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छत्तीसगढ़: हर रोज़ तेल के डिब्बों के सहारे नदी पार करती थीं छात्राएँ; कलेक्टर ने की समस्या हल!

त्तीसगढ़ के रहता गाँव की निवासी पूनम कुमारी, प्रीति, और शांति को अपने स्कूल पहुँचने के लिए हर रोज़ एक चुनौती का सामना करना पड़ता था। दरअसल, इनका स्कूल एक दूसरे गाँव अरजपुरी में है और इस गाँव तक पहुँचने के लिए उन्हें खरखरा डैम के रिज़रवायर को पार करना पड़ता है।

नाव आदि की कोई ख़ास सुविधा न होने के कारण न सिर्फ़ इन बच्चियों को बल्कि अन्य गाँववालों को भी काफ़ी परेशानीयों से गुजरना पड़ता था। कभी वे खाली तेल के टिन, कभी रस्सियों और कभी लकड़ी के टुकड़ों से पतवार बनाकर जैसे-तैसे इसे पार कर दूसरी ओर पहुंचते थे।

लेकिन अब इन सबकी परेशानी दूर हो चुकी है और इसका श्रेय जाता है बालोद जिले की कलेक्टर किरण कौशल को। कौशल को जब गाँववालों की इस परेशानी के बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत इसे हल करने के लिए काम शुरू किया।

फ़लस्वरूप, 8 जनवरी को जब ये तीनों छात्राएँ स्कूल जाने के लिए नदी किनारे पहुँची तो दंग रह गयीं। दरअसल, कौशल ने इनकी परेशानी दूर करने के लिए एक मोटरबोट, लाइफ-जैकेट्स और दो होम गार्ड्स का इंतज़ाम करवाया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए, कौशल ने कहा, “मैं सोमवार (7 जनवरी 2019) को गाँव के निवासियों की शिकायतों को सुनने के लिए अपनी टीम के साथ गाँव गई। वहाँ गाँववालों ने बताया कि उन्हें किराने और अन्य दैनिक जरूरतों का सामान लेने के लिए अरजपुरी गाँव तक पहुँचने के लिए तेल के डिब्बे से बनी नावों पर जाना पड़ता है। इसलिए हमने मोटरबोट लगवाई और दो होम गार्ड नियुक्त किये हैं, जो गाँववालों और इन लड़कियों को सुरक्षित रहता गाँव से अरजपूरी गाँव तक आने-जाने में मदद करेंगें। उन्हें लाइफ-जैकेट भी दी गयी हैं।”

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प्रतीकात्मक तस्वीर, इनसेट में आईएएस किरण कौशल

हर दिन की मुश्किल हल होने पर इन बच्चियों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था और उन्होंने बस इतना कहा, “हमें कभी भी इतना अच्छा नहीं लगा।”

हालांकि, इन गाँववालों ने इस आईएएस अफ़सर से एक छोटी-सी गुज़ारिश की है। गाँववाले इस मोटरबोट का रख-रखाव करने में सक्षम नहीं है, इसलिए उन्होंने कलेक्टर कौशल से अपील की है कि इस मोटरबोट की जगह उन्हें चप्पू वाली नाव ही दे दी जाये।

इस अपील के जबाव में कौशल ने भी उनसे वादा किया कि जल्द ही वे उनके लिए अच्छी नाव का इंतजाम करवाएंगी।

बेशक, यह काम बहुत सराहनीय है। पर फिर भी हम उम्मीद करेंगे कि गाँव वालों के लिए कोई स्थायी समाधान हो जैसे कि पुल बनवा दिया जाये या फिर और ज्यादा से ज्यादा नाव प्रदान की जाएँ। पर कहते हैं न कि एक अच्छा काम ही दूसरे अच्छे काम की नींव बनाता है, तो हमें आशा है कि गाँव के विकास की और भी अच्छी ख़बरें हमें मिलेंगी।

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(संपादन – मानबी कटोच)


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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