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भारतीय रेलवे का सराहनीय कदम, पीरियड्स के दौरान की महिला यात्री की मदद!

कुछ अच्छा करने के लिए जरूरी नहीं है कि आपको हमेशा कुछ बड़ा ही करना होता है। कभी-कभी बहुत छोटी-छोटी बातें भी एक बड़े बदलाव की सीढ़ी बन सकती हैं। ऐसा ही एक छोटा पर मदद और ज़िम्मेदारी भरा कदम उठा कर भारतीय रेलवे ने साबित किया कि हम एक बेहतर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।

15 जनवरी 2019 यानी कि सोमवार को ट्विटर पर भारतीय रेलवे से एक पुरुष यात्री ने मदद मांगी कि उसकी दोस्त को ट्रेन में अचानक पीरियड्स शुरू हो गये हैं। ऐसे में अगर रेलवे पैड्स और दर्द की दवाई उपलब्ध करवाकर उसकी मदद कर सकता है, तो अच्छा रहेगा।

इस ट्वीट पर भारतीय रेलवे के अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कुछ समय पश्चात् लड़की को जिन भी चीज़ों की जरूरत थी वे उस तक पहुंचाई गयीं।

हालांकि, इस केस में स्थिति कोई जानलेवा या गंभीर नहीं थी। पर फिर भी कहीं न कहीं यह घटना, बदलते हुए भारत की तस्वीर है। सबसे पहली अच्छी बात यह है कि विशाल खानापूरे ने एक लड़का होते हुए भी एक लड़की की परेशानी को समझा और खुद ट्वीट किया। दूसरा यह कि रेलवे अधिकारियों ने पूरी ज़िम्मेदारी के साथ इस पर प्रतिक्रिया दी।

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विशाल अपनी एक दोस्त के साथ बेंगलुरु-बल्लारी-होसपेट पैसेंजर ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। ट्रेन में बैठने के कुछ समय बाद ही विशाल की दोस्त को पीरियड्स शुरू हो गये और उस वक़्त उसके पास पैड्स या फिर कोई दवा नहीं थी। ऐसे में उसने विशाल को अपनी परेशानी बताई।

यह ट्रेन बेंगलुरु से रात में 10.15 बजे रवाना होती है और अगले दिन सुबह 9.40 बजे बल्लारी पहुंचती है।

विशाल ने अपनी दोस्त की परेशानी को समझा और सूझ-बूझ से काम लेते हुए ट्विटर पर रात को लगभग 11 बजे भारतीय रेलवे और रेल मंत्री पीयूष गोयल को टैग करते हुए ट्वीट किया, “यहाँ एक इमरजेंसी है…. मेरी एक दोस्त होसपेट पैसेंजर में यात्रा कर रही है… (सीट का विवरण)… उसे पैड्स और मेफ्टल स्पास टैबलेट की ज़रूरत है। कृपया उसकी मदद करें।”

रेलवे ने इस ट्वीट पर तुरंत ध्यान दिया। विशाल ने बताया कि रात के लगभग 11:06 बजे एक अफ़सर ने उनकी दोस्त से बात करके जानकारी ली कि उसे किन-किन चीजों की ज़रूरत है और उसका पीएनआर नंबर और मोबाइल नंबर आदि लिया। लगभग 2 बजे जब ट्रेन अरासीकेरे स्टेशन पर पहुंची, तो मैसूरु डिवीजन के अधिकारी उन सभी चीजों के साथ तैयार थे, जो उसने मांगी थीं।

एक रेलवे अधिकारी ने प्रकाशन को बताया, “इस तरह के अनुरोध अक्सर ट्वीट्स के माध्यम से या 138 पर किए जाते हैं। हम यात्रियों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।”

विशाल के ट्वीट और भारतीय रेलवे के इस कदम ने यह साबित कर दिया कि अब माहवारी के बारे में बात करना कोई शर्म का मुद्दा नहीं है। बल्कि अब महिलाएँ खुले तौर पर इस बारे में बता सकती हैं।

इसके साथ ही हमें उम्मीद है कि रेलवे व अन्य परिवहन प्रबंधन इस मुद्दे पर गौर करें और ट्रेन, बस आदि में महिलाओं के लिए माहवारी किट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएँ।


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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