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इस कश्मीरी टूरिस्ट गाइड ने अपनी जान देकर बचायी पांच पर्यटकों की जान!

इस कश्मीरी टूरिस्ट गाइड ने अपनी जान देकर बचायी पांच पर्यटकों की जान!

रौफ़ तुरंत तैरकर किनारे पर आ गये थे, लेकिन जब उन्होंने देखा कि बाकी पर्यटक अपनी ज़िंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो उन्होंने फिर एक बार नदी में छलांग लगा दी।

31 मई 2019 को दक्षिणी कश्मीर में अनंतनाग जिले के प्रसिद्ध पहलगाम रिसॉर्ट में नाव में सवार पांच पर्यटक लिद्दर नदी में गिर गये और उनको बचाने के लिए 32 वर्षीय कश्मीरी टूरिस्ट गाइड रौफ़ अहमद डार ने अपनी ज़िंदगी कुर्बान कर दी।

यह घटना टल सकती थी, अगर उस दिन शाम के वक़्त आये उन पांच पर्यटकों ने उनसे राफ्टिंग करवाने की जिद न की होती। रौफ़ एक प्रोफेशनल राफ्टर और रजिस्टर्ड टूरिस्ट गाइड थे और उन्हें पता था कि सूर्यास्त के बाद नदी में राफ्टिंग के लिए जाना खतरे से खाली नहीं। इसलिए उन्होंने उन टूरिस्टस से पहले ही मना कर दिया था। पर फिर भी जब वे नहीं माने और जिद करने लगे, तो रौफ़ ने उन्हें कुछ दूर तक राफ्टिंग कराने के लिए हामी भर ली।

लगभग 7 बजे, तेज हवाओं के चलते उनकी नाव पलट गयी और सभी सवार लोग नदी में गिर गये। रौफ़ तुरंत तैरकर किनारे पर आ गये थे, लेकिन जब उन्होंने देखा कि बाकी पर्यटक अपनी ज़िंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो उन्होंने फिर एक बार नदी में छलांग लगा दी।

रौफ़ ने उन पर्यटकों को तो बचा लिया, लेकिन खुद को नहीं बचा पाए और पानी के तेज बहाव के साथ बह गये। दूसरे दिन, सुबह में एसडीआरएफ़ और स्थानीय पुलिस को उनका शव भवानी ब्रिज के पास मिला।

रौफ़ अहमद डार (स्त्रोत: ट्विटर)

अपने परिवार में रौफ़ अकेले कमाने वाले थे। उनके माता-पिता को इस बात पर फख्र है कि उनके बेटे ने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी भी परवाह नहीं की। उन्होंने इंसानियत को हर धर्म और भेदभाव से ऊपर रखा। रौफ़ के इस निःस्वार्थ बलिदान के लिए हर कोई उनकी सराहना कर रहा है और कह रहा है कि सही मायनों में यही कश्मीरियत है।

अनंतनाग के डिप्टी कमिश्नर, खालिद जहाँगीर ने बताया कि यही सच्ची कश्मीरियत है, जो प्यार और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देती है। रौफ़ ने भी यही किया और खुद की परवाह किये बिना दूसरों को बचाया। उनके इस बलिदान के सम्मान में स्थानीय प्रशासन ने रौफ़ के परिवार को 2 लाख रूपये की मदद की घोषणा की है, तो राज्य के राज्यपाल, सत्य पाल मालिक ने 5 लाख रूपये की धन राशि की घोषणा की है।

रौफ़ के बलिदान का सच्चा सम्मान तभी होगा जब यहाँ आने वाले पर्यटक इस घटना से घबराकर यहाँ आना नहीं छोड़ेंगें। बल्कि सभी लोग उनसे प्रेरणा लेकर जब भी, जैसे भी हो, दूसरों की मदद करेंगें क्योंकि यही मानवता का प्रतीक होगा और रौफ़ के लिए सच्ची श्रद्धांजलि!

मूल लेख: रिनचेन नोरबू वांगचुक


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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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