in

ज़िंदगी की छोटी-छोटी खुशियाँ हमेशा ही बहुत ख़ास और ज़रूरी होती हैं!

“मैं एक ड्राईवर हूँ। दो साल से मैं यह जॉब कर रहा हूँ। कोई बड़ा आदमी बनने का मेरा कोई सपना नहीं है। मुझे किसी व्यवसाय आदि में नहीं पड़ना। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेरे पास कितना पैसा है। मैं सिर्फ़ अपनी ज़िंदगी सुकून से गुज़ारना चाहता हूँ और छोटी-छोटी चीज़ों में खुश रहना चाहता हूँ।

जैसे कि अभी- मेरा ब्रेक था, तो मैंने सोचा कि चाय पी जाये, पर यहाँ पास में कोई टपरी/स्टॉल ही नहीं थी। इसलिए मैंने आस-पास पूछा और किसी ने मुझे बताया कि यहाँ एक ही आदमी की चाय की टपरी है और वह कुछ देर पहले चला गया। तो मैंने उस दिशा में भागना शुरू किया और आख़िरकार, उस चाय वाले को ढूंढ लिया! मुझे मेरी चाय मिल गयी और अब मैं यहाँ हूँ, अपने ब्रेक में आराम और एन्जॉय कर रहा हूँ। मैं लगभग 300 मीटर दौड़ा, पर यह फायदेमंद था- ज़िंदगी की छोटी-छोटी खुशियाँ हमेशा ही बहुत ख़ास और ज़रूरी होती हैं!”


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर भेज सकते हैं।

शेयर करे

Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

मुंबई: 22 साल की युवती ने स्टेशन को बनाया स्कूल, गरीब बच्चों को दे रही हैं मुफ़्त शिक्षा!

शोर्ट-सर्किट अलार्म से लेकर मौसम का हाल बताने वाले स्टेशन तक, ग्रामीणों के लिए किये इनोवेशन!