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#अनुभव : “चलते-चलते ही मरना है”; क्योंकि जीना इसी का नाम है!

“तीन महीने बाद मैं 100 साल की हो जाऊंगी और मेरे जन्मदिन पर मेरी बेटी मेरे लिए खीर बनाएगी! किसी भी इंसान के लिए इतनी लंबी ज़िंदगी जीना आसान नहीं होता… मैंने बहुत कुछ देखा है। मैंने मेरे दोनों बेटों की मौत देखी है, एक शराबी था और दूसरे को दिल का दौरा पड़ा। पर फिर भी, ज़िंदगी चलती रहती है। इसलिए, अगर कोई कुछ कर सकता है, तो वह है आगे बढ़ते रहना। हमेशा याद रखो, ‘चलते- चलते ही मरना है!'”

“I’m going to turn 100 in 3 months and my daughter is going to make kheer for me on my birthday! It’s not easy to be a…

Posted by Humans of Bombay on Wednesday, February 6, 2019


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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