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“मैं खुद अपना बॉस हूँ; कोई मुझे काम से निकाल नहीं सकता!”

“मैं खुद अपना बॉस हूँ; कोई मुझे काम से निकाल नहीं सकता!”

“मैं यहाँ एक ही जगह पर पिछले 23 सालों से काम कर रहा हूँ। इससे पहले मैं एक फैक्ट्री में काम करता था, पर उन्होंने लोगों को निकाल दिया और फैक्ट्री बंद हो गयी… उस वक़्त मुझे लगा कि मुझे अपना कुछ काम करना चाहिए। इस तरह से, मैं खुद पर निर्भर रहूँगा। इसलिए मैंने जूते ठीक करने (मोची) का काम शुरू किया। मैं 77 साल का हूँ; मेरे बच्चे और नाती-पोते भी हैं– मुझे उम्मीद है कि मेरे फ़ैसलों के लिए उन्हें मुझे पर गर्व होगा, क्योंकि निश्चित रूप से, मैं बहुत खुश हूँ कि मैं खुद अपना बॉस हूँ। कोई मुझे काम से निकाल नहीं सकता!”

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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