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#अनुभव : “चलते-चलते ही मरना है”; क्योंकि जीना इसी का नाम है!

#अनुभव : “चलते-चलते ही मरना है”; क्योंकि जीना इसी का नाम है!

“तीन महीने बाद मैं 100 साल की हो जाऊंगी और मेरे जन्मदिन पर मेरी बेटी मेरे लिए खीर बनाएगी! किसी भी इंसान के लिए इतनी लंबी ज़िंदगी जीना आसान नहीं होता… मैंने बहुत कुछ देखा है। मैंने मेरे दोनों बेटों की मौत देखी है, एक शराबी था और दूसरे को दिल का दौरा पड़ा। पर फिर भी, ज़िंदगी चलती रहती है। इसलिए, अगर कोई कुछ कर सकता है, तो वह है आगे बढ़ते रहना। हमेशा याद रखो, ‘चलते- चलते ही मरना है!'”

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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