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हैदराबाद: ऑटो में ही छोड़ गये 10 लाख रुपयों से भरा बैग, ड्राईवर ने सही-सलामत लौटाया!

तेलंगाना के हैदराबाद में एक ऑटो ड्राईवर ने ईमानदारी और सच्चाई की मिसाल पेश की है। घटना बीते बुधवार, 6 फरवरी 2019 की है। हैदराबाद के नलगोंडा जिले के आदिवासी इलाके देवारकोंडा के मूल निवासी जे. रामूलु के ऑटो में दो यात्री अपना पैसों से भरा थैला भूल गये थे, जिसे रामूलु ने पूरी ईमानदारी के साथ उन्हें वापिस लौटाया।

रामूलु के ऑटो में दो यात्री सवार हुए और उन्हें रामूलु ने गचिबौली में श्री राम कॉलोनी में छोड़ा था। इसके बाद वह सिकंदराबाद के जुबली बस स्टेशन आया, जहाँ पर उसका स्टैंड है। पर यहाँ आकर उसने देखा कि ऑटो में पिछली सीट पर एक बैग पड़ा है। जब रामूलु ने बैग खोलकर देखा, तो वह दंग रह गया, क्योंकि बैग में ढेर सारे पैसे थे।

पहले तो वह घबरा गया, लेकिन फिर उसने वह बैग वापिस करने का फ़ैसला किया। रामूलु ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि उसके बाद वह वापिस उसी जगह गया, जहाँ उसने उन दोनों भाईयों को छोड़ा था। उसने आगे कहा, “मैं चाहता तो इतने पैसे में आराम से दो साल गुजार सकता था, लेकिन मुझे ऐसी ज़िंदगी नहीं चाहिए और इसलिए मैंने पैसे लौटने का निर्णय लिया।”

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रामूलु की आर्थिक-स्थिति कोई खास नहीं है। उसके ऑटो पर लगभग डेढ़ लाख रूपये का कर्ज़ा है और वह ऑटो से दिन में मुश्किल से 500 रूपये कमा पता है। उसकी पत्नी भी मजदूरी करती है और वे एल.बी नगर में किराये पर रहते हैं।

जब रामूलु वापिस श्री राम कॉलोनी पहुँचा, तो उसे वे दोनों यात्री- के. प्रसाद और उनके भाई, के. किशोर, उन्हें उसी जगह पर मिले। उनके साथ पुलिस भी थी, जो कि उस ऑटो की तलाश कर रहे थे, जिसमें वे अपने पैसे भूल गये थे। रामूलु ने उन्हें तुरंत जाकर उनके पैसे लौटाए। रामूलु की ईमानदारी देखकर पुलिस और दोनों भाई हैरान रह गये।

जहाँ एक तरफ पुलिस ने रामूलु की सच्चाई की सराहना की, तो इन दोनों भाईयों ने उनका ईमान देखकर उन्हें 10, 000 रूपये इनाम के तौर पर दिए।

यक़ीनन, रामूलु का यह नेक काम बहुत-से लोगों के लिए प्रेरणा है और उनके जैसे लोगों के चलते ही आज भी दुनिया में ईमानदारी और सच्चाई बरक़रार है।

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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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