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पुणे: बदलते मौसम में धनिया बना किसानों का सहारा, हफ्ते भर में कराया लाखों का मुनाफ़ा!

स बार पूरे भारत में मौसम में काफ़ी बदलाव रहे हैं। देश के जिन प्रांतों में ठंड ना के बराबर रहती है, वहां भी इस बार जमकर सर्दी रही है।

बदलते मौसम का सबसे ज्यादा प्रभाव देश के किसानों पर पड़ता है। द वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि मंत्रालय ने संसद और सरकार को बताया है कि यदि मौसम के इन बदलावों के चलते कृषि में कुछ ठोस कदम नहीं उठाये गए, तो आने वाले समय में गेंहू, चावल की खेती के साथ-साथ सब्ज़ियों के उत्पादन पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।

इसका असर महाराष्ट्र के कई जिलों में देखा जा सकता है। यहां सब्ज़ियों के उत्पादन पर सर्दी का काफ़ी प्रभाव पड़ा है। पर इस मुश्किल समय में, महाराष्ट्र के पुणे के जुन्नार तहसील के पिंपरी पेंढार गाँव में किसानों के लिए धनिया की खेती फायदेमंद साबित हुई है।

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ये किसान धनिये की खेती से लाखों का मुनाफ़ा कमा रहे हैं। धनिया ख़ास तौर पर सब्ज़ियों में सजावट के लिए इस्तेमाल होता है और इसलिए सब्ज़ियों की खरीददारी, 5 रूपये के धनिया का एक गुच्छा लिए बगैर पूरी नहीं होती। पर यही छोटी-सी फ़सल आज पुणे के इन किसानों के लिए बहुत फायदेमंद रही।

पिंपरी पेंढार के एक किसान सावलेराम नाना कूटे ने बताया कि इस साल उन्होंने धनिया की खेती में 2 लाख रुपये का निवेश किया था और अब एक हफ्ते में इससे 13.5 लाख रुपये कमाए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले एक दशक में, मुझे धनिया से कभी भी इतना अच्छा मुनाफ़ा नहीं मिला। पिछले दो सालों से, मैं तरबूज जैसे फलों के साथ टमाटर और पत्तेदार सब्ज़ियाँ भी उगा रहा हूँ, लेकिन बाजार में कम कीमतों के कारण कभी भी इतना पैसा नहीं मिला।”

कूटे के जैसे ही और भी धनिया-किसानों को मुनाफ़ा हुआ है और इसका सबसे बड़ा कारण है कम उत्पादन। महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ (कृषि महाविद्यालय) के कुलपति राजाराम देशमुख मानते हैं कि धनिया का उत्पादन कम होने के कारण बाज़ार में पर्याप्त मात्रा में धनिया की सप्लाई नहीं हो रही है और ऐसे में मांग पूरी न होने से, धनिया का मूल्य बढ़ गया है।

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उन्होंने कहा कि तापमान 10 डिग्री से नीचे जाये, तो इसका सब्ज़ियों के उत्पादन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इस बार राज्य के कई इलाकों में रात को तापमान काफ़ी कम रहा है। जिससे कि सब्जी-उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसी वजह से धनिया के मूल्य में बढ़ोत्तरी हुई है।

नारायणगाँव और पुणे की सब्ज़ी- मंडी की रिपोर्ट के अनुसार, जो धनिया पहले 5-10 रूपये प्रति गुच्छा बिकता था, वह अभी 30 से 50 रूपये प्रति गुच्छा बिक रहा है। और इसका सीधा फायदा किसानों को हुआ है।

फोटो साभार: जॉन टे/फेसबुक

पुणे के एक और धनिया किसान, कमलाकर वाजगे ने अपनी फसल से इस साल 2 लाख रुपये कमाए हैं। उनका कहना है, “बहुत से किसान पानी की कमी के चलते कई सब्ज़ियाँ नहीं उगा पाए हैं। इसकी वजह से बाज़ार में आपूर्ति और मांग में इतना अंतर आ गया है। जिसकी वजह से फसल की कीमतों में पहले से अब तक इतना बड़ा बदलाव आया है।”

मंडी की रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल तक उन्हें सर्दियों में जुन्नार, शिरूर, अम्बेगांव और खेड़ा तहसीलों से हर दिन धनिया के लगभग 2.5 लाख गुच्छे मिलते थे। लेकिन इस बार उत्पादन में भारी कमी के चलते सिर्फ़ 1.5 लाख गुच्छे प्रतिदिन मिल रहे हैं। ऐसे में, मांग की आपूर्ति कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है।

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पर बाज़ार में इस साल यह आपूर्ति और मांग का अंतर किसानों के लिए लाभकारी साबित हुआ है। ओतूर के एक किसान, सतीश डोम्बले ने बताया, “मैंने 20 गुंठा (0.4 एकड़) ज़मीन पर धनिया उगाया था। इसके अलावा, पिछले साल मैंने जितनी भी सब्ज़ियाँ उगाईं थीं, मुझे सब में भारी नुकसान हुआ। लेकिन इस बार धनिया ने मुझे बचा लिया और अब यह पैसा मैं अगली फसल में लगा सकता हूँ।”

खेती में हो रहे नवीनीकरण, नवाचार और असामान्य फसलों में निवेश किसानों के लिए फायदेमंद सिद्ध हो रहा है। आप ऐसे बहुत से आर्गेनिक और इनोवेटिव किसानों की कहानी द बेटर इंडिया पर पढ़ सकते हैं।

मूल लेख – तन्वी पटेल

(संपादन – मानबी कटोच)


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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