विदेशी लेखकों, एक्टरों और राजनयिकों को आसान और मजेदार तरीकों से हिंदी सिखा रहीं पल्लवी सिंह

भाषा मानवीयता का पुल है, हमें जोड़ती है। वैश्वीकरण के इस दौर में हम दुनियां भर में आवास-प्रवास करते रहते हैं, हमारे देश में भी लाखों विदेशी आते हैं और उनकी मुहब्बत कहिए या कौतुहल कि उनमें से अधिकतर यहीं बस जाते हैं। ऐसे लोग हमेशा भाषा का अवरोध झेलते हुए देश में रहने के बाद भी अलग-थलग से नज़र आते हैं। इन्हें हमसे जोड़ने के लिए संवाद अनिवार्य है और संवाद के लिए समान भाषा जरूरी होती है।

पढ़िए, पं. भगवतीप्रसाद वाजपेयी की लिखी कहानी – ‘मिठाईवाला’!

रोहिणी अचंभित है कि आखिर उसके गाँव में आनेवाला फेरीवाला कभी खिलौने बेचता है तो कभी मुरली और अंत में मिठाई बेचने लगता है। पर जो भी चीज़ वो लाता है, वह बहुत ही सस्ते दाम पर बेचता है। आखिर एक दिन रोहिणी उससे पूछ ही लेती है कि वह ऐसा क्यूँ करता है। कारण जानकार आपकी भी आँखे भर आएँगी!

12 किताबे प्रकाशित करने और प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपती से प्रशंसा पाने के बाद भी चाय बेचते है लक्ष्मण राव !

रास्ते पर छोटीसी दुकान लगाकर हाथ में चाय की केटली लेके चाय बेचनेवाले लक्ष्मण राव को देखनेवाले लोगो को ये पता नहीं चलता है कि चाय बेचने के अलावा भी उनकी एक अलग दुनिया है, जिसमे वे पढने और लिखने में दिलचस्पी रखते है। लक्ष्मण राव ने 25 किताबे लिखी है और उनमे से 12 प्रकाशित हो चुकी है। इसके साथ साथ वे उच्च शिक्षा की पढाई भी रहे है।