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ट्रेन से गिरकर घायल हुए यात्री को 1.5 किमी दौड़ते हुए इस सुरक्षा-कर्मी ने पहुँचाया अस्पताल!

बीते शनिवार, 23 फरवरी 2019 को मध्य-प्रदेश में एक यात्री चलती ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। ऐसे में मध्य-प्रदेश पुलिस के एक कॉन्सटेबल, पूनम चंद्र बिल्लोरे

ने उस व्यक्ति को अपने कंधे पर उठाया और रेलवे लाइन पर लगभग डेढ़ किलोमीटर दौड़ते हुए, उसे समय रहते उपचार के लिए पहुँचाया।

इस घटना की एक विडियो इंटरनेट पर वायरल हो गयी,

द बेटर इंडिया से बात करते हुए, पूनम चंद्र ने बताया कि शनिवार की सुबह करीब 8:45 बजे, जब वे मध्य-प्रदेश पुलिस के डायल 100 टीम में तैनात थे, तब रेलवे पुलिस द्वारा दी गयी कि होशंगाबाद से करीब 60 किलोमीटर दूर एक यात्री भागलपुर एक्सप्रेस से गिरकर घायल हो गया है। सूचना मिलने पर सिपाही पूनम चंद्र और पुलिस जीप चालक, राहुल सक्कल जब स्टेशन पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि घटनास्थल स्टेशन से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। इसके आगे कोई भी वाहन या फिर एम्बुलेंस नहीं जा सकती थी।

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बिना समय गंवाए, ये दोनों सिपाही पैदल ही घटनास्थल पर पहुँचे। यहाँ उन्होंने देखा कि वह व्यक्ति बहुत गंभीर रूप से घायल है और कोई रास्ता न होने पर, 29 वर्षीय बिल्लौर ने उसे अपने कंधे पर उठाया और दौड़ना शुरू किया। बिल्लौर जब उस लड़के को कंधे पर उठाकर दौड़ रहे थे, तो उन्होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की। उनके पास वाली रेलवे पटरी से ही एक ट्रेन तेज़ रफ़्तार से गुज़री, लेकिन बिल्लौर का पूरा ध्यान उस लड़के को जल्द से जल्द गाड़ी तक ले जाने पर था।

इस घायल यात्री की पहचान अजीत के रूप में हुई है। अजीत को तुरंत जिले के नर्मदा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ अभी उनकी हालत में सुधार है।

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जब पूनम चन्द्र उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे तो अजीत के पिता उनका शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे थे। जिसके जवाब में इस नेकदिल पुलिसकर्मी ने कहा,”मैंने तो बस अपना काम किया है, यह तो मेरा फ़र्ज़ था।”

अजीत मध्य प्रदेश से हैं और काम के सिलसिले में कुछ समय पहले ही मुंबई आकर बसे थे। यह हादसा तब हुआ जब वे घर से मुंबई जा रहे थे।

पूनम चन्द्र की इस बहादुरी को सभी बड़े अधिकारीयों ने सराहा है और उन्हें इसके लिए इनाम देने की भी सिफारिश की गयी है।

इस पूरे वाकये की विडियो बिल्लौर के साथी सिपाही राहुल सक्कल ने बनाई और सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इस विडियो को देखकर पूरे देश भर से लोग पूनम चंद्र की सराहना कर रहे हैं।

पूनम चंद्र से जब हमारी संवाददाता जोविटा ने पूछा कि इस तरह देश भर से सराहना मिलने पर वे कैसा महसूस कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं पुलिस विभाग का हिस्सा हूँ और मुझे ख़ुशी है कि मैं कसी की मदद करके यह उदाहरण स्थापित कर पाया।”

अंत में पूनम चंद्र एक गहरा सन्देश देते हैं,

“जब मैंने अजीत को उठाया, तो मैंने देखा कि रेलवे क्रासिंग गेट के पास लगभग 25 लोग जमा थे। पर फिर भी, किसी ने भी पीड़ित की मदद नहीं की, जो वहाँ असहाय और बेहोश पड़ा था। लोगों के लिए मेरा सिर्फ़ यही सन्देश है कि अगर आप कभी किसी घायल व्यक्ति को देखें, तो कृपया पुलिस या एम्बुलेंस के आने तक का इंतज़ार न करें। आगे बढ़ें और ज़रूरत में लोगों की मदद करें। अगर आप किसी अकेले पुलिस वाले को एक घायल व्यक्ति की मदद करते देखें, तो आगे आयें या फिर अपने वाहन में ले जाएँ। बहुत लोगों को लगता है कि वे पुलिस या फिर किसी क़ानूनी कार्यवाही में फंस जायेंगें, तो ऐसा नहीं है। कोई भी अच्छा इंसान, जिसने ज़रूरत में किसी की मदद की है, कानून हमेशा उसकी रक्षा करता है। उसे पूछताछ के दौरान कभी भी परेशान नहीं किया जाता है।”

( संपादन – मानबी कटोच )

 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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