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Gau organic team, Kota, Rajsthan

बिलोना घी से खाद तक सब मिलता है यहां, गोबर गैस से प्लांट की बिजली भी बनती है मुफ्त

कोटा के अमनप्रीत सिंह ने 6 साल में ही अपने गऊ ऑर्गनिक डेयरी स्टार्टअप को 7 करोड़ सालाना टर्न ओवर के पार पंहुचा दिया। उन्होंने यह कारनामा किया दूध, बिलोना घी, वर्मी कम्पोस्ट, केंचुआ एवं गोबर खाद को बेचकर।

बेटा….बढ़िया पढ़ाई-लिखाई की है, इंजीनियर हो, कहीं अच्छी नौकरी कर लो। कहां तुम खेती-बाड़ी, गाय, गोबर के चक्कर में पड़े हो? ज़्यादा पढ़े-लिखे लोगों को अक्सर ऐसी बातें सुननी पड़ती हैं। कोटा के युवा इंजीनियर अमनप्रीत सिंह ने भी जब इंजीनियरिंग के बाद, गांव में रहकर डेयरी फार्मिंग बिजनेस (Dairy Farming Business) करने की सोची, तो उन्हें भी ऐसी बातें सुनने को मिलीं। लेकिन बदलते समय के साथ, अमन की बदलती सोच ने सबको गलत साबित कर दिया।

एक समय था जब अमन के खेतों में महज़ तकनीकी क्रॉप खेती हुआ करती थी, लेकिन अमन ने इसमें थोड़े बदलाव किए। उन्होंने अपनी 120 एकड़ की पुश्तैनी ज़मीन पर डेयरी फार्म खोला। आज वह ‘गऊ ऑर्गेनिक’ नाम से खुद का स्टार्टअप चला रहे हैं और फिलहाल, उनके पास 300 से अधिक गायें हैं, जिन्हें खिलाया जाने वाला पौष्टिक चारा (गन्ना, ओट्स, खल आदि) भी अमन वहीं, शुद्ध ऑर्गेनिक तरीके से उगाते हैं।

Dairy Farming Business के लिए छोड़ दी अच्छी खासी नौकरी

साल 2013 में इंजीनियरिंग (B. Tech.) करने के बाद से ही 31 वर्षीय अमन की रुचि कृषि में थी, इसलिए डेयरी फार्म की बारीकी सीखने के लिए उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन, फील्ड से अलग हटकर की और NDRI से पीजी करने के बाद, अमूल व नेसले जैसी बड़ी कंपनियों में जॉब करने लगे।

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Amanpreet Singh, Founder, Gau Organic
Amanpreet Singh, Founder, Gau Organic

लेकिन वह अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि दिमाग से गांव, खेती, अपना बिजनेस ये चीज़ें निकल ही नहीं रही थीं और फिर कुछ समय बाद, आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़कर कोटा जाने और अपना काम शुरू करने का फैसला लिया। वहां, उन्होंने अपने दोनों भाइयों गगनप्रीत और उत्तमजोत सिंह के साथ मिलकर ‘गऊ ऑर्गेनिक (Dairy Farming Business)’ नाम से स्टार्टअप की शुरुआत की।

अमन का कहना है, “मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद से ही डेयरी फार्म के जरिए शुद्ध दूध और बिलोना घी लोगों के घर-घर तक पहुंचाने का मन बना लिया था, इसलिए पीजी के लिए NDRI में दाखिला लिया। वहां से डेयरी फार्म की बारीकी सीखी और खुद के स्टार्टअप में उसे उम्दा तरीके से उपयोग किया।”

गायों के स्वास्थ्य व सफाई का रखते हैं पूरा ध्यान

कुछ ही गायों के साथ शुरू हुआ अमन का बिज़नेस (Dairy Farming Business) धीरे-धीरे बढ़ता गया और गायों की संख्या भी। आज अमन के पास 300 गायें हैं। गऊ ऑर्गनिक डेयरी फार्म में तकनीक का भरपूर उपयोग किया गया है। यहाँ गायों की सेहत व साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। उनके फीडिंग के लिए चारा, फार्म में ही उगाया जाता है, जिसमें गन्ना, गेहूं के ओट्स, खल, पशु आहार के आवश्यक तत्त्व आदि मुख्य हैं।

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यहां सब कुछ बिना केमिकल के बनाया और उगाया जाता है। गायों के लिए पीने में फ़िल्टर वॉटर का इंतजाम किया गया है, ताकि दूध की गुणवत्ता अच्छी रहे। वातावरण और तापमान को अनुकूल करने के लिए ऑटोमेशन के जरिये पंखे, पानी की बौछार वाले पाइप, गर्मी से बचाव के लिए ऊपर अच्छी शेडिंग आदि की व्यवस्था भी की गई है।

अधिकतर ऐसा देखने को मिलता है कि डेयरी फार्म में गोबर और गोमूत्र की बदबू होती है। लेकिन गऊ ऑर्गेनिक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है। गोबर और गोमूत्र को हर दो घंटे में ऑटोमेटिक रेल द्वारा हटाया जाता है। गंदगी की वजह से गायों को कोई बीमारी ना हो, इसलिए उनके आस-पास, दिन में दो बार रोजाना सफाई की जाती है।

दूध निकालने से पहले वाशिंग सेंटर में गायों को ऑटोमैटिक शावर दिया जाता है, फिर दूध के लिए उन्हें मिल्क सेंटर में भेजा जाता है। जहां, मशीनों के जरिये उनका दूध निकाला जाता है। 

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80% बिजली भी खुद ही करते हैं तैयार

अमनप्रीत, दूध के अलावा, प्लांट में गायों से एक और महत्वपूर्ण प्रोडक्ट बनाते हैं। उन्होंने गाय के गोबर और गोमूत्र को एकत्रित करने के लिए शेड के पास ही एक अंडरग्राउंड टैंक बनाया है, जिसमें स्लाइडिंग रेल के माध्यम से गोबर और गोमूत्र को हर दो घंटे में डाला जाता है, जहाँ से यह सीधे बायो गैस प्लांट में जाता है।

Gau Organic Compost
Gau Organic Compost

इसके बाद, प्लांट में जनरेटर के माध्यम से इसे बिजली में बदला जाता है। इसी बिजली से प्लांट में होने वाली सप्लाई का कुल 80% भाग कवर होता है। अमन ने बताया कि अभी उनके पास 40 किलो वाट के दो प्लांट हैं, जो बायो गैस से ही बिजली उत्पादन का काम करते हैं। बिजली बनने के बाद, इसी गोबर और गोमूत्र से वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद, केंचुआ खाद, कंडे आदि बनाए जाते हैं।

इन खादों व कंडों को अमनप्रीत, खुले बाजार के साथ ऑनलाइन बाजार में भी बेचते हैं। अमेज़न पर गऊ ऑर्गेनिक की केंचुआ खाद और वर्मी कम्पोस्ट, टॉप सेलर्स में शामिल हैं। बायो गैस प्लांट में बनने वाली बिजली का मूल्य प्रति यूनिट मात्र 2 रुपये पड़ता है, जबकि बाहर से ली गई बिजली की कीमत फ़िलहाल लगभग 9 रुपये प्रति यूनिट है।

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अपने Dairy Farming Business से जोड़ा 55 किसानों को

अमन के स्टार्टअप (Dairy Farming Business) से 50 लोगों को तो सीधे ही रोजगार मिला हुआ है और उनकी क्ल्स्टर फार्मिंग से 55 अन्य किसानों को भी फायदा हो रहा है। अमन प्रीत सिंह ने बताया, “हमने आस-पास के गावों में जाकर मालूम किया, तो पता चला कि यहाँ के बड़े-बड़े डेयरी संयंत्र, किसानों से दूध तो लेते हैं, लेकिन उन्हें उसकी अच्छी कीमत नहीं देते और तो और पैसे भी महीने के अंत तक देते हैं।”

उन्होंने बताया, “हमने गऊ ऑर्गेनिक से उन किसानों को जुड़ने का सुझाव दिया, लेकिन हमने शर्त रखी कि गायों को हमारे द्वारा दी जाने वाली फीडिंग ही खिलाई जाएगी। इसके अलावा, हमने किसानों को 24*7 फीडिंग, लाइफ स्टॉक, वेटेनरी सपोर्ट, नॉमिनल मूल्य पर दवाइयां आदि भी देने का ऑफर दिया, तो किसान ख़ुशी-खुशी हमसे जुड़ गए।”

Gau Organic Bilona Ghee
Gau Organic Bilona Ghee

वह आगे कहते हैं, “हम उन्हें यह सब सपोर्ट तो देते ही हैं। साथ ही हम कैश ऑन डिलीवरी अर्थात हाथों-हाथ उन्हें प्रोडक्ट का मूल्य भी अदा कर देते हैं। इससे उनको पैसों के लिए ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता। अभी हमारे साथ 55 किसान हैं, जिसमें से 70% महिलाएं हैं।”

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गाय से निकला दूध और पंजाब के घर-घर में बनने वाला बिलोना घी उनका मेजर प्रोडक्ट है। अमन, इन किसानों की सहायता से रोजाना 4000 लीटर दूध और 110-125 लीटर बिलोना घी बेच रहे हैं और उनका सालाना टर्न ओवर लगभग 7 करोड़ रुपए है। अमन के कुछ आउटलेट पर ऑर्गेनिक दूध से बनी मिठाइयाँ, रबड़ी, लस्सी, छांछ आदि भी मिलते हैं।

लेखकः सुजीत स्वामी

संपादनः अर्चना दुबे

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