Search Icon
Nav Arrow

“मेरे शरीर ने उस कला को अपना लिया, जिसके लिए मैंने अपना बचपन दे दिया!”

Advertisement

“मैं हमेशा से संगीत के क्षेत्र में कुछ करना चाहता था, लेकिन राजस्थान जैसी सांस्कृतिक जगह से होने के बावजूद, मेरे परिवार में कोई नहीं चाहता था कि मैं कला के क्षेत्र में आगे बढूँ। सुबह में जल्दी ही, मैं अपने घर से निकल जाता और अपने उस्ताद के पास जाकर इंस्ट्रूमेंट बजाना सीखता। शाम तक, मेरी माँ अक्सर मुझसे पूछती थी कि मैं इतना थका हुआ क्यों हूँ। लेकिन सिर्फ़ मैं जनता था कि मैं अपनी सांस को नियन्त्रण में करने के लिए कितनी मेहनत कर रहा था। मैं बच्चा था, पर धीरे-धीरे दुनिया के तौर-तरीके सीख रहा था। और आज मैं 60 साल का हूँ, लेकिन एक 20 साल के लड़के की तरह खेल सकता हूँ; क्योंकि मेरा शरीर मेरा दोस्त बन गया है, इसने उस कला को अपना लिया है, जिसके लिए मैंने अपना बचपन दे दिया। मेरे हाथ में यह (इंस्ट्रूमेंट), मेरी पत्नी, मेरी माँ और मेरा बच्चा है। इससे बढ़कर कुछ नही है दुनिया में, जिससे मैं प्यार करूँ!”

https://www.facebook.com/humansofbombay/photos/a.253147214894263/1065434750332168/?type=3&theater

Advertisement

यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर भेज सकते हैं।

Advertisement
close-icon
_tbi-social-media__share-icon