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अनुभव – मुझे अपने बच्चो को पालने के अलावा और कुछ नहीं आता था और मैंने यही किया !

ब मेरे पति का देहांत हो गया तो मैं सोचती थी कि अब मैं कैसे जिऊँगी…. मैंने अपनी सारी ज़िन्दगी बस घर ही संभाला था …मुझे बस अपने बच्चो को पालना आता था और कुछ नहीं। फिर मैंने सोचा क्यूँ ना मैं इसी काम को अपनी रोज़ी रोटी का जरिया बना लूँ और मैं एक आया बन गयी। मैंने इन सभी बच्चो को बिलकुल अपने बच्चो की तरह ही पाला। इन सभी को उतना ही प्यार और दुलार दिया जितना मैं अपने बच्चो को देती थी। और बस ऐसे ही कई साल बीत गए। आज मैं ८० साल की हूँ और दुनिया के हर कोने में मेरे बच्चे है। आपको यकीन नहीं होगा लेकिन अपना पेट पालने के लिए जिन बच्चो को मैंने पाला था, वो आज भी मुझसे मिलने ज़रूर आते है!

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via Humans Of Bombay

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Written by मानबी कटोच

मानबी बच्चर कटोच एक पूर्व अभियंता है तथा विप्रो और फ्रांकफिंन जैसी कंपनियो के साथ काम कर चुकी है. मानबी को बचपन से ही लिखने का शौक था और अब ये शौक ही उनका जीवन बन गया है. मानबी के निजी ब्लॉग्स पढ़ने के लिए उन्हे ट्विटर पर फॉलो करे @manabi5

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