पुरुष-प्रधान सोच को चुनौती देती भारत की ‘ढोल गर्ल’, जहान गीत सिंह!

“कुड़िये; कुट्ट के बजा, मुंडेया वांगु बजा”

पने उस्ताद की इस बात ने 14 साल की जहान को जैसे नींद से जगा दिया। ‘मुंडेया वांगु’ का मतलब होता है ‘लड़कों जैसे’। ये शब्द उसके दिल को ऐसे चुभे कि जहान ने दिल ही दिल कसम खाई कि, “मैं तो लड़कियों जैसे ही बजाऊँगी और अच्छा बजाऊँगी”!

आज 21 साल की जहान गीत सिंह को लोग भारत की ‘ढोल गर्ल’ के नाम से जानते हैं।

जहान गीत सिंह

चंडीगढ़ में रहने वाली जहान, फ़िलहाल पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर रही हैं। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ, जहान ढोल बजाने के अपने शौक और जुनून को भी आगे बढ़ा रही है।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए जहान ने कहा, “मेरा परिवार हमेशा से ही अपनी संस्कृति से बहुत जुड़ा हुआ था। मैंने हमेशा से ही अपने पापा से सुना था कि वे अपने कॉलेज में डांस या नाटक जैसी कल्चरल गतिविधियों में हिस्सा लेते थे। इसलिए मेरा भी हमेशा इन सब चीज़ों से लगाव रहा।”

पिछले 7 सालों से ढोल बजा रही जहान ने बताया कि जब उन्होंने तय किया कि उन्हें ढोल सीखना है , तब उन्हें बिल्कुल भी नहीं लगा था कि वे कुछ बहुत अलग कर रही हैं।

“एक बार स्कूल से लौटते समय मैंने रास्ते में कुछ लोगों को ढोल बजाते देखा था। उनके चेहरे पर कुछ अलग ही नूर था, जिसे देख कर मुझे लगा कि बस मुझे भी ढोल सीखना है,” जहान ने आगे कहा।

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जब ये बात उन्होंने अपने माता-पिता से कही, तो उन्हें बहुत हैरानी हुई। क्योंकि हमने हमेशा ढोल को सिर्फ़ पुरुषों के गले में लटका देखा है और शायद इसलिए कभी सोचा ही नहीं कि एक लड़की भी ढोल बजा सकती है।

पर जहान के इस एक सवाल ने सिर्फ़ उनकी ही ज़िंदगी का रुख नहीं बदला; बल्कि हमारे देश में लोगों की सोच को भी चुनौती दी।

फोटो साभार: जहान गीत सिंह

जहान को अपने इस शौक को पूरा करने के लिए परिवार का पूरा साथ मिला। उनके पापा ने दूसरे दिन से ही उनके लिए एक उस्ताद ढूँढना शुरू किया, जो उन्हें ढोल बजाना सिखा सके। पर उन्हें सब जगह ‘ना’ ही सुनने को मिली, क्योंकि कोई भी एक लड़की को ढोल बजाना नहीं सिखाना चाहता था। उन्होंने बताया,

“सिखाने के लिए मना करना तो एक बात थी, पर जब वे सुनते थे कि लड़की को ढोल बजाना सिखाना है तो उनके चेहरे पर मेरे लिए एक हीन भावना आ जाती थी। ऐसा लगता था कि ये लोग मुझसे सवाल कर रहे हो कि एक लड़की ऐसा सोच भी कैसे सकती है। कई बार तो मुझे भी लगने लगता कि मैंने ऐसा क्या मांग लिया? मैं तो बस ढोल बजाना सीखना चाहती हूँ, जैसे बहुत से लोग गिटार या सितार जैसी चीज़े सीखते हैं।”

ज्यादातर लोगों के लिए इस बात को पचाना ही बहुत मुश्किल था कि एक अच्छे-खासे परिवार की लड़की ढोल बजाना और सीखना चाहती है। इसका नतीजा यह था कि बहुत जगह कोशिश करने के बाद भी उनको ढोल सिखाने के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा था। पर जहान के पापा ने हार नहीं मानी और अपनी बेटी के लिए एक अच्छे उस्ताद की उनकी तलाश जारी रही।

बहुत मुश्किलों के बाद एक ढोली, सरदार करतार सिंह उन्हें ढोल सिखाने के लिए तैयार हो गये। उस वक़्त शायद करतार सिंह को भी लगा था कि ये जहान का दो-चार दिन का शौक है और जल्दी ही, वो खुद सीखने से मना कर देगी। जहान ने बताया,

“उस्ताद जी ने मुझे घर आकर सिखाना शुरू किया। जैसे-जैसे वक़्त जाने लगा, तो उन्हें समझ में आया कि ढोल सीखना सच में मेरा जुनून है। इसके बाद उन्होंने पूरे दिल से मुझे सिखाना शुरू किया। आज तक वही मेरे उस्ताद हैं। उन्होंने मुझे बहुत बारीकी से सिखाया कि ढोल कैसे बनता है, क्या-क्या बीट होते हैं, किस बीट का क्या महत्व है, आदि सब बातें पूरे विस्तार से और बहुत ही अच्छे से समझायी, ताकि ये सिर्फ़ मेरे लिए शौकिया न रहे बल्कि मुझे ढोल की समझ भी हो।”

14 साल की उम्र में जहान ने ढोल बजाना सीखना शुरू कर दिया। पर यह तो उनके संघर्ष की बस शुरुआत भर थी।

फोटो साभार: फेसबुक

उस उम्र में ढोल के वजन को संभालना भी जहान के लिए एक बड़ी चुनौती रही। क्योंकि ढोल को उठाकर उसे सिर्फ़ 5 मिनट बजाने के लिए भी बहुत ताकत और सहन-शक्ति की ज़रूरत होती है। इसके लिए उन्होंने अपने खाने-पीने पर खास ध्यान दिया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी सहनशीलता पर काम किया। बहुत बार प्रैक्टिस करते समय उनके हाथों में छाले पड़ जाते थे और कई बार तो खून भी निकलने लगता। पर जहान को बस धुन सवार थी कि उन्हें भी बाकी ढोलियों की तरह घंटों तक ढोल बजाना है।

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कुछ वक़्त तक सीखने के बाद उन्होंने अपनी पहली पब्लिक परफॉरमेंस चंडीगढ़ के कलाग्राम में नॉर्थ ज़ोन कल्चर सेंटर में दी। जहान ने बताया,

“उस दिन वहां पर जितने भी लोग थे उनके लिए यह बहुत नया था। उन्होंने ऐसा कुछ देखा ही नहीं था। मेरी परफॉरमेंस के बाद कुछ पल के लिए सब खामोश थे, क्योंकि उन्हें लगा था कि शायद मैं सिर्फ़ ढोल को ऐसे ही लेकर स्टेज पर आई हूँ और उसे साइड में रखकर डांस या फिर कुछ और करुँगी। पर उन्होंने सोचा ही नहीं कि एक 14 साल की लड़की ढोल बजाएगी।”

वहां लोगों ने जहान को सराहा और उन्हें लोगों से काफ़ी तारीफ़ भी मिली। पर जब उन्होंने इस बारे में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बताया कि उन्होंने ढोल परफॉरमेंस दी है, तो उन्हें बहुत ही अलग प्रतिक्रिया मिली। उन्हें लोगों के ताने और दकियानूसी बातें सुनने को मिली।। बहुत से लोगों ने कहा कि शर्म नहीं आती, जो ढोल बजा रही है; कुछ अच्छा कर लेती। जहान ने बताया,

“लोगों को लगता है कि ढोल बजाना सिर्फ़ एक तबके या जाति के लोगों का काम है। जब मैं ढोल बजाने कहीं जाती थी तो लोगों को यही लगता कि मैं भी उसी तबके से आती हूँ और इसलिए मजबूरी में यह काम कर रही हूँ। कोई भी यह स्वीकार नहीं कर पा रहा था कि एक अच्छे-खासे घर की लड़की भी ढोल बजाना सीख सकती है।”

जहान जब भी कहीं परफॉर्म करने जाती, तो उन्हें बाकी ढोलियों से भी चुनौती मिलती कि क्या वह एक पुरुष-ढोली जितना अच्छा ढोल बजा सकती हैं। इतना ही नहीं, उनके उस्ताद को भी लोग ताने देते कि उन्होंने अपनी कला, अपना एक गुर, एक लड़की को दिया है। पर जहान की मेहनत और जुनून ने उन्हें कभी भी रुकने नहीं दिया।

धीरे-धीरे उनकी एक अलग पहचान बनना शुरू हुई। उन्होंने अपनी परफॉरमेंस के बाद स्टेज पर बात करना भी शुरू किया। उन्होंने लोगों को अपने बारे में बताया कि ढोल बजाना उनकी मजबूरी नहीं बल्कि उनका शौक है और वे अपनी संस्कृति की शान के प्रतीक ‘ढोल’ को और आगे बढ़ा कर एक नया मुकाम देना चाहती हैं।

पिछले 7 सालों में जहान ने 300 से भी ज़्यादा समारोह और इवेंट में ढोल बजाया है। सबसे पहले उनके बारे में साल 2011 में ब्रिटेन की एक मैगज़ीन ‘टॉम टॉम‘ ने लिखा था। जहान भारत की सबसे युवा लड़की ढोली हैं और अब यह उनकी पहचान का एक हिस्सा है।

‘टेड एक्स’ चंडीगढ़ में जहान गीत सिंह

इसके बाद जहान को कई स्थानीय टीवी चैनल जैसे पीटीसी पंजाब और रेडियो स्टेशन पर बुलाया जाने लगा। उन्हें जोश टॉक, टेड टॉक जैसे इवेंट में भी अपना अनुभव साझा करने का मौका मिला। उन्होंने नेशनल टीवी के रियलिटी शो, ‘एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा’ और ‘इंडियाज़ गोट टैलेंट’ में भी अपने ढोल की छाप छोड़ी है। बहुत से अवॉर्ड्स, पुरस्कार और सर्टिफिकेट्स से उन्हें नवाज़ा गया है।

जहान कहती हैं, “मैंने अपने भाषणों में लोगों को बताया कि मैं एक स्टूडेंट हूँ और अपनी पढ़ाई करते हुए अपने शौक और अपने जुनून को भी आगे बढ़ा रहीं हूँ। यह करने का हक़ हर किसी बच्चे को मिलना चाहिए। मैं हमेशा से एक वकील बनना चाहती थी, क्योंकि मेरे पापा भी उसी क्षेत्र में हैं और मेरी बचपन से ही वकालत में दिलचस्पी रही। बाकी ढोल बजाना मेरा शौक है और यह वक़्त के साथ मुझे पता चला कि मेरा यह कुछ अलग करना; आज बहुत-से लोगों को प्रेरणा दे रहा है।”

अगर हमारे समाज में सभी बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ उनकी पसंद से कुछ करने का मौका मिले, तो शायद हमारे समाज का नज़रिया काफ़ी बदल जाये। इसलिए जहान का मानना है कि अगर उन्हें स्टेज पर ढोल बजाते हुए देख; एक भी लड़की या फिर कोई एक इंसान भी प्रेरित होता है तो काफ़ी है। इस बारे में आगे बात करते हुए जहान ने एक बहुत ही दिल छू जाने वाला वाकया द बेटर इंडिया के साथ साझा किया। उन्होंने बताया,

“मैंने एक जगह परफॉर्म किया और उसके बाद, जब मैं वहाँ लोगों से बात कर रही थी, तो एक आंटी मेरे पास आयीं और मेरे गले लगकर रोने लगीं। उन्होंने मुझे कहा कि उनकी बेटी बहुत अच्छा भांगड़ा करती थी, पर लोगों की बातों और तानों के चलते उन्होंने उसे रोक दिया। लेकिन जब उन आंटी ने मुझे ढोल बजाते देखा तो उन्हें अहसास हुआ कि उन्होंने ग़लत किया। उस दिन उन्होंने मुझे कहा कि अब वे भी अपनी बेटी का सपना पूरा करने में उसका साथ देंगी।”

फोटो साभार: जहान गीत सिंह

लोगों की ज़िंदगी में बदलाव लाने के उद्देश्य से ही जहान अलग-अलग संगठनों और एनजीओ आदि के साथ काम कर रही हैं। वे ज्यादातर ऐसे इवेंट में परफॉर्म करती हैं, जो किसी नेक काम और किसी बदलाव के लिए रखा गया हो। यहाँ वे ढोल बजाती हैं और साथ ही, प्रेरणात्मक भाषण भी देती हैं। उनका कहना है कि उनका प्रोफेशन उनकी वकालत की पढ़ाई से बनेगा और ढोल के ज़रिये वे समाज में एक परिवर्तन लाना चाहती हैं।

जहान को पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री और अच्छे बैंड्स की तरफ से भी कई ऑफर मिले हैं कि वे उनके साथ काम करें। पर जहान का कहना है कि वे हमेशा आम लोगों से जुड़े रहना चाहती हैं, ताकि लोगों को हमेशा लगे कि वे भी उनमें से ही एक हैं। उन्हें देखकर बाकी लड़कियों को यही लगना चाहिए कि अगर ये कर सकती है तो हम भी कर सकते हैं। इसलिए जहान आम लोगों के बीच परफॉर्म कर उनके लिए एक प्रेरणा बनना चाहती हैं।

भारत की इस ढोल गर्ल से आप उसके फेसबुक पेज ‘जहान गीत’ पर सम्पर्क कर सकते हैं। जहान की ढोल परफॉरमेंस देखने और उनकी टेड टॉक सुनने के लिए विडियो देखें,

(संपादन – मानबी कटोच)


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बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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