पुणे से एस्टोनिया तक बस एक विचार को साथ लिए बदलाव की नयी परिभाषा लिख रहे है तरुण !

ज़रूरी नहीं कि हमारे पास कई संसाधन हों या कोई बड़ा प्लान दिमाग में हो। अच्छाई इनके बिना भी बांटी जा सकती है। ज़रूरत है सिर्फ एक नेक सोच और एक वाक्य "- you're perfect" की, जो हर राह चलते आम इंसान के अन्दर ये आत्मविश्वास पैदा करे कि वे जैसे हैं.. वैसे ही अच्छे हैं.. । बिना किसी धारणा के, बिना किसी पक्षपात के।