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बेटी की शादी से 24 दिन पहले हुए शहीद, मथुरा पुलिस ने 6.20 लाख रूपये इकट्ठा कर कराई शादी

जहाँ एक ओर कुछ पुलिस वालों का रवैया समाज में लोगों के बीच नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, वहीं मथुरा पुलिस का यह कार्य हर सरकारी विभाग के लिए एक सकारात्मक सन्देश है।

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हते हैं कि बुरे वक़्त में अपने भी पराए लगने लगते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा की इस घटना के बारे में जान कर लगता है कि इंसानियत आज भी ज़िन्दा है।

 

ड्यूटी के दौरान हुई प्रधान आरक्षी विजयनाथ की मृत्यु 

स्वर्गीय विजयनाथ जी को सलामी देते हुए

 

प्रधान आरक्षी विजयनाथ की पोस्टिंग मथुरा के जैत चौकी में हुई थी। हर रोज़ की तरह विजयनाथ ड्यूटी पर थे। दिनांक 23 अप्रैल को उन्होंने तीन मृतकों का पोस्टमॉर्टम करवाया था, लेकिन किसे पता था कि यह दिन उनके जीवन का अंतिम दिन होगा। उसी रात कुछ बदमाशों के बारे में उन्हें सूचना मिली तो वे अपनी बाइक लेकर अपराधियों की धर-पकड़ करने के लिए निकल गए। अपराधियों का पीछा करते समय पप्पू ढाबे के पास विजयनाथ की बाइक को एक ट्रक ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि घटना स्थल पर ही उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की ख़बर सुनते ही उनके परिवार और पूरे विभाग में शोक की लहर दौड़ गई । किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था विजयनाथ अब इस दुनिया में नहीं रहे।

 

धूमधाम से करूँगा अपनी  बेटी की शादी 

स्वर्गीय विजयनाथ जी अपने परिवार के साथ

विजयनाथ के तीन बच्चे हैं, दो लड़की और एक लड़का। उनकी पत्नी विनीता सिंह कहती हैं कि उनका सपना तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना था। बड़ी बेटी प्रीति ने बी.टेक. की पढ़ाई पूरी कर ली थी। उन्होंने प्रीति की शादी मथुरा के ही आझई खुर्द निवासी पीएसी (प्रांतीय सशस्त्र बल) के प्रधान आरक्षी वीरपाल के इंजीनियर पुत्र उमेश पाल से तय की थी। 17 मई, 2019 को शादी होनी थी। शादी के लिए मैरिज हॉल बुक करने से लेकर सभी दूसरी तैयारियाँ कर ली गई थीं। एक्सीडेंट के कुछ समय पहले ही विजयनाथ ने अपने बेटे अभिषेक को फोन करके कहा था कि ड्यूटी पूरी करके वे घर आ रहे हैं और फिर कल से सभी रिश्तेदारों और दोस्तों को शादी का कार्ड देने निकलेंगे। पिछले 3 महीने से विजयनाथ शादी की तैयारियों में लगे थे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद यह सब किया-कराया मानो धरा रह गया।

 

पुलिस विभाग न होता तो शायद यह शादी धूमधाम से न हो पाती  

शादी समारोह की तस्वीर

 

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पति की मौत के बाद पूरा परिवार शोक में डूबा था। विनीता चौहान कहती हैं कि कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि बेटी की शादी कैसे होगी। शादी के कार्ड छप चुके थे, मैरिज हॉल बुक हो चुका था, लेकिन अब आगे सब कैसे होगा, यह सोच कर दिल बैठ जाता था। पर इसी कशमकश और उधेड़बुन के बीच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज का फ़ोन आया। उन्होंने कहा कि शादी तय तारीख को उसी भवन में पूरे धूमधाम से होगी, आप किसी भी बात की चिंता नहीं करें। हमारा पूरा विभाग आपके परिवार के साथ है। इसके बाद बेटी की शादी में व्यवस्था और कन्यादान करने के लिए पुलिस विभाग ने आर्थिक मदद करने का का निर्णय लिया।

 

सभी सिपाही और अधिकारियों ने थोड़ी-थोड़ी राशि देकर 6.20 लाख रुपए जमा किए।

परिवार वालो के साथ पुलिस विभाग के अधिकारी

 

शादी में पुलिस विभाग ने हर संभव मदद की। शादी की तैयारी से लेकर बरातियों का स्वागत, भोजन की व्यवस्था और सारे कार्यक्रम व्यवस्थित तरीके से संपन्न किए गए। किसी भी चीज़ की कमी महसूस नहीं होने दी गई। बेटी की विदाई का सपना अपने साथ लिए दुनिया से चले गए विजयनाथ की बेटी की शादी को पुलिस विभाग ने बेहतरीन ढंग से संपन्न कराया। शादी के दिन पूरा विभाग परिवार के सदस्यों की तरह ज़िम्मेदारी संभालता नज़र आया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया, “पुलिस विभाग की ओर से हर संभव मदद करने का प्रयास किया गया और आने वाले समय में भी हम विजयनाथ के परिवार की पूरी मदद करेंगे।“

 

विनीता सिंह कहती हैं कि मेरे पति ने अपने जीवन में ईमानदारी से अपना कर्त्तव्य पूरा किया। इतना ही नहीं, उन्होंने नेत्र दान भी कर दिया था, ताकि किसी और की ज़िंदगी रौशन हो सके। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी की शादी में योगदान कर विभाग ने विजयनाथ को सच्ची श्रद्धांजलि दी है।

जहाँ एक ओर कुछ पुलिस वालों का रवैया समाज में लोगों के बीच नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, वहीं मथुरा पुलिस का यह कार्य हर सरकारी विभाग के लिए एक सकारात्मक सन्देश है। यह सच है कि विजयनाथ की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता था, लेकिन उनकी बेटी का कन्यादान कर, विभाग ने उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी।

संपादन – मनोज झा 


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