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बैंक पीओ टिप्स: दिन में केवल 4 घंटे पढ़ाई कर पहले ही अटेम्प्ट में पास की परीक्षा; आज बैंक में हैं डिप्टी मैनेजर!

‘हिम्मत और हौसला है तो सब मुमकिन है’ इस बात पर यकीन रखने वाले विकी ने हमें विस्तार से बताया कि इस परीक्षा की तैयारी उन्होंने कैसे की थी और पहले ही अटेम्प्ट में इसे पास करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।

“असफलताओं से हारकर बैठने की बजाय, उन्हें अपने सीखने का ज़रिया बना लें। खुद को ही खुद की प्रेरणा बनायें। अगर आप खुद पर विश्वास रखेंगे, तो कोई भी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता है।” – विकी खियानी

मूल रूप से उत्तर- प्रदेश में झाँसी के रहने वाले विकी खियानी एक व्यवसायी परिवार से हैं। पर उन्हें कभी भी बिज़नेस में दिलचस्पी नहीं रही। इसलिए उन्होंने बारहवीं के बाद सी.ए की पढ़ाई शुरू कर दी और साथ ही, डिस्टेंस कोर्स से बीकॉम में भी एडमिशन ले लिया।

विकी ने बिना किसी रूकावट के सी. ए. फाइनल तक अपनी पढ़ाई कर ली थी। सिर्फ़ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि कोर्स की सभी ट्रेनिंग और आर्टिकलशिप भी पूरी हो चुकी थी। पर फिर कुछ निजी कारणों के चलते उनकी पढ़ाई काफ़ी प्रभावित हुई और वे सी. ए. फाइनल की परीक्षा पास नहीं कर पाए।

विकी खियानी

पर इस एक असफलता ने विकी के इरादे नहीं तोड़े। कुछ समय बाद वे फिर परीक्षा में बैठे लेकिन इस बार वे पास नहीं हो पाए। अपनी मेहनत और काबिलियत पर विश्वास रखने वाले विकी ने एक बार फिर कोशिश की पर नाकामयाब रहें। इस पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मई 2015 में एक बार फिर इस परीक्षा में बैठे। पर तीसरी बार भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वे पास नहीं हो पाए।

पर विकी ने हार नहीं मानी क्योंकि अपनी पढ़ाई और जो भी अनुभव उन्हें अपनी ट्रेनिंग से मिला था, वे उसे जाया नहीं जाने देना चाहते थे। उनके परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया और उन्हें कभी भी कमजोर नहीं पड़ने दिया।

“मैं बहुत परेशान था। और यही सोचता था कि क्या करूँ। मैंने डिस्टेंस बीकॉम, एमकॉम भी किया था। बहुत सोच कर मैंने बैंकिंग सेक्टर में जाने का फ़ैसला किया क्योंकि अपनी ट्रेनिंग के दौरान भी बैंकिंग से संबंधित जो भी काम होता था, उसमें मुझे काफ़ी मज़ा आता था। और इसलिए मैंने बैंक पीओ के एग्जाम देने का फ़ैसला किया,” विकी ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए बताया।

जुलाई 2015 से विकी ने अपने इस नए सपने को साकार करने की तैयारी शुरू कर दी और 2016 में उन्होंने SBI PO की परीक्षा पास कर ली। यह विकी की लगन ही थी कि सिर्फ दो साल में  ही उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर प्रमोशन भी हासिल कर ली।

आज विकी मध्य-प्रदेश के सागर जिले की ब्रांच में बतौर डिप्टी मैनेजर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। ‘हिम्मत और हौसला है तो सब मुमकिन है’ इस बात पर यकीन रखने वाले विकी ने हमें विस्तार से बताया कि इस परीक्षा की तैयारी उन्होंने कैसे की थी और पहले ही अटेम्प्ट में इसे पास करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।

1. बेसिक सिलेबस जानें!

बैंक पीओ के प्रीलिम्स में रीज़निंग एबिलिटी, इंग्लिश, और क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड (मैथ्स) विषयों से सवाल आते हैं।

विकी ने बताया कि मेंस का सिलेबस थोड़ा सा बढ़ जाता है। मेंस में क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड एंड रीजनिंग एबिलिटी, इंग्लिश, जनरल अवेयरनेस (जिसमें करंट अफेयर्स, बैंकिंग और सामान्य ज्ञान/GK शामिल है) विषयों से प्रश्न पूछे जाते हैं।

इन अलग-अलग विषयों के सिलेबस विस्तार से देखने के लिए यहाँ क्लिक करें!

2. इस तरह शुरू करें तैयारी!

अक्सर जब भी हम किसी कॉम्पेटीटीव परीक्षा में भाग लेने का निर्णय लेते हैं, तो सबसे बड़ी समस्या होती है कि आख़िर तैयारी कैसे और कहाँ से शुरू करें। इस बारे में विकी ने बात करते हुए कहा कि आज इंटरनेट के ज़माने में सभी स्टडी मटेरियल आपको एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाता है। पर फिर भी सिस्टमेटिक तरीके से पढ़ाई करने के लिए आपको मार्गदर्शन की ज़रूरत होती है। ऑनलाइन मेंटर मिलना भी काफ़ी आसान है पर फिर आपको एक लोकल मेंटर ढूँढना चाहिए, जिसके साथ आमने-सामने बैठकर आप अपने सभी सवालों के जवाब पा सकें।

कम से कम शुरुआत के कुछ महीने आपको लगातार अपने मेंटर के साथ बैठकर उनसे अपनी पढ़ाई के लिए विचार-विमर्श करने चाहिए। इससे आपके मन में जो भी सवाल आते हैं वो तुरंत हल होते हैं क्योंकि आप उनके सामने बैठकर उनसे बात कर रहे हैं। वर्चुअल स्पेस में यह लिंक कहीं न कहीं कम हो जाता है। इसलिए शुरुआत में आप किसी मेंटर से मार्गदर्शन लें।

एक बार जब आपका रूटीन बन जाये और आपको सिलेबस, किताबें, टेस्ट सीरीज आदि के बारे में सभी बातें समझ में आ जाएँ, उसके बाद बेशक आप सेल्फ-स्टडी और ऑनलाइन स्टडी पर निर्भर हो सकते हैं।

पढ़ने के सही तरीके पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि ज़रूरी है कि सभी विषयों पर आपके बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर हों। चाहे विषय बहुत आसान हो या बहुत मुश्किल, पर आपको उस विषय का बेसिक कॉन्सेप्ट समझ में आना चाहिए। तभी आपकी मेहनत सही दिशा में जाती है। इसलिए सबसे पहले आप अपने बेसिक्स पर काम कीजिये, फिर किसी प्रैक्टिस या टेस्ट सीरीज पर फोकस करें।

3, अनुशासन और टाइम-मैनेजमेंट है बहुत ज़रूरी!

ये तो हम सभी जानते हैं कि जो लोग समय की कीमत को समझते हुए और अनुशासन में रहकर काम करते हैं, वे यकीनन सफल होते हैं। विकी बताते हैं कि उन्होंने झाँसी में अपने घर पर रहते हुए ही तैयारी की। झाँसी में ही उन्होंने एक स्थानीय मेंटर का मर्गदर्शन लिया। फिर भी घर पर रहकर पढ़ने का रूटीन बनाना बहुत मुश्किल होता है।

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आलस और चीज़ों को दूसरे दिन पर टालने की आदत किसी के लिए नई नहीं है। पर अगर आपको अपने लक्ष्य को पाना है तो आपको समझना होगा कि कभी दिन में 8-10 घंटे पढ़ना, कभी जी किया तो चार दिन का ब्रेक ले लेना या फिर किसी दिन कुछ घंटे पढ़ लेना – इस रूटीन से परीक्षा पास करने की संभावना ना के बराबर हो जाती है। इसलिए पढ़ाई में स्थिरता बहुत ज़रूरी है।

“मैं दिन में चार घंटे ही पढ़ता था पर ये चार घंटे बिना किसी ब्रेक के मैं हर रोज़ पूरी ईमानदारी से अपनी पढ़ाई के लिए देता था। कभी किसी वजह से एक दिन की पढ़ाई छूटती तो मैं दूसरे दिन आठ घंटे पढ़कर वह सिलेबस कवर करता। यह मुझे ही समझना था कि अगर एक दिन मैंने कोर्स को पीछे किया तो इसमें मेरा ही नुकसान है क्योंकि उस दिन मैं एक्स्ट्रा प्रैक्टिस कर सकता हूँ अपना कोर्स पूरा करके,” विकी ने कहा।

4. नियमित प्रैक्टिस, ऑनलाइन एप्स और मॉक टेस्ट सीरीज से लें मदद

किसी भी परीक्षा की तैयारी के दौरान अपने सबसे कमजोर विषय को समझना बहुत ज़रूरी है। जिस विषय में आप बहुत अच्छे हैं उसे तो लगातार प्रैक्टिस कीजिये ही। पर साथ ही जिस विषय में आप कमजोर है उसे थोड़ा ठीक-ठाक (एवरेज) करने की कोशिश करें। क्योंकि आप सिर्फ़ एक विषय के दम पर परीक्षा में नहीं बैठ सकते हैं।

इसी संदर्भ में उन्होंने बताया, “मैं क्विज़ और पजल सोल्व करने में बहुत ही स्लो था। और इस तरह के एग्जाम में आपकी सवाल को हल करने की स्पीड आपका परिणाम तय करती है। बहुत बार आप किसी एक सवाल में फंसकर रह जाते हैं और फिर बाकी जो कुछ आपको आता है वह भी छुट जाता है। इसलिए अपनी स्पीड पर काम करें और यह सिर्फ़ लगातार प्रैक्टिस से होता है। मुझे कभी एक पजल सोल्व करने में एक घंटा लगता था पर फिर एक वक़्त आया कि सिर्फ़ 5 मिनट में क्विज और पजल सोल्व कर लेता था।”

इसके अलावा जब आप अपने कोर्स को पूरा पढ़ लें और आपको लगे कि अब आपकी विषयों पर पकड़ है तो मॉक टेस्ट शुरू करें।  सिर्फ़ मॉक टेस्ट देना ही काफी नहीं है, बल्कि अपने टेस्ट का विश्लेषण भी करना उतना ही ज़रूरी है।

“मैं जब भी एक घंटे का टेस्ट देता था, तो टेस्ट के बाद दो घंटे बैठकर उसे एनालाइज़ करता था। किस सवाल में मैंने कितना एक्स्ट्रा टाइम लिया, मेरे कितने सवाल ठीक हैं, कितनी छोटी-छोटी गलतियाँ हुईं हैं जो जरा सा ध्यान देता तो नहीं होती और फिर ऐसे कितने और कौनसे प्रश्न थे जो मुझे नहीं आते थे। ”

इन सब बातों का विश्लेषण करने से आपको अपनी तैयारी की खामियां पता चलती है। इसलिए हर रोज़ यह प्रैक्टिस करें और फिर अपनी कमियों पर काम करें।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि उन्हें ‘बैंकर्स अड्डा, ‘अड्डा 247‘ और ऑलिव बोर्ड जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से काफी मदद मिली और करंट अफेयर्स के लिए उन्होंने एक एप्लीकेशन ‘Knappily‘ से मदद ली।

खुद बनें अपनी प्रेरणा

इस तरह के परीक्षा की तैयारी के दौरान स्ट्रेस या निराशा होना बहुत आम है। पर इसे खुद पर बिलकुल हावी न होने दें। विकी बताते हैं कि सी. ए फाइनल पास न कर पाने के चलते वे काफी निराश हो गए थे। लेकिन हार मानना भी कोई विकल्प नहीं था। इसलिए उन्होंने किसी दूसरे में नहीं बल्कि खुद में अपना सहारा ढूंढा।

“एग्जाम की तैयारी के साथ-साथ मैंने वो सब चीज़ें करना भी जारी रखा जिनसे मुझे ख़ुशी मिलती थी। मुझे म्यूजिक में दिलचस्पी थी तो मैंने गिटार क्लास ज्वाइन की। क्योंकि मेरा मानना है कि सिर्फ़ एक परीक्षा पास करने के लिए आप ज़िंदगी जीना नहीं छोड़ सकते। बल्कि आप अपने इस सफ़र को मेहनत करते हुए एन्जॉय कीजिये। इससे आप खुश भी रहेंगें और आपका आत्म-विश्वास भी बढ़ेगा,” उन्होंने बताया।

आप जितना अच्छा और सकारातमक नज़रिया जीवन के लिए रखते हैं, आपका जीवन उतना ही खूबसूरत हो जाता है। सकारात्मक सोच आगे बढ़ने में बहुत मददगार होती है।

विकी का मानना है कि आपका परिणाम आपकी पॉजिटिव सोच पर बहुत निर्भर करता है।

 

मेंस क्लियर करने के बाद भी आपको नहीं पता कि इंटरव्यू में आपसे क्या पूछा जायेगा। इसलिए आप सिर्फ़ यही कर सकते हैं कि पूरे जोश और सकारात्मक रवैये के साथ इंटरव्यू में बैठें और बिना किसी हिचक के सभी जवाब दें। अगर आपको किसी सवाल का जवाब ना भी आता हो, तो टाल-मटोल करने की बजाय विनम्रता से कहें कि आपको नहीं पता है।

विकी बताते हैं कि जब फाइनल लिस्ट आई तो उन्हें बिल्कुल भी यकीन ही नहीं हुआ कि वे सेलेक्ट हो गये हैं। बैंकिंग सेक्टर में जाने की चाह रखने वाले प्रतिभागियों के लिए विकी सिर्फ़ इतना ही कहते हैं कि किसी और की सुनने की बजाय आप अपनी स्ट्रेटेजी खुद बनायें और पूरे दिल से मेहनत करें। पर सबसे ज़रूरी है कि आप खुश रहें क्योंकि अगर आप खुश रहेंगे तो और अच्छे से अपनी पढ़ाई पर फोकस कर पायेंगें। इसलिए खुद को प्रोत्साहित करते रहें, अपने लिए और उन अपनों के लिए जो हर समय आपके साथ खड़े रहते हैं।

संपादन – मानबी कटोच


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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