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“मैं खुद अपना बॉस हूँ; कोई मुझे काम से निकाल नहीं सकता!”

“मैं यहाँ एक ही जगह पर पिछले 23 सालों से काम कर रहा हूँ। इससे पहले मैं एक फैक्ट्री में काम करता था, पर उन्होंने लोगों को निकाल दिया और फैक्ट्री बंद हो गयी… उस वक़्त मुझे लगा कि मुझे अपना कुछ काम करना चाहिए। इस तरह से, मैं खुद पर निर्भर रहूँगा। इसलिए मैंने जूते ठीक करने (मोची) का काम शुरू किया। मैं 77 साल का हूँ; मेरे बच्चे और नाती-पोते भी हैं– मुझे उम्मीद है कि मेरे फ़ैसलों के लिए उन्हें मुझे पर गर्व होगा, क्योंकि निश्चित रूप से, मैं बहुत खुश हूँ कि मैं खुद अपना बॉस हूँ। कोई मुझे काम से निकाल नहीं सकता!”

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“I’ve been working here at the same place for 23 years. I actually used to work at a factory before this, but they had…

Posted by Humans of Bombay on Thursday, March 21, 2019


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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