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“मेरे शरीर ने उस कला को अपना लिया, जिसके लिए मैंने अपना बचपन दे दिया!”

“मैं हमेशा से संगीत के क्षेत्र में कुछ करना चाहता था, लेकिन राजस्थान जैसी सांस्कृतिक जगह से होने के बावजूद, मेरे परिवार में कोई नहीं चाहता था कि मैं कला के क्षेत्र में आगे बढूँ। सुबह में जल्दी ही, मैं अपने घर से निकल जाता और अपने उस्ताद के पास जाकर इंस्ट्रूमेंट बजाना सीखता। शाम तक, मेरी माँ अक्सर मुझसे पूछती थी कि मैं इतना थका हुआ क्यों हूँ। लेकिन सिर्फ़ मैं जनता था कि मैं अपनी सांस को नियन्त्रण में करने के लिए कितनी मेहनत कर रहा था। मैं बच्चा था, पर धीरे-धीरे दुनिया के तौर-तरीके सीख रहा था। और आज मैं 60 साल का हूँ, लेकिन एक 20 साल के लड़के की तरह खेल सकता हूँ; क्योंकि मेरा शरीर मेरा दोस्त बन गया है, इसने उस कला को अपना लिया है, जिसके लिए मैंने अपना बचपन दे दिया। मेरे हाथ में यह (इंस्ट्रूमेंट), मेरी पत्नी, मेरी माँ और मेरा बच्चा है। इससे बढ़कर कुछ नही है दुनिया में, जिससे मैं प्यार करूँ!”

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“I always wanted to pursue music but despite coming from a cultural place like Rajasthan, nobody in my family wanted me…

Posted by Humans of Bombay on Thursday, March 21, 2019


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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