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दिल्ली: इस सिपाही ने अपनी जान पर खेलकर बचायी नहर में डूबते बच्चे की जान!

2 फरवरी 2019 को दिल्ली के बवाना नहर में डूब रहे एक बच्चे को दिल्ली पुलिस के एक सिपाही ने अपनी जान पर खेलकर बचाया। ख्याला पुलिस स्टेशन के कोंस्टेबल राजकमल मीणा किसी केस के सिलसिले में यहाँ आये हुए थे और तभी उन्होंने देखा कि एक बच्चा बवाना नहर में गिर गया है।

बिना अपनी जान की परवाह किये और एक पल भी गंवाए, मीणा तुरंत नहर में कूद गये और उस बच्चे की जान बचाई। इस घटना के बारे में पश्चिमी दिल्ली की डीसीपी के ट्विटर अकाउंट से इस घटना के बारे में पोस्ट की गयी।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए मीणा ने बताया, “मैं एक केस पर काम कर रहा था और उस इलाके में हम छापा मारने की तैयारी कर रहे थे। जब मैं यहाँ पहुँचा तो देखा कि कुछ बच्चे इस नहर के पास खेल रहे थे। इस जगह को वैस भी ज्यादा सुरक्षित नहीं माना जाता है और इसलिए मैं उन बच्चों को कहने ही वाला था कि वहाँ से हट जाएँ। पर उससे पहले ही एक बच्चा नहर में गिर गया। वह तैर नहीं सकता था और इसलिए मैं तुरंत नहर में कूद गया और बच्चे को बाहर निकाला।”

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बवाना नहर पश्चिम दिल्ली में स्थित है, और यह पहली बार नहीं है कि यहाँ इस तरह की घटना हुई है। पर इस बार मीणा की बहादुरी के चलते इस 11 वर्षीय बच्चे को बचा लिया गया। वे न सिर्फ़ इस बच्चे को बाहर लेकर आये, बल्कि उसे तुरंत सीपीआर भी दिया।

इसके बाद, बच्चे को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। मीणा को भी यहाँ उपचार की जरूरत पड़ी क्योंकि उन्हें भी ठन्डे और गंदे पानी की वजह से इन्फेक्शन हो गया था। मीणा को उनके इस बहादुरी भरे काम के लिए उनके साथियों के साथ-साथ डिपार्टमेंट के अफ़सरों से भी सराहना मिली।

इस पर मीणा ने कहा, “मैं कोई हीरो नहीं हूँ। एक सिपाही होने के नाते यह मेरा कर्तव्य है और सिर्फ़ मेरी नौकरी के कारण ही नहीं, बल्कि एक इंसान होने के नाते भी यह मेरा धर्म था कि मैं जरूरत में दूसरे इंसान की मदद करूँ।”


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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