एक व्यक्ति जिसने केरल में ३२ एकड़ बंजर ज़मीन को बना डाला एक लहलहाता जंगल !

ज़ों ज़्योनो द्वारा १९५३ में लिखी गयी कथा "द मैन हू प्लांटेड ट्रीज " एल्ज़ार्ड बूफीये नामक एक चरवाहे की कहानी है जिसने समस्त अल्पाइन घाटी में वृक्षारोपण कर, एक वन का पुन्हनिर्माण कर, उसे सजीव कर डाला था। यह तो हमें ज्ञात नहीं कि बूफीये कोई काल्पनिक किरदार है या वास्तविक, परन्तु इस कथा की तर्ज़ पर केरला के कासरगोड़ ज़िले में रहने वाले एक व्यक्ति ने यथार्थ में यह कर दिखाया। एक व्यक्ति जिसने बत्तीस एकड़ बंजर भूमि खरीद कर उसपर वृक्षारोपण किया और उसे हरा-भरा बना डाला।

सिर्फ एक शहीद की विधवा नहीं, एक सच्ची देशभक्त भी थी कविता करकरे!

एक समर्पित अध्यापिका, एक बहादुर शक्स जिसने बेखौफ़ होकर सरकार की खामियो की आलोचना की. मानव अधिकार के लिए लड़ने वाली एक सशक्त कार्यकर्ता : आइए देखे कैसे कविता करकरे केवल एक शहिद की विधवा से बढ़कर भी बहोत कुछ थी. वे सच्चाई के लिए लड़ी तथा कॉन्स्टेबल्स और निचले स्तर के पुलिस वालो के परिवारवालो को सरकार से उनका हक़ दिलवाने मे मदत की. एक सशक्त प्रवक्ता, एक अनुकंपित श्रोता , कविता जैसी अद्भुत व्यक्तित्व के धनी कभी कभी ही पृथ्वी पर जन्म लेते है.

इशान के बनाये लकड़ी के पुल की मदत से अब स्कूल जा पाते है झुग्गी में रहने वाले बच्चे!

जब १७ साल के इशान बलबले ने देखा कि साठे नगर झुग्गी के बच्चो को रोज़ डेढ़ किलोमीटर लम्बे एक गंदे, बदबूदार, कचरे से भरे नाले से गुज़रकर स्कूल जाना पड़ता है , तो उन्होंने इन बच्चो के लिए वहां एक पुल बनाने की ठानी। और ये करिश्मा उन्होंने महज़ आठ दिन में कर दिखाया।