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केरल के किसान संगठन को मिला ‘द ऑर्गेनिक मेडल ऑफ़ हॉनर’ का अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार!

केरल में जैविक किसानों के एक 25 साल पुराने समूह केरल जैव कृषक समिति को कृषि के क्षेत्र में नवीनतम कार्य करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयनित किया गया है।

ज़ीचोंग, एक चीनी नगर पालिका ने एशिया की इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर मूवमेंट संस्था ने साथ मिलकर इस समिति को ‘द ऑर्गेनिक मेडल ऑफ़ हॉनर’ के लिए चुना है। केरल जैव कृषक समिति के साथ-साथ यह सम्मान साउथ कोरिया के ‘द यूथ कोलैबो फार्म’ को भी मिला है।

यह अवॉर्ड 30 मई, 2019 को चीन के ज़ीचोंग शहर में दिया जायेगा। द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवॉर्ड में गोल्ड मेडल के अलावा 5, 000 डॉलर की पुरस्कार राशि भी दी जाएगी, जो कि रूपये में एक्सचेंज करने पर 3. 5 लाख रूपये होते हैं।

केरल जैव कृषक समिति में लगभग 15, 000 किसान सदस्य हैं। इस समिति के सचिव, अशोक कुमार वी. ने बताया कि समिति से छोटे-बड़े सभी तरह के किसान जुड़े हुए हैं। ये किसान अनाज, सब्ज़ियाँ, फल आदि उगाते हैं। इस समिति का प्रबंधन भी किसान सदस्य ही करते हैं। हर साल, इन्हीं किसानों में से बोर्ड मेम्बर आदि चुने जाते हैं।

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उन्होंने आगे बताया कि पंचायत, तालुका, जिला और राज्य, अलग-अलग स्तर पर किसानों की प्रबंधक समितियां बनाई जाती हैं और फिर जब भी कोई समस्या होती है तो ये सभी लोग आपस में विचार-विमर्श कर उसका हल ढूंढते हैं। जहाँ आज बहुत से फार्मिंग ग्रुप एनजीओ की तरह काम करते हुए लोगों से फंडिंग की उम्मीद रखते हैं, तो वहीं इस समिति के किसान ज़रूरत पड़ने पर आपस में चंदा इकट्ठा करते हैं।

ये सभी किसान चावल, दाल और सब्ज़ियों की परम्परागत किस्मों को सहेजने पर जोर देते हैं। इसके अलावा, यह समिति ऑर्गेनिक फार्मिंग में किसानों को ट्रेनिंग भी देती है। जैविक खेती का यह कोर्स अलग-अलग खेतों में करवाया जाता है ताकि सीखने वालों के लिए आसानी रहे।

किसी भारतीय किसान संगठन को यह सम्मान मिलना, पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। द बेटर इंडिया, केरल जैव कृषक समिति को ढ़ेरों बधाई देते हुए, उनके कार्यों की सराहना करता है।

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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