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योग करने में करते हैं आलस तो सुनिए इन 5 योगा-ट्रेनर्स की कहानियाँ!

योग केवल एक्सरसाइज नहीं, जिसे आप वजन घटाने या स्टैमिना बढ़ाने के लिए करें, बल्कि यह एक जीवन शैली है। नियमित तौर पर योग करने से आपकी दिनचर्या अच्छी तो होती ही है, यह आपकी सोचने-समझने की शक्ति, आपके व्यवहार और आपके मूड में भी सकारात्मक बदलाव लाता है। योग करने से मानसिक शांति मिलती है, लेकिन इसे शुरू करना जितना आसान है, जारी रखना उतना ही कठिन।

कुछ लोगों के लिए यह एक तनावपूर्ण दिन के बाद राहत पाने का ज़रिया है तो कुछ के लिए दिन की शुरुआत करने का सबसे अच्छा तरीका। बहुत लोगों के लिए योग एक चुनौती है, एक जज़्बा और अपने आप में एक मक़सद भी है! ऐसे लोग जिन्होंने योग को अपने जीवन का मक़सद बना लिया और इसका प्रशिक्षण देते हैं, अपने सोशल मीडिया चैनल्स और वेबसाइट्स के ज़रिए लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। इन्होंने साबित किया है कि अगर इंसान ठान ले तो कुछ भी कर पाना नामुमकिन नहीं है।

आज हम बताने जा रहे हैं ऐसे ही 5 योग प्रशिक्षकों के बारे में, जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत बाधाओं पर जीत पाकर लाखों लोगों को योग अपनाने के लिए प्रेरित किया।

सम्राट पशम

फोटो साभार: सम्राट पशम 

2016 में सम्राट ने हाइपरथायरायडिज्म और फैटी लिवर की समस्या से परेशान होकर योग को अपनाने का फैसला किया। सम्राट ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए कहा,

“मेरा वजन उस समय 100 किलो से अधिक था और मैं एक कॉरपोरेट ऑफिस में नाइट शिफ्ट में काम कर रहा था। हालाँकि, मैं नियमित रूप से जिम जाता था, लेकिन कहीं न कहीं इससे मेरी शारीरिक परेशानी बढ़ ही रही थी। मैं मोटापे से ग्रस्त था, इसलिए जिम में एक्सरसाइज करने से मेरे घुटनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। मुझे कुछ ऐसे एक्सरसाइज की ज़रूरत थी, जो मेरे लिए भारी नहीं पड़े। तब मैंने योग शुरू किया।”

फैटी लिवर, हाइपरथायरायडिज्म और मोटापे की समस्या से निजात पाने के लिए सम्राट को अपनी जीवन शैली में बदलाव की जरूरत थी, न कि केवल एक्सरसाइज की। योग उनके लिए जीवन शैली में बदलाव की प्रेरणा के रूप में सामने आया और उन्होंने इसे समर्पण और निष्ठा के साथ जारी रखा। एक साल के भीतर ही सम्राट ने न केवल अतिरिक्त वजन घटा लिया, बल्कि एक सर्टिफाइड योग प्रशिक्षक भी बन गए।

आज वे बेंगलुरु में नियमित रूप से ऑनलाइन व ऑफलाइन योग के वर्कशॉप आयोजित करते हैं। सम्राट के इंस्टाग्राम पर 9,400 से अधिक फॉलोअर्स हैं। वे अपनी स्ट्रेचिंग, एक्सरसाइज और योगाभ्यास की तस्वीरों को पोस्ट भी करते हैं। उन्हें फॉलो करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें या उनके यूट्यूब चैनल और उनकी वेबसाइट Yoga with Samrat पर जाएं।

दीपिका मेहता

फोटो साभार : दीपिका मेहता

दीपिका मेहता के इंस्टाग्राम पर 1,95,000 फॉलोअर्स हैं। अगर आपको योग करने के लिए रोज़ किसी गाइड की ज़रूरत पड़ती है, तो आप दीपिका के प्रोफाइल पर ज़रूर जाएं। वे मुंबई में नियमित रूप से योग की कक्षाएं लेती हैं और इंस्टाग्राम पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। कोई भी उनके परफेक्ट पोज़, योग के प्रति निष्ठा और करियर ग्राफ को देख कर यह नहीं कह सकेगा कि 1997 में उन्हें बताया गया था कि वह शायद चल भी नहीं पाएं। एक रॉक-क्लाइम्बिंग सेशन के दौरान दीपिका भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई थीं। दीपिका को इतनी गंभीर चोटें आई थीं कि डॉक्टरों ने कह दिया था कि वह अब शायद ही कभी चल सकेंगी।

लेकिन दीपिका ने हार नहीं मानी और अपनी कोशिशों से डॉक्टरों को गलत साबित कर दिया। जब वे कुछ ठीक हुईं तो उन्होंने योग को अपनाया, जिसका चमत्कारिक परिणाम सामने आया। आज दीपिका योग में महारत हासिल कर ऐसी योग प्रशिक्षक बन चुकी हैं, जिनकी एंटरटेनमेंट व्यवसाय से जुड़े लोगों के बीच सबसे अधिक मांग है।

दीपिका पूरी दुनिया में घूम-घूम कर योग सिखाती हैं। आप भी उनके कार्यक्रमों में जाकर योग सीख सकते हैं। घर पर ही योग सीखने के लिए आप उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को फॉलो कर सकते हैं। उनका इंस्टाग्राम अकाउंट, यूट्यूब चैनल और वेबसाइट देखने के लिए यहां क्लिक करें।

डॉली सिंह

फोटो साभार : Yogaforallmumbai/facebook

योग हर किसी के लिए है। व्यक्ति की उम्र, वजन, स्वास्थ्य और जीवन शैली से योग सीखने और करने में कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता है। डॉली सिंह इसकी एक जीती-जागती मिसाल हैं। उन्होंने इस बात को ग़लत साबित कर दिया है कि योग केवल दुबले लोग ही कर सकते हैं। उनके हर इंस्टाग्राम पोस्ट से इस बात का पता चलता है।

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लगभग आठ साल पहले एक दुर्घटना में डॉली के घुटने में मोच आ गई थी। उन्हें इस बात का डर था कि उनके भारी वज़न (लगभग 90 किलोग्राम) के चलते उनके घुटने पर कहीं और बुरा असर न पड़े। द बेटर इंडिया से बात करते हुए डॉली कहती हैं,

“यह पहली बार था जब मैं सक्रिय हुई। मैंने सब कुछ आजमाया। कई तरह के एक्सरसाइज, एरोबिक्स, ज़ुम्बा और दूसरी चीजों का अभ्यास किया। लेकिन मैं इस सबसे ऊब गयी और दो साल बाद मैंने एक योग क्लास ज्वाइन कर लिया। मैंने यह सोचकर क्लास ज्वाइन नहीं किया कि मुझे वज़न कम करना है। सच पूछा जाए तो मुझे कभी इस बात से फ़र्क नहीं पड़ा कि मेरा शरीर कितना मोटा है। हालाँकि, योग क्लास में मेरे आसपास के लोग मुझे योग करता देख आश्चर्य में पड़ जाते थे।”

आज डॉली उन सभी के लिए एक प्रेरणा हैं, जो मानते हैं कि योग केवल दुबले-पतले लोगों के लिए है। आप उनकी कहानी यहाँ पढ़ सकते हैं या उनका इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज देख सकते हैं।

नताशा नोएल

फोटो साभार : नताशा नोएल

नताशा के बचपन के अनुभव बड़े कड़वे रहे। हालात कुछ ऐसे रहे कि उन्हें गहरे अवसाद का सामना करना पड़ा, बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और हर कठिनाई का मुकाबला किया। आज हज़ारों महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनने तक की उनकी यात्रा बहुत ही प्रेरक है। तीन साल की उम्र में नताशा ने अपनी माँ को आत्महत्या करते देखा। सात साल की उम्र में एक नौकर ने उनके साथ बलात्कार किया। अगले आठ वर्षों में उनके चाचा और चचेरे भाइयों ने उनके साथ छेड़छाड़ की, जिससे नताशा भीतर से टूट गईं और क्लिनिकल डिप्रेशन का शिकार हो गईं।

लेकिन मन को दहला देने वाले इन अनुभवों से ऊपर उठकर नताशा ने नृत्य और योग में शांति पाई। आज नताशा सकारात्मकता, संबंधों की स्वीकृति और अपमानजनक रिश्तों के बारे में विस्तार से बात करती हैं और साथ ही इंस्टाग्राम पर अपने 2,50,000+ ‘समर्थकों’ को प्रेरित करती हैं।

वेरवे मैगज़ीन से बात करते हुए नताशा कहती हैं,

“मैंने मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग करना शुरू किया। योग ने मुझे अपनी असुरक्षा और डर की परवाह किए बगैर खुद को स्वीकार करना और प्यार करना सिखाया। योग आपको वर्तमान में जीना सिखाता है और मुझे इसकी सख़्त ज़रूरत थी, क्योंकि मैं उदास रहती थी। उदास तो मैं हमेशा रहूँगी अपने अतीत को लेकर और अपने डर और चिंता के कारण भविष्य में भी उदास रहूँगी, लेकिन योग से इससे उबरने में बहुत मदद मिलती है।”

नताशा एक प्रभावशाली और प्रेरक व्यक्तित्व हैं। आपको उन्हें ज़रूर फॉलो करना चाहिए। उत्साहजनक और सकारात्मक पोस्ट के लिए उनका इंस्टाग्राम अकाउंट फॉलो करें।

सुवि चौधरी

फोटो साभार : सुवि चौधरी

लगभग एक दशक पहले निष्क्रिय जीवन शैली, एक्सरसाइज नहीं करने और पहले से मौजूद स्कोलियोसिस की स्थिति ने सुवि के स्वास्थ्य को बिगाड़ दिया था। जब वह कम उम्र की थीं, तभी उन्हें स्कोलियोसिस का पता चला था, लेकिन उन्होंने इसके लिए कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं समझी। एक कॉल सेंटर की नौकरी ज्वाइन करने के बाद उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ हुआ।

32 वर्षीय सुवि ने द बेटर इंडिया को बताया,

“डॉक्टर ने कहा कि मुझे तुरंत नौकरी छोड़ देनी चाहिए और एक्सरसाइज करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इसके बिना मेरी हालत में बदलाव नहीं आ सकता था। मैं तब केवल 21 वर्ष की थी और स्लिपडिस्क का शिकार हो चुकी थी। उस समय मेरे पति और मेरे पास बहुत सीमित संसाधन थे और तब मैं मुंबई में महंगी योग क्लासेस नहीं ज्वाइन सकती थी। लेकिन डॉक्टर की सलाह के बाद मैंने नौकरी छोड़ दी और योग क्लास ज्वाइन करने के लिए अपने पीएफ के पैसों का इस्तेमाल किया। पहले सेशन से ही योग मेरे लिए एक सकारात्मक प्रेरणा बन गया।”

योग को नियमित रूप से अपनाने के बाद उनकी काया में बदलाव आया और उनके चेहरे पर चमक दिखाई देने लगी। उनकी एक दोस्त ने उनसे इस बदलाव के रहस्य के बारे में पूछा। सुवि कहती हैं, “उसने मुझे योग सिखाने के लिए कहा और इस तरह मैंने योग की कक्षाएं शुरू की।”

2012 में जब सुवि गर्भवती हुईं तो उन्होंने कुछ समय के लिए योग छोड़ दिया। लेकिन बेटे के जन्म के बाद उन्होंने फिर से योग शुरू किया और इस बार भी अपनी तस्वीरों को ऑनलाइन पोस्ट करना जारी रखा। सुवि कहती हैं,

“जिन लोगों ने कहा कि मैं योग करने के लिए फिट नहीं हूँ, उनके लिए मेरे इंस्टाग्राम पर पॉजिटिव कमेंट्स इस बात के सबूत हैं कि योग सभी के लिए है। मेरा विश्वास है कि योग से स्वास्थ्य समस्याओं पर काबू पाया जा सकता है।”

आप सुवि को इंस्टाग्राम या फेसबुक पर फॉलो कर सकते हैं और हर दिन उनसे कुछ नया और प्रेरणादायक सीख सकते हैं।

लेखिका: सोनाली शर्मा 
मूल लेख: तन्वी पटेल
संपादन – मनोज झा


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