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मेघना गुंडलपल्ली: इस 20 वर्षीय लड़की के जुनून ने दिलाई ‘रिदमिक जिमनास्टिक्स’ में देश को पहचान!

तेलंगाना में हैदराबाद से ताल्लुक रखने वाली 20 वर्षीय मेघना रेड्डी गुंडलपल्ली एक रिदमिक जिमनास्ट हैं। साल 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए ‘रिदमिक जिमनास्टिक्स’ में क्वालीफाई करने वाली वे अकेली खिलाड़ी थीं। और इसके बाद से ही, हमारे देश में इस खेल पर चर्चा शुरू हुई।

हालांकि, मेघना के अलावा और भी कई भारतीय ‘रिदमिक जिमनास्ट’ हैं, जिन्होंने इस खेल में अपने स्तर पर अच्छा किया है। लेकिन, मेघना की अंतर्राष्ट्रीय सफलता ने इस खेल को न सिर्फ़ देश में पोपुलर किया है, बल्कि भारत को भी इस खेल में एक वैश्विक पहचान दी है।

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‘रिदमिक जिमनास्टिक्स,’ जिमनास्टिक्स का ही एक प्रकार है। लेकिन यह सामान्य जिमनास्टिक से काफ़ी अलग है। ‘रिदमिक जिमनास्टिक’ यानी कि ‘लयबद्ध जिमनास्टिक’ में सिर्फ़ महिला खिलाड़ी भाग लेती हैं। इसमें जिमनास्ट संगीत की धुन पर रस्सी, हूप, बॉल, क्लब या रिबन आदि के साथ परपरफॉर्म करते हैं।

‘रिदमिक जिमनास्टिक्स’ बहुत ही खूबसूरत और ग्लैमर्स खेल है। खिलाड़ियों के कॉस्टयूम, म्यूजिक, उनकी कोरियोग्राफी और उनकी परफॉरमेंस, हर एक चीज़ में खूबसूरती झलकती है। पर यह खूबसूरती बहुत आसान नहीं है, बल्कि इसके लिए किसी भी खिलाड़ी को बहुत ज़्यादा मेहनत और लगन से आगे बढ़ना होता है।

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‘रिदमिक जिमनास्टिक्स’ परफॉर्म करते हुए मेघना की एक विडियो,

मेघना बचपन से ही बहुत अलग-अलग तरह के स्पोर्ट्स खेलती थीं। लेकिन उन्होंने स्पोर्ट्स में अपना करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा था। हैदराबाद में, वे अपने छोटे भाई को जिमनास्टिक्स की क्लास के लिए लेकर जाती थीं और यहीं पर सिर्फ़ शौक-शौक में उन्होंने जिमनास्टिक्स करना शुरू किया।

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“मैंने लगभग 10 साल की उम्र में जिमनास्टिक्स करना शुरू किया था। हालांकि, मैंने यह सिर्फ़ फिटनेस के लिए शरू किया था। इसमें प्रोफेशनल तौर पर आगे बढ़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं थी। लेकिन फिर साल 2010 में हम दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स देखने गये और यहाँ ‘रिदमिक जिमनास्टिक्स’ में खिलाड़ियों की परफॉरमेंस देखकर, मुझे इस खेल से प्यार हो गया। उस दिन मैंने ठान लिया कि मैं भी एक दिन इस मंच पर ‘रिदमिक जिमनास्टिक्स’ परफॉर्म करुँगी,” मेघना ने कहा।

मेघना गुंडलपल्ली (फोटो साभार: फेसबुक)

मेघना के पिता एक व्यवसायी हैं और उनकी माँ गृहणी। जब मेघना ने अपने माता-पिता को रिदमिक जिमनास्टिक में अपनी रूचि के बारे में बताया, तो उन्होंने मेघना का पूरा साथ दिया। उनके पिता ने अलग-अलग अकैडमी में उनके लिए ट्रेनर ढूंढें; लेकिन उस समय भारत में ‘रिदमिक जिमनास्टिक्स’ का स्तर काफ़ी नीचे था। न तो कोई ख़ास ट्रेनिंग की सुविधा थी और न ही प्रैक्टिस करने के लिए स्पेशल अकादमी थी।

फिर हैदराबाद की एलबी अकादमी में उन्होंने कोच बृज किशोर के मार्गदर्शन में अपनी ट्रेनिंग शुरू की। जिमनास्टिक्स में बहुत कम उम्र से ही आपको अभ्यास शुरू करना पड़ता है, ताकि आपका शरीर फ्लेक्सिबल हो जाये। इसलिए उस समय 11 साल की मेघना के लिए यह बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा। बहुत से लोगों ने उनसे यह तक कहा कि वे यह नहीं कर पाएंगी। लेकिन अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने अभ्यास जारी रखा और फिर धीरे-धीरे, उन्हें इस खेल में महारथ हासिल होना शुरू हुई।

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कुछ समय हैदराबाद में ट्रेनिंग करने के पश्चात, जब देश में उन्हें अच्छे विकल्प नहीं मिले’; तो मेघना के पिता ने उन्हें आगे की ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजा। इतना ही नहीं, बहुत बार उनके लिए बाहर के देशों से कोच भी बुलवाए गये। अब तक उन्होंने अमेरिका, ग्रीस, उज्बेकिस्तान आदि जैसे देशों में ट्रेनिंग की है।

(फोटो साभार: फेसबुक)

इस बारे में बताते हुए मेघना ने कहा, “जब मैंने इस स्पोर्ट्स में शुरुआत की, तो सबसे बड़ी समस्या थी कि हमारे यहाँ उच्च स्तर की कोचिंग उपलब्ध नहीं थी। इसलिए मुझे ज़्यादातर देश से बाहर ही ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता था। लेकिन अब कुछ समय से, बहुत से रिटायर खिलाड़ी कोच बन रहे हैं और जूनियर खिलाड़ियों के लिए अच्छी ट्रेनिंग मुहैया करवा रहे हैं।”

हालांकि, फिर भी एक और समस्या है सुविधाओं की कमी। जो अभी भी रिदमिक जिमनास्ट को झेलनी पड़ रही है। ख़ास तौर पर, हैदराबाद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अभी भी अकादमी में रिदमिक जिमनास्टिक प्रैक्टिस करने के लिए स्पेशल मैट उपलब्ध नहीं है।

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“पिछले साल कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले एक रिदमिक जिमनास्टिक्स मैट की मंजूरी दी गयी थी और वह मंगवाई भी गयी। लेकिन फिर अकादमी में कोई जगह नहीं थी, जहाँ इसे लगवाया जाता,” मेघना ने बताया।

ट्रेनिंग की सुविधाओं के आभाव के साथ- साथ, रिदमिक जिमनास्टिक की बहुत ही कम प्रतियोगिताएं हमारे यहाँ आयोजित होती हैं। इससे भी खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका नहीं मिलता।

पर मेघना के माता-पिता ने हर संभव कोशिश कर, यह सुनिश्चित किया है कि उन्हें वे सभी सुविधाएँ मुहैया करवाएं। इसके लिए, वे हमेशा ही मेघना को बिना किसी सरकारी फंडिंग के अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भेजते रहे हैं। और मेघना ने भी इस खेल में न सिर्फ़ अपनी, बल्कि भारत की भी पहचान बनाई है।

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(फोटो साभार: फेसबुक)

साल 2013 से मेघना ने रिदमिक जिमनास्टिक्स की प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। उन्होंने 2013 और 2014 में आयोजित हुए स्कूल नेशनल्स में गोल्ड मेडल जीते। इसके बाद, साल 2015 के नेशनल गेम्स में उन्हें ऑल-राउंड ब्रोंज मेडल मिला, तो क्लब इवेंट में उन्होंने गोल्ड जीता।

राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतने के साथ ही मेघना ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहराया है। साल 2016 की एशियाई चैंपियनशिप में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया, तो वहीं साल 2018 में कॉमनवेल्थ के लिए चयनित होने वाली वे अकेली भारतीय रिदमिक जिमनास्ट थीं। इसके अलावा, उन्होंने बल्जेरिया की वर्ल्ड चैंपियनशिप 2018, और मलेशिया में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप 2018 में भी भाग लिया।

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यह शायद मेघना का हौसला ही है, जिसे देखते हुए हमारे देश में भी अब इस खेल में भविष्य देखा जा रहा है। साल 2019 की शुरुआत में, हैदराबाद में पहली बार ‘भारतीय रिदमिक जिमनास्टिक्स कप’ आयोजित किया गया। जिसमें भारत और अन्य देशों से लगभग 65 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस तरह की प्रतियोगिताएं उन खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाती हैं, जिन्हें बाहर जाकर परफॉर्म करने का मौका नहीं मिलता है।

(फोटो साभार: फेसबुक)

फ़िलहाल, साल 2020 के ओलिंपिक खेलों के लिए वे इटली में रहकर ट्रेनिंग कर रही हैं। इस खेल के प्रति भारत में लोगों के नज़रिए के बारे में उनका कहना है कि अब लोग इस खेल के बारे में जागरूक हो रहे हैं। बहुत से लोग इस खेल को प्रोमोट करने के लिए आगे आ रहे हैं। साथ ही , इस स्पोर्ट्स को अपनाने वाले खिलाड़ियों की तादाद भी बढ़ रही है और जिस तरह से अब यह खेल भारत में अपने पैर पसार रहा है, वैसे-वैसे इसका स्तर भी ऊँचा उठ रहा है।

अपने लक्ष्य के बारे में बात करते हुए मेघना बताती हैं, “कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट बनना ही मेरा सपना है। इसके अलावा, मैं ओलिंपिक खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूँ। अभी तो यह लगभग नामुमकिन है, क्योंकि सिर्फ़ 25 टॉप जिमनास्ट को ही ओलिंपिक में चुना जाता है। लेकिन इस सपने को हक़ीकत में बदलने के लिए मैं जी-जान से मेहनत कर रही हूँ।”

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अंत में वे सिर्फ़ इतना ही संदेश देती हैं कि आपको कभी भी बड़े सपने देखने से नहीं घबराना चाहिए, बल्कि उन सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। और अगर कोई आपसे कहे कि आप यह नहीं कर सकते, तो आपको सिर्फ़ ज़्यादा से ज़्यादा मेहनत करके उस इंसान को यह दिखाना चाहिए कि आप सब कुछ कर सकते हैं।”

यक़ीनन, मेघना हमारे देश में बहुत से खिलाड़ियों और खेल-प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा हैं। इस खेल के बारे में और मेघना के अनुभव के बारे में अधिक जानने के लिए आप उनका ब्लॉग indiarhythmicgymnast.blogspot.com पढ़ सकते हैं।

हैदराबाद में आयोजित टेड एक्स टॉक में मेघना गुंडलपल्ली को सुनने के लिए यह वीडियो देखें:

संपादन – मानबी कटोच 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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