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बैंक पीओ टिप्स: 5 साल की बेटी और घर को संभालते हुए इस गृहिणी ने आख़िरी अटेम्पट में कैसे पाई सफलता!

जब मेरिना का लिस्ट में नाम आया तो उनका यह सफ़र देश की बहुत-सी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया। ख़ासकर उन महिलाओं के लिए, जो अक्सर शादी और बच्चों के बाद अपने सपनों को दर-किनार कर देती हैं।

आंध्र प्रदेश में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की काकीनाड़ा ब्रांच में प्रोबेशनरी ऑफिसर की ट्रेनिंग कर रहीं 30 वर्षीय मेरिना डेविड ने लगभग 4-5 अटेम्पट के बाद, आखिरकार पिछले साल ‘SBI PO 2018’ की परीक्षा पास की। यह उनका आख़िरी अटेम्पट था और उन्हें बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उनका फाइनल लिस्ट में नाम आएगा।

पर जब मेरिना का लिस्ट में नाम आया तो उनका यह सफ़र देश की बहुत-सी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया। ख़ासकर उन महिलाओं के लिए, जो अक्सर शादी और बच्चों के बाद अपने सपनों को दर-किनार कर देती हैं।

 

मूल रूप से विशाखापटनम की निवासी मेरिना ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए बताया कि कैसे एक पत्नी और माँ होने की सभी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए उन्होंने SBI PO 2018 की फाइनल लिस्ट में अपनी जगह बनाई। और किस तरह इस पूरे संघर्ष में उनके पति उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर खड़े रहे।

अपने पति डेविड जॉन के साथ मेरिना

 

केमिकल इंजिनीयर है मरीना पर हमेशा से करना चाहती थीं सरकारी नौकरी 

“साल 2011 में मैंने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कंपनी में नौकरी लेने के बजाय मैंने सरकारी नौकरियों की तैयारी शुरू कर दी। पर मैंने कभी कोई कोचिंग क्लास ज्वाइन नहीं की थी, बस सेल्फ स्टडी ही करती थी,” मेरिना ने बताया।

 

साल 2012 में मरीना की शादी हो गयी और इसके बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। उनके इस नए परिवार ने उनके सपनों को पूरा करने के लिए उनका पूरा साथ दिया। सेल्फ-स्टडी (खुद पढ़कर) के बलबूते पर मेरिना ने उस साल परीक्षा दी और उन्होंने प्री-एग्जाम क्लियर कर लिया पर मेन्स में पीछे रह गयीं।

 

बेटी के जन्म के बाद छूटी पढ़ाई पर कभी नहीं भूली अपना लक्ष्य 

साल 2013 में उनकी बेटी जियेना का जन्म हुआ और उसके जन्म के बाद एक-दो साल तक वे बिल्कुल भी अपनी पढ़ाई पर ध्नयान नहीं दे पायीं।

“उस वक़्त मेरे लिए मेरी प्राथमिकता मेरी बेटी थी। उसके अलावा मुझे और कुछ दिखाई ही नहीं देता था। हाँ, पर मैंने कभी भी ये नहीं सोचा कि अब क्या नौकरी और एग्जाम? मेरे मन में कहीं न कहीं तो हमेशा यह बात रहती थी कि फिर से एग्जाम देना ही है। और इस बात के लिए सबसे ज़्यादा मुझे मेरे पति का साथ मिला।”

 

2016 में जब जियेना ने प्ले स्कूल जाना शुरू किया, तो मेरिना ने अपनी पढ़ाई का रूटीन बनाया और फिर से टेस्ट के लिए पढ़ना शुरू कर दिया। अपनी तैयारी के लिए मेरिना ऑनलाइन स्टडी और न्यूज़पेपर रीडिंग पर ही निर्भर थीं। वे बताती हैं कि ढाई-तीन साल की बच्ची के साथ घंटों तक रेग्युलर पढ़ाई करना बिल्कुल भी आसान नहीं था। तो उन्होंने छोटे-छोटे ब्रेक्स को भी इस्तेमाल किया।

 

“जैसे कि अगर जियेना सो रही होती थी तो मैं यूट्यूब पर जल्दी से ट्यूटोरियल वीडियो देख लेती थी। और जितनी देर वह बाहर खेलती, तो वहीं बैठकर मैं अख़बार पढ़ लेती थी। मेरी पूरी तैयारी में मुझे ‘द हिन्दू’ अख़बार से बहुत मदद मिली। एक तो मेरी इंग्लिश काफी सुधरी और साथ ही, एडिटोरियल सेक्शन ने मेरे करंट अफेयर्स को इम्प्रूव किया,” उन्होंने आगे कहा।

 

एक बार फिर हुई नाकाम पर नहीं टूटा हौसला 

मेरिना ने दिन-रात मेहनत की, लेकिन परीक्षा पास करने के लिए यह काफी नहीं था। इस बार भी वे सिर्फ प्री-एलिम्स ही पास कर पायीं। लेकिन मेरिना ने हार नहीं मानी और बिना किसी सोच-विचार के धीरे-धीरे अपनी पढ़ाई में जुटी रहीं।

 

उन्होंने आईबीपीएस पीओ का फॉर्म भी भरा और ऑनलाइन युट्यूब वीडियो, सॉफ्ट स्टडी मटेरियल आदि का सब्सक्रिप्शन ले लिया। साथ ही, मेरिटशाइन फेसबुक ग्रुप को ज्वाइन कर लिया। इस ग्रुप में सभी लोग बैंक एग्जाम की तैयारी करने वाले ही थे। सभी प्रतिभागी ग्रुप में पढ़ाई से संबंधित सॉफ्ट मैटेरियल शेयर करते ही रहते। मेरिना कहती हैं कि उन्हें अपने इन वर्चुअल दोस्तों द्वारा शेयर किये जाने वाले नोट्स से काफ़ी मदद मिली। क्योंकि हर कोई, किसी न किसी निश्चित विषय पर नोट्स शेयर करता और इससे पढ़ना थोड़ा आसान हो जाता था।

 

इस सबके दौरान मेरिना का आत्मविश्वास कई बार कम हुआ, पर अपने माता-पिता, सास-ससुर और सबसे ज़्यादा अपने पति का खुद पर विश्वास देखकर वे लगातार असफलताओं के बाद भी मेहनत करती रहीं। हालाँकि, जब आईबीपीएस पीओ का परिणाम आया तो मेरिना का नाम वेटिंग लिस्ट में था और वे जॉब नहीं ले पायीं।

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“अपना नाम वेटिंग लिस्ट में देखकर मेरा सारा हौसला एक वक़्त पर जवाब दे गया। मैंने तय किया कि बस अब बहुत हो गया नहीं हो रहा है तो न सही। अब मुझे कोई एग्जाम नहीं देना था। पर मेरे पति ने मुझे बिल्कुल भी नहीं टूटने दिया। यहां तक कि शायद वे ही एक शख्स थे जिन्होंने कभी नहीं कहा कि मुझसे नहीं हो रहा है तो मैं छोड़ दूँ यह। बल्कि वे कितने भी थके हुए आए अपने काम से, मेरे साथ घर में मदद करते ताकि मुझे पढ़ने के लिए वक़्त मिले। अगर उनकी छुट्टी होती या फिर वे घर में होते तो बेटी को पूरी तरह वे ही संभालते और मुझे पढ़ाई के लिए मोटीवेट करते,” मेरिना ने बताया।

 

आख़िरी अटेम्पट 

साल 2018 का एग्जाम अटेम्पट मेरिना के लिए आख़िरी था, क्योंकि इसके बाद वे उम्र सीमा के चलते एग्जाम नहीं दे पातीं। इस बार वे अपने लिए नहीं बल्कि अपने पति के विश्वास पर पेपर के लिए बैठीं और उनकी मेहनत रंग लायी। उन्होंने बताया कि उनका परिणाम भी उनके पति ने देखा और जब उन्हें पता चला कि उनका लिस्ट में नाम है तो उनके घर में सबकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। मेरिना को तो इतना सुकून और तसल्ली मिली कि उन्होंने इसके बाद अपनी रैंक तक जानने की कोशिश नहीं की।

 

एक गृहिणी की सारी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए SBI Bank PO एग्जाम के लिए पढ़ना, इतनी बार असफलता के बाद भी धैर्य के साथ आगे बढ़ना और आखिर में अपने लक्ष्य को पाना, यह सब बिल्कुल भी आसान नहीं था। इसलिए द बेटर इंडिया ने मेरिना से उनकी स्ट्रेटेजी और टिप्स जानने की कोशिश की, जिसके चलते उनकी एग्जाम के लिए तैयारी पक्की होती गयी।

 

कैसे की जीत की तैयारी 

उन्होंने बताया कि उनके लिए इंटरनेट सबसे ज़्यादा काम आया। और वे अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट थीं इसलिए उन्होंने भले ही बहुत धीरे-धीरे तैयारी की लेकिन बहुत मजबूती से की। सबसे पहले तो उन्होंने कहा कि Adda247, AffairsCloud जैसे एप्लीकेशन की मदद से उन्होंने अपनी बेसिक फैक्ट्स पर काम करना शुरू किया। यहां वे अलग-अलग विषयों पर ऑनलाइन क्विज़ भी सोल्व करती रहतीं, जिससे उन्हें काफी मदद मिली।

साथ ही, इन एप्स की मदद से उनके करंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज में भी मदद मिली। ऑनलाइन एप्लीकेशन के अलावा उन्होंने यूट्यूब ट्यूटोरिअल्स को भी उम्दा तरीके से इस्तेमाल किया।

“मैंने रेग्युलर तौर पर मेरिटशाइन यूट्यूब चैनल को फॉलो किया। मैं हर एक वीडियो देखते हुए खुद के नोट्स भी बनाती जिससे कि कॉन्सेप्ट याद रखने में मदद मिले।

इन वीडियो में सभी ट्यूटर, क्वांटिटेटिव और रीज़निंग पार्ट को हल करने के लिए काफी आसान और क्रिएटिव तरीके बताते थे। इससे कम समय में सवाल को सही तरीके से हल करने में मदद मिली। इसके अलावा उन्होंने अपनी कॅल्क्युलेट करने की स्पीड और क्षमता को बैलेंस करने के लिए भी ऑनलाइन एप्लीकेशन जैसे कि मैथ्सएप का सहारा लिया।

 

“प्रैक्टिस आपको परफेक्ट बनाती है। इसलिए मैं हर दिन ऑनलाइन क्विज और पज़ल हल करती रहती, जिससे कि मेरी स्पीड भी मैंटेन रहे और मुझे पता चला कि मुझे किस विषय पर अधिक फोकस करना है।”

 

सबसे ज़्यादा उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया कि जो भी नोट्स या फिर पीडीएफ़ मटेरियल वे डाउनलोड कर रहीं हैं, उसे वे अच्छी तरह से पढ़े और समझें, न कि सिर्फ वह उनके लैपटॉप में सेव होकर ही रह जाये। जैसा कि अक्सर बहुत से लोगों के साथ होता है।

आत्म-निरिक्षण बेहद ज़रुरी 

कई बार एग्जाम देने के चलते मेरिना ने यह भी समझने की कोशिश की, कि किस विषय या फिर किस टॉपिक पर वे कमजोर पड़ रही हैं। उनका कहना है कि समय-समय पर हमको आत्म-निरिक्षण करते रहना चाहिए जिससे कि हमें पता चले कि हमें अपने किस पॉइंट पर ज़्यादा काम करना है।

उन्होंने हर रोज़ अख़बार पढ़ना भी अपनी आदत में शामिल किया।

“मुझे यह सलाह एक ऑनलाइन मेंटर से ही मिली कि हमें सिर्फ अपनी कैलक्युलेटिव नहीं बल्कि रीडिंग स्पीड पर भी काम करना चाहिए ताकि प्रश्न पढ़ने में हमारा बहुत ज़्यादा समय न जाये। अगर हमारी रीडिंग स्पीड अच्छी है तो हमें सवाल को समझने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा।”

इसके अलावा पेपर के समय सबसे पहले उन सवालों पर फोकस करें जिन्हें आप एकदम अच्छे से कर सकते हैं। सबसे बड़ी बात कि एग्जाम के दौरान बिल्कुल शांत रहें। घबराने की ज़रूरत नहीं है बल्कि ऐसे सवालों पर अपना वक़्त दें जिनके कॉन्सेप्ट्स आपको क्लियर हैं।

“कम्पटीशन की तैयारी के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप आशावादी रहें और पॉजिटिव रहें। इसके लिए आप यूट्यूब पर बहुत से मोटिवेशनल वीडियो देख सकते हैं। जिन्हें देखकर आपको चिंता और डर से राहत मिलती है और एक अच्छी सोच के साथ आप आगे बढ़ते हैं,” मेरिना ने कहा।

 

इंटरव्यू

इंटरव्यू के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आईबीपीएस पीओ के एग्जाम में जब वे इंटरव्यू के लिए बैठी तो बहुत ही घबराई हुई थी और वहां जब सवाल-जवाब हुए तो उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ गया और शायद यही वजह थी कि उनका नाम फाइनल लिस्ट में नहीं आया। इसलिए जब SBI PO के इंटरव्यू के लिए वे गयी तो उन्होंने पहले ही मन बना लिया था कि इस बार वे डर को खुद पर हावी नहीं होने देंगी। बल्कि अपने जवाबों पर फोकस करेंगी।

 

मेरिना कहती हैं कि कुछ भी नामुमकिन नहीं है बस आपको उसे मुमकिन बनाना आना चाहिए। और आज के जमाने में हार्ड वर्क से भी ज़्यादा स्मार्ट वर्क काम आता है। तो अपनी हर असफलता से कुछ सीखो और आगे बढ़ो।

 

अंत में अपने सन्देश में वे कहती हैं कि शादी के बाद अगर लड़कियां या फिर उनके घरवाले सोचते हैं कि उनका करियर खत्म हो गया है तो ऐसा नहीं है। आप कभी भी कहीं से भी शुरुआत कर सकते हैं। बस याद रखें कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। आपका सफर है तो एक्स्ट्रा मेहनत भी आपको करनी होगी। बाकी बस धैर्य और संयम रखें, आप यकीनन सफल होंगे।


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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