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Rajma Chawal, food Business

छिन गई नौकरी और छत, तो कार को बनाया घर और डिक्की में शुरू किया बिजनेस

दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम के जंक्शन पर हर रोज दोपहर 12.30 बजे से शाम 4 बजे के बीच सफेद रंग की ऑल्टो कार आती है। करन और अमृता गाड़ी की डिक्की खोलते हैं और अंदर से चमचमाते हुए स्टील के कंटेनर बाहर निकालते हैं, जिनमें से गरमा-गरम राजमा, छोले, कढ़ी, चावल और ठंडी-ठंडी छाछ की निकलती खुशबू आस-पास फैल जाती है।

दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम के जंक्शन पर हर रोज दोपहर 12.30 बजे से शाम 4 बजे के बीच सफेद रंग की ऑल्टो कार आती है। गाड़ी में से करन और अमृता बाहर निकलते हैं और गाड़ी की डिक्की खोलते हैं। दोनों अपने-अपने ऐप्रन पहनते हैं और अंदर से चमचमाते हुए स्टील के कंटेनर बाहर निकालते हैं। इन कंटेनर्स में से गरमा-गरम राजमा (Rajma Chawal), छोले, कढ़ी, चावल और ठंडी-ठंडी छाछ की निकलती खुशबू आस-पास फैल जाती है।

जब तक ये दोनों तैयारी करते हैं, उतनी ही देर में वहां खाने का ऑर्डर देने के लिए भीड़ इक्ट्ठा होनी शुरु होने लगती है। करन और अमृता एक दिन में करीब 100 लोगों को खाना खिलाते हैं। गाड़ी में लाया इनका खाना खत्म हो जाता है, लेकिन ग्राहकों का आना लगा रहता है।  

रविवार को छोड़कर ये दोनों हर रोज इसी जगह अपनी गाड़ी लगाते हैं। लेकिन करन कुमार और उनकी पत्नी अमृता के लिए यह केवल राजमा चावल (Rajma Chawal) का बिजनेस नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा बन गया है। 

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रातों-रात घर खाली करने को कह दिया गया

Chole and Kadhi pakoda by Amrita Ji Ke Rajma Chawal In Delhi
Chole and Kadhi pakoda.

यह बिजनेस (Rajma Chawal Business) शुरू करने से पहले, करन एक सांसद के यहां ड्राइवर की नौकरी करते थे। लेकिन COVID-19 महामारी में उनकी नौकरी चली गई। आर्थिक दिक्कतों के कारण करन 12वीं से आगे नहीं पढ़ पाए। द बेटर इंडिया के साथ बात करते हुए करन बताते हैं कि घर के हालात इतने खराब थे कि कभी पढ़ाई में दिलचस्पी हुई ही नहीं। वह जल्द से जल्द पैसे कमाना चाहते थे।

साल 2015 में वह अपने एक परिचित के माध्यम से पहली बार अमृता से मिले। इन सालों में करन ने कई नौकरियां की। वह बताते हैं कि आखरी बार जहां वह काम कर रहे थे, वहां उन्हें 14000 रुपये तनख्वाह मिल रही थी। साथ में रहने के लिए क्वार्टर और रोजमर्रा का कुछ जरुरी सामान मिला था। 

लेकिन करन बताते हैं कि महामारी के दौरान, रातों-रात उनकी नौकरी तो चली ही गई, साथ ही रहने के लिए छत भी नहीं रही। वह कहते हैं, “वहां हमें फौरन घर खाली करने के लिए कहा गया। एक-आध दिन का ही समय था। हम बेघर हो गए थे। हमारे पास रहने के लिए कोई जगह नहीं थी।”

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घर वालों ने तोड़ लिए सारे रिश्ते

करन का कहना है कि साल 2016 में उनके परिवार ने व्यक्तिगत और संपत्ति के विवादों के कारण उनसे सारे रिश्ते तोड़ लिए थे और वह उनसे मदद नहीं मांग सकते थे। वह आगे बताते हैं कि उनके ससुराल वालों ने उनकी मदद की और दूसरी नौकरी मिल जाने तक साथ रहने के लिए कहा। लेकिन वह ज्यादा समय तक वहां नहीं रह सके, क्योंकि उन्हें पता नहीं था कि नई नौकरी कब मिलेगी। 

food business of Amrita and Karan
Amrita and Karan.

करने आगे बताते हैं कि उनके ससुर ने उनकी आगे बढ़कर मदद की और अपनी कार इस्तेमाल करने के लिए दे दी। इसके बाद इस जोड़े ने दो महीने दिल्ली की सड़कों पर कार में गुजारे। करन बताते हैं कि उन्होंने नौकरी खोजने की काफी कोशिश की। अपनी भूख मिटाने के लिए बंगला साहिब और रकब गंज गुरुद्वारों में खाना खाया। अलग-अलग जगहों पर रातें बिताईं और सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल किया।

अमृता कहती हैं कि दिन में किसी तरह खुद को व्यस्त रख लेती थी, लेकिन अक्सर रात में अकेला और उदास महसूस करती थी। वह कहती हैं कि कई रातें उन्होंने रोते हुए गुजारी हैं। फिर एक दिन ऐसा आया, जब उन्होंने महसूस किया कि वह खाना-बदोशों की तरह नहीं रह सकती हैं। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा करन से ट्यूशन पढ़ाने या किसी तरह का पार्ट-टाइम काम करने के बारे में कहा करती थी। लेकिन पॉलिटिशिअन के घर काम करने की अपनी सीमाएं थीं। फिर मैंने फूड बिजनेस (Rajma Chawal Business) शुरु करने का सुझाव दिया।”

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कैसे शुरू किया ‘Amrita Ji Ke Rajma Chawalबिज़नेस?

अमृता ने ही छोले, राजमा (Rajma Chawal), कढ़ी पकोड़े और चावल बेचने का सुझाव दिया था। वह बताती हैं कि करन इस बिजनेस के लिए मान गए और पूंजी जुटाने के लिए उन्होंने अपनी अलमारी, कबर्ड और अन्य सामान बेच दिया। कुछ दोस्तों और अमृता के पिता ने भी छोटी सी राशि का योगदान दिया, जिससे उन्होंने कुछ किराने का सामान और खाना पकाने के बर्तन खरीदे। उन्होंने शहर के मंडी हाउस में खाना पकाने के लिए एक जगह किराए पर ली और किराया देने के लिए थोड़ा कर्ज लिया।

इसके बाद करन और अमृता सुबह साढ़े तीन बजे उठ जाते और दोनों मिलकर खाना पकाकर, सुबह करीब 10 बजे खाना बेचने के लिए जगह-जगह जाते। लॉकडाउन की पाबंदियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं थी। लेकिन एक महीने बाद, उन्हें  तालकटोरा स्टेडियम के पास उम्मीद के मुताबिक ग्राहक मिलने लगे और इसलिए उन्होंने इसे अपना बेस बनाने का फैसला किया।

करन कहते हैं कि दोनों ने एक सीमित मेन्यू के साथ एक दिन में लगभग 1,600 रुपये का निवेश किया। उनके पास अपने बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए मार्केटिंग बजट नहीं था। उन्होंने इसे ‘अमृता जी के राजमा चावल (Amrita ji Ke Rajma Chawal)’ नाम दिया। उनके खाने की प्लेटों की कीमत 30 रुपये से 50 रुपये के बीच है।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो और बढ़ गया बिज़नेस

इस बिजनेस (Amrita Ji Ke Rajma Chawal) को शुरु करने के साथ कुछ शक और संदेह भी जुड़े हुए थे। करन बताते हैं कि उन्हें अपने बिजनेस पर कोई भरोसा नहीं था, क्योंकि उनके पास बैठने की कोई जगह नहीं थी। खाना भी कार से डिलीवर होता था। कोविड महामारी को लेकर ग्राहक भी स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क रहते थे।

हालांकि,  बिजनेस शुरू करने के कुछ दिनों बाद, एक सोशल मीडिया ब्लॉगर करण दुआ ने अपने चैनल ‘दिल से फूडी’ पर करन औऱ अमृता के बारे में बताया और यही उनके लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। वीडियो वायरल हो गई और करन-अमृता को दिल्ली के कई हिस्सों से लोग पूछताछ के लिए संपर्क करने लगे।

करन बताते हैं कि उन्हें सोशल मीडिया से भरपूर समर्थन मिला। बिना किसी मार्केटिंग बजट के बिजनेस को बढ़ाने का यह एक अच्छा तरीका था। वह कहते हैं, “ब्लॉगर्स ने काफी हद तक हमारी मदद की। धीरे-धीरे हमने 320 रुपये का मुनाफा कमाना शुरु किया, जो बढ़कर प्रतिदिन 450 रुपये और फिर 800 रुपये हो गया।”

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जल्द आएगा ‘Amrita Ji Ke Rajma Chawal’ का नया मेन्यू

करन कहते हैं कि उनके पास नए ग्राहक तो आते ही हैं, साथ ही कई ग्राहक ऐसे भी हैं, जो वहां बार-बार आते हैं। वह कहते हैं, “हमारा सबसे लोकप्रिय व्यंजन राजमा चावल (Rajma Chawal) और कढ़ी पकोड़ा है।”

खाने की वैन पर बार-बार आने वाले ग्राहकों में से एक हैं, वासु पराशर। वह कहते हैं, “मैंने यहां के सभी आइटम चखे हैं और हर बार स्वाद एक जैसा होता है। मैंने अपने दोस्तों को भी इस दंपति से मिलवाया है और उनसे बिजनेस को सपोर्ट करने का अनुरोध किया है। मुझे उम्मीद है कि उनके बिजनेस में सुधार होगा और वे एक आरामदायक जीवन जीने में सक्षम होंगे।”

हालांकि करन बताते हैं कि अभी भी उनके बिजनेस में वह स्थिरता नहीं आई है। वह बताते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट आने की वजह से राजमा की बिक्री में गिरावट आई है। अभी उनका राजस्व 60,000 रुपये प्रति माह है और लाभ भी कम ही है। करन आगे बताते हैं कि अब वह एक नई डिश, शाही पनीर लेकर आए हैं और जल्द ही एक पूरी थाली बनाने की योजना कर रहे हैं।

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“संकट ने हमारे रिश्ते को और मजबूत बना दिया है”

lockdown food business inspiring
Food ready to be served.

बिक्री रास्ते पर लाने के लिए करन और अमृता को अपने ग्राहकों से काफी ज्यादा उम्मीदें हैं। वे कहते हैं कि उन्हें अपने ग्राहकों से प्रोत्साहन की जरूरत है। ग्राहकों के फीडबैड से उन्हें बिजनेस को सुधारने और बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। करने ने कहा, “अमृता और मेरे पास बिजनेस करने का कोई अनुभव नहीं है। हमें काफी कुछ सीखना है। अगर लोग हमारा मार्गदर्शन करते हैं, तो हमें काफी मदद होगी।”

तमाम चुनौतियों के बावजूद, करन अपनी मौजूदा स्थिति से खुश हैं। वह कहते हैं कि आय के लिए वे किसी पर निर्भर नहीं हैं और वित्तीय सुरक्षा के लिए उनके पास अपना बिजनेस है। करन चाहते हैं कि भविष्य में वह अपने बिजनेस (Amrita Ji Ke Rajma Chawal) का विस्तार करें। वह अपनी एक दुकान खोलना चाहते हैं, जहां लोग बैठकर खाना खा सकें।

मुश्किल समय में अपनी पत्नी के साथ होने पर करन काफी गर्व महसूस करतें है। वह कहते हैं, “अमृता ने मेरा साथ नहीं छोड़ा बल्कि हर कदम पर मेरा साथ दिया। संकट ने हमारे रिश्ते को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बना दिया है।”

अमृता का मानना है, “यह एक पार्टनरशिप है, और हम दोनों को एक दूसरे की ज़रूरत है। हमें एक साथ सफल होने के लिए एक टीम के रूप में काम करने की जरूरत है।”

करन और अमृता को सपोर्ट करने के लिए उनसे 9625479813 पर संपर्क करें।

मूल लेखः हिमांशु नित्नावरे

संपादनः अर्चना दुबे

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