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Nomadic couple

दो बैग्स में बसाकर अपना घर, यह कपल कर रहा है दुनिया की सैर 

मिलिए एक ऐसे कपल से, जिन्होंने शादी के बाद घर बसाने की बजाय घर ही छोड़ दिया। जी हाँ! रुचिका शंकर और अभिमन्यु शास्त्री, शादी के बाद पिछले छह सालों से मात्र दो बैग्स लिए दुनिया घूम रहे हैं।

साल 2014 में जब दिल्ली की रुचिका शंकर मैसूर के अभिमन्यु शास्त्रीसे मिलीं तब अभिमन्यु दो महीने की नेपाल यात्रा करके लौटे थे। पेशे से वकील रुचिका को यह जानकर इतना आश्चर्य हुआ कि कैसे अभिमन्यु अपनी नौकरी के साथ, इतनी लम्बी यात्रा (travel the world) करते हैं? घूमने की शौक़ीन रुचिका और अभिमन्यु की दोस्ती उनके इसी शौक के कारण हुई थी। 

उस समय अभिमन्यु एक टेक स्टार्टअप कंपनी में काम करते थे, जो उन्हें घूम-घुमकर काम करने की आजादी देती थी। लेकिन रुचिका अपना काम ऐसे नहीं कर सकती थीं, इसलिए उन्होंने कुछ ऐसा काम करने की सोची, जिससे उन्हें भी अभिमन्यु के जैसी घूमने की आजादी मिल सके।  

आख़िरकार, उन्होंने कंटेंट राइटिंग और लॉ कंपनी के लिए सोशल मीडिया मार्केटिंग करने का काम शुरू किया। दो साल की दोस्ती के बाद, साल 2016 में उन्होंने शादी करने का फैसला किया। रुचिका कहती हैं, “शादी के समय ही हमने फैसला कर लिया था कि हम अपना जीवन घर और कार खरीदने के लिए बैंक लोन चुकाकर नहीं बिताने वाले। हम पूरी दुनिया घूमेंगे और एक बिल्कुल ही मिनिमल जीवन बिताएगें। हमारी शादी भी बिना किसी ताम-झाम के हुई थी।”

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क्या थी शुरुआती प्लानिंग ?

दरअसल, जब उन्होंने खानाबदोश जीवन बिताने (travel the world) का फैसला किया था, तभी से उन्होंने अपने खर्चे कम करना और ज्यादा बचत करना शुरू कर दिया था।  

indian couple living a minimal life
Ruchika At Her Minimal Home

जुलाई 2016 में शादी के बाद, उन्होंने बिल्कुल ही कम खर्च और सामान के साथ बेंगलुरु में एक घर किराये पर लिया। उनके घर में एक टेबल, एक कुर्सी,  एक फ्रिज और कुछ कपड़े ही थे। उन्होंने नवंबर 2016 में गोवा की एक छोटी यात्रा करने का फैसला किया। उन्होंने अपना सारा फर्नीचर बेचा और बस दो बैग्स और दो बैकपैक में सारा सामान लेकर निकल पड़ें (travel the world)।  

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हालांकि, उन्हें उस समय इंटरनेट से जुड़ी कई दिक्क़ते भी आई थीं। 2016 के समय गोवा के दूर दराज की जगहों में इंटरनेट अच्छा नहीं था, इसलिए उन्हें शहरी इलाके में ही रहना पड़ता था।

कुछ महीने गोवा में बिताने के बाद, उन्होंने इसे इंटरनेशनल ट्रिप बनाने का फैसला किया। इसके बाद, अगले दो साल उन्होंने एशिया के अलग-अलग देशों में घूमकर ही बिताएं।   

सुनहरी यादें 

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किसी भी देश में यात्रा (travel the world) करने से पहले वे इसकी पूरी तैयारी कर लेते हैं। जहां भी वे जाते हैं, वहां वे एक छोटा फर्निश्ड अपार्टमेंट लेते हैं और आस-पास की जगहों और लोकल लोगों के साथ समय बिताते हैं। वे कोशिश करते हैं कि जहां भी वे रहें, वहां की कला और संस्कृति को समझ सकें।

रुचिका कहती हैं, “हर देश के अपने अलग अनुभव हैं। जापान में रंगीन पेड़ों को देखना और दक्षिण अमेरिकी देश पेरू के माचू पिच्चू में घूमना, मेरे जीवन के दिलचस्प अनुभवों में से एक हैं।”

इसके अलावा उन्हें मैक्सिको के लोगों का मिलनसार स्वभाव भी काफी पसंद आया। कोरोना के समय वहां रहते हुए, वहां के लोगों ने उनकी काफी मदद की थी, जिसे वे कभी भूल नहीं सकते।

यात्रा से जुड़ी चुनौतियां 

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रुचिका कहती हैं, “इस तरह के जीवन (travel the world) के लिए आपको एक अच्छी प्लानिंग की जरूरत होती है। आपके पास अच्छी सेविंग होनी चाहिए ताकि अगर फ्रीलांसिंग का काम न मिले तो एक दो महीने आराम से निकल जाएं। कुछ साल पहले जब हम बाली में थे, तब हमारे पास कोई काम नहीं था। एक समय पर तो, हमने घर आने का भी मन बना लिया था,  लेकिन हमारे पास सेविंग थी, इसलिए कुछ महीने निकल गए। इसके बाद हमें नया काम भी मिल गया।”

इसके अलावा वह कहती हैं कि अच्छी नेटवर्किंग भी आपके बहुत काम आ सकती है। और अगर आप लम्बा घूमने का मन बना रहे हैं, तो ऐसे देश चुनें, जिनमें घूमना सस्ता हो। एशिया के कई देश काफी सस्ते हैं। आप ताइवान, बाली या कम्बोडिया (travel the world) जा सकते हैं।  

कोरोना के समय वे एक साल मैक्सिको में थे, जिसके बाद पिछले साल वे अमेरिका आ गए  थे। यहाँ उनके कुछ रिश्तेदार भी रहते हैं।

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Ruchika And Abhimanyu (travel the world)
Ruchika And Abhimanyu

रुचिका कहती हैं, ‘घरवालों को लगा कि कोरोना के बाद  शायद हम अमेरिका में एक स्थायी नौकरी और घर ले लेंगे, लेकिन हमने घूमना (travel the world) जारी रखा। इस साल फरवरी में हम घर आए हैं। फ़िलहाल हम भारत के अलग-अलग हिस्सों में घूमने का मन बना रहे हैं, जो हमने अभी तक देखे नहीं हैं। भारत में भी अब ‘वर्क फ्रॉम होम कल्चर’ काफी बढ़ गया है और  इंटरनेट की सुविधा भी काफी अच्छी है।”

खानाबदोश जीवन के फायदे 

रुचिका और अभिमन्यु इस तरह के जीवन को मुश्किल से ज्यादा रोमांचक बताते हैं। इस तरह अलग-अलग जगह रहने से वे कई तरह के काम कर सकते हैं। इस दौरान उन्होंने जाना कि हर काम को अलग-अलग तरिके से भी किया जा सकता हैं।  उनका परफॉरमेंस भी बेहतर हुआ है।  

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रुचिका कहती हैं, “जब हम ताइवान में थे, तब हम चाइना के LinkedIn के फाउंडर के घर पर रुके थे। हमने उनसे उनका काम करने का तरीका सीखा। 

इस तरह के जीवन की सबसे अच्छी बात यही है कि आप दुनिया के अलग-अलग लोगों से मिल सकते हैं, उनके अनुभवों से सीखते हैं।” 

हाल में, रुचिका अपने अनुभवों को अपने ब्लॉग ‘Second Breakfast’ के जरिए लोगों तक पंहुचा रही  हैं। वह इंस्टाग्राम के जरिए भी अपनी यात्रा की जानकारियां लोगों को देती हैं। इसके अलावा उनका एक  यूट्यूब चैनल भी है, जिससे वह अच्छे पैसे भी कमा रही हैं। वह लोगों को ट्रेवल टिप्स और इस तरह के जीवन जीने के नुस्खे भी सिखाती हैं। अभिमन्यु अभी भी फ्रीलांस का काम कर रहे हैं।  

उन्होंने बताया कि उनके परिवार में ज्यादातर लोग सरकारी नौकरी के साथ एक स्थायी जीवन जीना ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन रुचिका और अभिमन्यु ने सामान्य से हटकर, एक अलग ही अंदाज से जीवन बिताने का फैसला किया और इस पर अमल करके भी दिखाया। हालांकि, शुरुआत में परिवारवालों को लगा कि वे एक साल में घूमकर वापस आ जाएंगे, लेकिन पंख लगने के बाद पक्षी को रोकना मुश्किल है। ठीक उसी तरह एक आजाद जीवन जीने के बाद, इस कपल को, एक जगह पर रहना, पिंजरे में रहने जैसा लगता है।  

संपादन – मानबी कटोच

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