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सरपंच ने गाँववालों से लगवाए 5 लाख पौधे, अब गाँव की हर बेटी के नाम है लाखों की एफडी!

इस गाँव में जन्म लेने वाली हर कन्या के नाम पर उसके परिजनों और ग्रामीणों द्वारा 111 पौधे लगाए जाते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि अब तक 93,000 से अधिक पौधे पेड़ बन चुके हैं।

‘पिपलांत्री’ – राजस्थान के राजसमंद जिले में बसा यह गाँव पिछले एक दशक से ग्लोबल मीडिया में छाया हुआ है। यहाँ हुए कुछ खास कामों की वजह से Piplantri को Google पर रोज़ सर्च किया जाता है। इस गाँव में जन्म लेने वाली हर कन्या के नाम पर उसके परिजनों और ग्रामीणों द्वारा 111 पौधे लगाए जाते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि अब तक 93,000 से अधिक पौधे पेड़ बन चुके हैं।

इस अनूठी मुहिम के सूत्रधार और 2005 से 2010 तक गाँव के सरपंच रहे श्यामसुंदर पालीवाल ‛द बेटर इंडिया’ को बताते हैं, मेरी जवान बेटी किरण का असामयिक निधन हो गया, जिसके चलते मैं सदमे में चला गया। कुछ ग्रामीणों ने उठावने के दिन बेटी की स्मृति में कुछ पौधे मेरे हाथ से लगवाए। यही वह लम्हा था, जिसने मुझे गाँव की बेटियों के लिए कुछ करने को प्रेरित किया।”

पिपलांत्री में स्थापित अपनी बेटी किरण की मूर्ती के साथ श्यामसुंदर पालीवाल

 

इसी दौरान पालीवाल ने यह भी गौर किया कि समाज में दहेज की कुप्रथा के चलते बेटियों को पराया धन समझा जाता है। आम ग्रामीण दहेज देकर भी दहेज दानवों की बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर पाते। कन्या वध और कन्या भ्रूण हत्या का मूल कारण भी इसी आर्थिक समस्या में छुपा था।

इन आर्थिक कष्टों को दूर करने के लिए पालीवाल ने सोचा कि यदि नवजात कन्या के माता-पिता, बच्ची के जन्म पर ही पौधारोपण करके उन पौधों का 18 से 20 साल तक पालन-पोषण कर लें, तो कन्या के विवाह के समय पर्याप्त धन जुटाया जा सकता है।

पालीवाल बताते हैं, पिछले कुछ दशकों से लगातार गिरते लिंगानुपात को देखकर सभी चिंतित हैं। कठोर कानूनी प्रावधान होने के बावजूद भी, कन्या शिशु एवं कन्या भ्रूण हत्या रोकने में अब तक खास कामयाबी नहीं मिली। कहने का मतलब यह है कि बेटियों की रक्षा के लिए सिर्फ कागजी प्रावधानों से काम नहीं चलने वाला। धरातल पर भी कुछ उपाय अपनाने होंगे।

शुरुआत में पालीवाल के सामने इस योजना के क्रियान्वयन में कुछ अड़चनें आईं, लेकिन वे एक सरपंच के रूप में कई सरकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन पिपलांत्री गाँव में कर चुके थे। ‘पंचायत आपके द्वार’ जैसे कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने ढाणी-ढाणी जाकर नारी-शक्ति को जागरूक किया।  कन्या-सुरक्षा की दृष्टि से इस योजना को अनूठा माना गया था। उनकी ऐसी ही कई पहलों के चलते ग्राम पंचायत को कई पुरस्कारों सहित राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों निर्मल ग्राम सम्मान भी मिल चुका था। साथ ही इस गाँव को ‘आदर्श ग्राम’, ‘निर्मल गाँव’ और ‘पर्यटन ग्राम’ का भी ख़िताब मिला हुआ है।

इसलिए गाँव वालों में पालीवाल की इस योजना को लेकर भी उत्साह था।  और समूचे गाँव ने उनकी इस पहल को साकार करने में उनका साथ दिया। 

 

2006-07 में शुरू हुई इस पहल को पालीवाल जी की बेटी को समर्पित करते हुए गाँव वालों ने ‛किरण निधि योजना’ का नाम दिया और 30 जुलाई, 2011 को इसकी विधिवत शुरुआत करवाई गई।

श्यामसुंदर पालीवाल कहते हैं, ‘‘हमारा प्रयास है कि हमारे गाँव की बेटियाँ इतनी स्वावलम्बी हों कि माता-पिता उन्हें बोझ नहीं समझें। सालों तक नियमित रूप से ग्राम पंचायत की सांख्यिकी को समझते हुए मैंने यह पाया कि वर्ष में औसतन सवा सौ शिशु जन्म लेते हैं। हमने अनुमान के आधार पर समझा कि इनमें 60 बेटियों का जन्म होता है। हम गाँव में जन्म लेने वाली प्रत्येक बेटी के नाम पर 31,000 रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट करवाते हैं। बेटी के माता-पिता से 10,000 रुपए की मदद ली जाती है, ताकि उनका आर्थिक जुड़ाव भी बना रहे।”

शायद यही वजह है कि जहाँ देशभर में विभिन्न सामाजिक कुरीतियों के चलते आज भी लोग कन्या भ्रूण हत्या जैसी विडंबना को झेल रहे हैं, वहीं पिपलांत्री में इसका सटीक और पर्यावरण से जुड़ा निराकरण खोज लिया गया है। अब बेटी के माता-पिता को बेटी के भविष्य की चिंता की कोई जरूरत नहीं होती। बेटी की जिम्मेदारियों का खर्च उठाने के लिए अब यहाँ बेशुमार पेड़ पनप रहे हैं।

 

2006 से गाँव में जन्म लेने वाली हर बेटी के नाम पर पौधे लगाए जा रहे हैं। अब तक हुए वृक्षारोपण में 93,000 से ज्यादा पौधे पेड़ बन चुके हैं।

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पिपलांत्री गाँव का नज़ारा

कन्या के जन्म की खुशी में माता पिता, दादा-दादी, नाना-नानी एवं रिश्तेदारों द्वारा 111 पौधे गाँव की सरकारी भूमि पर लगाए जाते हैं। पौधों की सुरक्षा का जिम्मा पूरे गाँववासियों का है। महिला स्वयं सहायता समूह, बुजुर्ग माताएं, बुआ-दादी वगैरह समय-समय पर इन पौधों की निराई-गुड़ाई करती  हैं। समय के साथ बड़ी होती बालिका को यह बोध कराया जाता है कि ये पौधे उसी के हमउम्र हैं, उसी के जन्म की यादगार हैं। इस योजना को देश सहित विदेशों में  खूब सराहना मिली है।

ग्राम पंचायत स्तर पर चल रही इस अनूठी योजना में समय की मांग अनुसार कई विशेषताएं भी शामिल कर ली गई हैं, ताकि कन्या को घर-परिवार और विद्यालय में समुचित विकास का अवसर मिले। ग्राम पंचायत कन्या के जन्म पर ग्राम पंचायत में रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) के पास सूचना दर्ज करवाती है। इसी के साथ जननी सुरक्षा योजना एवं सरकारी योजना में अन्य लाभकारी बॉन्ड भरवाने के लिए समुचित औपचारिकता भी पूरी की जाती है।

गाँव के पूर्व सरपंच और वर्तमान में जलग्रहण कमेटी के अध्यक्ष पालीवाल बताते हैं, “राजसमंद जिला मार्बल की बहुत बड़ी मंडी के रूप में दुनियाभर में विख्यात है। यहाँ की एक स्थानीय मार्बल कंपनी आरके मार्बल ने 2001 में विश्व में सबसे ज्यादा 1,059, 540.143 टन मार्बल ब्लॉक खनन के लिए गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है। ग्रामीण यहाँ के स्थानीय व्यापारियों, दानदाताओं और भामाशाहों से अनुरोध कर 21,000 की राशि और जुटाते हैं। कुल रकम की एफडी बेटी के नाम पर 18 से 20 साल के लिए करवा दी जाती है। ग्राम पंचायत इसका भी पूरा लेखा-जोखा रखती है।

18 से 20 वर्षों बाद उस फिक्स्ड डिपॉजिट से मिले लाखों रुपए की राशि से गाँव की बेटियों की उच्च शिक्षा, शादी-ब्याह में बड़ी मदद मिलेगी। इतना ही नहीं, बेटी के जन्म पर लगाए गए इन पौधों के पेड़ बन जाने पर एक पेड़ की अनुमानित कीमत एक लाख रुपए भी आंक लें तो 111 वृक्षों की कीमत एक करोड़ ग्यारह लाख रुपए होगी। एक करोड़ ग्यारह लाख रुपए भी न मानें, मात्र 25 लाख रुपए ही मान लें, फिर भी उन वृक्षों से मिली ऑक्सीजन, वृक्षों की जड़ों द्वारा रोकी गई मिट्टी की कीमत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। एक पेड़ अपनी जड़ों में सालभर का पानी सोखकर रखता है, इस कीमत का अंदाजा लगाना नामुमकिन है।

 

 

इस योजना के अनेक लाभ हैं। गाँव में जन्म लेने वाली बच्ची के नाम एफडी करवाने के बदले उसके माता-पिता से दस रुपए के स्टाम्प पेपर पर एक शपथ पत्र लिया जाता है। इसमें निम्न शर्तें होती हैं…

हमारे परिवार में कोई भी व्यक्ति कन्या भ्रूण हत्या नहीं करेगा।

बेटी के जन्मदिन पर लगाए गए इन 111 पौधों एवं बेटी का पालन-पोषण समान रूप से करेंगे।

अपनी बेटी को शिक्षा से वंचित नहीं रखेंगे।

किसी भी परिस्थिति में अपनी बेटी का बाल विवाह नहीं करेंगे।

बेटी के बालिग होने पर यह एफडी की रकम उसकी उच्च शिक्षा या विवाह में खर्च की जाएगी।

बेटी के जन्म पर लगाए गए पौधे जब वृक्ष बन जाएंगे, तो उन पर गाँव का अधिकार होगा।

‘किरण निधि योजना’ की सफलता से ग्रामवासी बेहद प्रसन्न हैं। गाँव में किसी भी स्त्री को अब अपने गर्भ में पल रहे शिशु के भविष्य की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं रही। इस योजना को देशभर में अपनाए जाने के साथ ही अब दानदाताओं द्वारा भी आगे बढ़कर कामयाब बनाने की जरूरत है, ताकि देश का हर गाँव पिपलांत्री की तरह ‘आदर्श गाँव’ बनकर उभरें और फिर किसी माता-पिता को अपनी ही बेटी बोझ न लगे!

फेसबुक पर पिपलांत्री के पेज से जुड़ें, अथवा श्यामसुंदर पालीवाल से 09680260111 पर संपर्क करें।

 

संपादन – मनोज झा


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Written by मोईनुद्दीन चिश्ती

देशभर के 250 से ज्यादा प्रकाशनों में 6500 से ज्यादा लेख लिख चुके चिश्ती 22 सालों से पत्रकारिता में हैं। 2012 से वे कृषि, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर कलम चला रहे हैं। अब तक उनकी 10 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। पर्यावरण संरक्षण पर लिखी उनकी एक पुस्तक का लोकार्पण संसद भवन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के हाथों हो चुका है।

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