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बाढ़ में डूबा बिहार, पानी में तैरकर, कीचड़ में उतरकर मदद पहुंचा रहे हैं ये युवा!

चन्दे के पैसों और भिक्षा में सामान मांग कर बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचा रहे मदद

बिहार में बाढ़ का कहर अब भी जारी है। बाढ़ के चलते राज्य में तकरीबन 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं। करीब सौ से भी ज्यादा लोग इस जलप्रहार में अपनी जान गवां चुके हैं, तो हजारों लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ से लाखों हेक्टेयर खेतिहर जमीन भी डूबकर बर्बाद हो चुकी है। बिहार में बाढ़ से तबाही का आलम यह है कि बिहार की तमाम नदियों से बाढ़ का पानी कई गांवों में फैल चुका है। इस संकट में लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, उनका घर बह गया है, जान-माल की भी अथाह क्षति हुई है। विस्थापितों को भोजन, पानी, मेडिकल रिलीफ पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार चाहकर भी सब तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में कई सामाजिक संंस्थाएं और नागरिक समूह उनके राहत-बचाव के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसा ही एक समूह है मिथिला स्टूडेंट यूनियन।

नाम से भले ही यह कोई छात्रों का राजनैतिक संगठन लगे लेकिन ऐसा नहीं है। बिहार बाढ़ में यह यूनियन जिस तरह लोगों की मदद कर रहा है वह वाकई सराहनीय है। यूनियन के वॉलेंटियर्स खुद की जान जोखिम में डालकर लोगों तक मदद पहुंचा रहे हैं। पीली टीशर्ट पहने और ‘सेनानी’ कहलाने वाले यह वॉलेंटियर्स हमेशा की तरह मिथिला में इस बार भी उम्मीद बनकर उभरे हैं। ये युवा उफान पर चढ़ी नदियों के बीच तैरकर, अपनी पीठों पर राहत सामग्री के बोरे लादकर, कीचड़ के बीच मोटरसाइकिल चलाकर, स्वयं भोजन बनाकर फूड पैकेट तैयार कर पीड़ितों तक पहुंचा रहे हैं।

 

14 टीमों के 300 कार्यकर्ता लगे मदद में

कंधे तक पानी में चलकर राहत सामग्री ले जाते वॉलंटियर

मिथिला स्टूडेंट यूनियन के जनरल सेक्रेटरी आदित्य मोहन ने द बेटर इंडिया को बताया, “बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 300 युवाओं की 14 टीमें बनाई गई हैं। यह सभी टीमें आसपास के जिलों के बाढ़ प्रभावित गांवों तक पहुंचकर पीड़ितों को भोजन, पानी, मेडिकल सपोर्ट उपलब्ध करवा रहे हैं।”

आदित्य मोहन बताते हैं कि उनकी टीम ने विस्थापितों को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए कई जगहों पर बेस कैंप भी लगाया है, जहां भोजन बनाकर सुदूर गांवों तक भी वॉलेंटियर्स पहुंचा रहे हैं।

भोजन तैयार करते वॉलंटियर

“कुछ जगहों पर गांवों के लोग भी हमारे साथ मिलकर लोगों की मदद के लिए पहुंच रहे हैं। साथ ही टीम ने मेडिकल कैंप भी लगाना शुरू कर दिया है, जहां पर प्रभावित लोगों को मेडिकल सुविधा भी दी जा रही है,” आदित्य बताते हैं।

 

चन्दा मांगकर पहुंचा रहे मदद

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राहत सामग्री बांटता एक युवक

आदित्य मोहन के अनुसार मदद का यह काम चन्दे से किया जा रहा है। टीम भिक्षा के रूप में खाने का सामान भी लोगों से मांंग कर पीड़ितों तक पहुंचा रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया से भी मदद मांगकर राहत अभियान के आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। टीम में अधिकतर युवा विद्यार्थी है और गरीब परिवार से आते हैं। ऐसे में टीम को मदद के लिए आर्थिक समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है लेकिन टीम के युवा इस नेक काम के लिए लगे हुए हैं। लोगों से आर्थिक मदद की गुहार कर पीड़ितों की मदद में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं।

 

यह है मिथिला स्टूडेंट यूनियन

नाव से गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने की कवायद

मिथिला स्टूडेंट यूनियन मिथिला क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों से कार्यरत है। इनका कार्यक्षेत्र समाज सेवा व छात्र हितों के लिए काम करना है। यूनियन के पास बड़ी संख्या में एक्टिव वॉलेंटियर्स हैं। इससे पूर्व यह टीम 2017 में आई बाढ़ में भी लोगों की मदद कर चुकी है। इसके अलावा मुजफ्फरपुर के चमकी-बुखार की मेडिकल आपदा के वक्त भी इनके टीम के करीब 100 युवाओं ने आसपास के गांवों में मेडिकल कैम्प, जागरूकता, भोजन-दवाई के माध्यम से राहत पहुंचाने का काम किया था। टीम चन्दे से मिली राशि, सामग्री का हिसाब सार्वजनिक करती है जिससे क्षेत्र के लोगों को टीम और उसके कार्यों पर भरोसा है और लोग मदद भी करते हैं।

 

इन जिलों में स्थिति भयावह

कंधे तक पानी में चलकर राहत सामग्री ले जाते वॉलंटियर

बारिश और बाढ़ के चलते बिहार के 12 जिलों में स्थिति भयावह है। इनमें शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर सहरसा और कटिहार शामिल है।

 

आप भी कर सकते हैं मदद

आप भी अगर बाढ़ग्रस्त पीड़ितों की दशा देखकर व्यथित हैं और उनके लिए मदद भेजना चाहते हैं तो यहां पर सहयोग राशि भेजें।

Mithila Student Union
AXIS BANK
A/c No. -915010024010672
IFSC-UTIB0001924
Branch- Paharganj, New Delhi

Paytm No.- 7065796392

 

संपादन – भगवती लाल तेली 


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