने वाली महिलाओं को फायदा पहुंच रहा है जिनकी तनख्वाह ही सेल्फ डिफेंस की क्लासेस जितनी होती है।

आप भी अगर सिल्वी को उनकी सेल्फ डिफेंस की मुहिम ‘फाइटहर’ में उनका साथ देना चाहते हैं तो नीचे दिए फेसबुक पेज पर जाकर उनसे संपर्क कर सकते हैं, उन्हें डोनेट कर सकते हैं।

https://www.facebook.com/FightHerforwomen/

Account: FIGHTHER 

Bank: Axis Bank

Account number: 919020020492880

IFS Code: UTIB0000096

 

संपादन – भगवती लाल तेली


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